Saturday, July 25, 2026
Home crime मंदिर चोरी : सनातन पर सबसे बड़ा कलंक

मंदिर चोरी : सनातन पर सबसे बड़ा कलंक

By – Prem Pancholi   ।।

अगर मंदिरों में चोरी हो रही है तो यह बड़ा सवाल ही तो है। इसके अलावा जब हम हिन्दू संस्कृति पर बात करें तो मंदिरों में हो रही चोरी को हिंदू समाज क्या कहेगा। वे तो दिल खोलकर अपने धार्मिक मान्यताओं के स्थल पर दान करके आते है। तो फिर इस हरकत को क्या कहेंगे? साहब इसे चोरी ही कहेंगे। ताज्जुब हो कि अयोध्या मंदिर में हुई चोरी का मामला अभी चल ही रहा है कि बद्रीनाथ मंदिर में भी चोरी का खुलासा हो गया है।

आप और हम लोग इस बात पर कितना भरोसा करते है कि मंदिरों में चोरी हुई है। सामान्य तौर पर ऐसा कोई भी श्रद्धालु नहीं सोचेगा कि उनके पूजा स्थल में डाका पड़ गया है। या डाका पड़ने वाला है। यदि आम नागरिक के दिमाग में यह आ जाए कि उनके धार्मिक स्थलों पर उनके द्वारा दिया गया दान कभी भी चोरी हो जाएगा तो वे कभी भी मंदिर में दान या नगदी भेंट नहीं चढ़ाएंगे।

साहब यदि मंदिरों में चोरी हो ही रही है तो यह माना जाए कि मंदिरों की व्यवस्था देखने वाले लोग, मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोग क्या इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे है? यदि गंभीरता से ले रहे हैं तो चोरों पर राजनीति क्यों हो रही है। चोर तो चोर ही होता है। वह चाहे सरकारी मुलाजिम हो या कोई बड़ा धार्मिक परमात्मा हो। यदि शक की सुई चोर के रूप में हो गई तो चोर को चोर ही बोला जाए। या अमुक व्यक्ति प्रमाण सहित यह स्पष्ट कर दे कि उन पर गलत आरोप लगाया जा रहा है। जैसे उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल स्पष्टीकरण दे रहे, खुलकर मीडिया के सामने आ रहे है।

साहब हमने कभी नहीं सुना कि मस्जिद, ईदगाह, गुरुद्वारा, बौद्ध मठों, ईसाईयों के प्रार्थना स्थलों में चोरी हुई हो। यह भी नहीं सुना कि हिंदुओं के धार्मिक स्थलों को छोड़कर अन्य समुदायों के धार्मिक स्थलों पर भगदड़ मची हो। ऐसे कई उदाहरण हैं जो इस चोरी पर उसी समाज के लिए सवाल खड़ा कर रहे है, जिस समाज के लोग मंदिरों को एक विशेष और पवित्र स्थान मानते है। यह सही बात इसलिए है कि सनातन विचार वाले लोग मंदिरों की सभी सुविधाओं में सहयोग बावत बढ़चढ़कर हिस्सा लेते है।

जनाब हम ही हैं जो मंदिरों में वीआईपी दर्शन की बात करते हैं। यह वीआईपी दर्शन सिर्फ हिंदुओं के मंदिरों से जुड़ा मिलता है। मंदिरों में प्रवेश नहीं होने दिया जा रहा है तो यह शिकायत भी हिंदुओं के धार्मिक स्थलों आती है।

अब आप कह रहे होंगे कि यह तो समाज विरोधी बाते बता रहा है। बिल्कुल थोड़ी देर के लिए ऐसा महसूस होता होगा। यहां मै उत्तराखंड के मंदिरों को जोड़ते हुए एक गांव के मंदिर का उदाहरण देता हूं। सीमांत जनपद उत्तरकाशी के भंकोली गांव में महासू देवता का मंदिर है। वैसे भी यमुना टौंस घाटी में किसी न किसी गांव में महासू देवता का मंदिर मिल ही जाएगा। ताज्जुब यह है कि भंकोली गांव के महासू देवता के मंदिर को अनुसूचित जाति के लोग छू तक नहीं सकते। जबकि इसी मंदिर में जब पूजा लगती है तो इसी गांव के अनुसूचित जाति का व्यक्ति ढोल बजाता है। यदि ढोल नहीं बजेगा तो तब तक पूजा संपन्न नहीं होती है।

कहने का मतलब यही है कि यदि इस मंदिर में चोरी हो जाए तो किसने चोरी की यह भी इस कुव्यवस्था से स्पष्ट हो रहा है। जिन्होंने मंदिर को कब्जे में ले रखा है वही चोरी कर रहे होंगे न।

इसी तरह यदि देखा जाए तो मंदिरों की चोरी पर और कुव्यवस्था पर सनातन समाज वर्तमान की स्थितियों से अपमानित भी हो रहा है।

मंदिरों की कहानी लंबी है जनाब। आज मंदिर में हुई चोरी को लेकर हम आपसे चर्चा कर रहे है। इधर कई लोगों का मानना है कि जब नॉन हिंदू मंदिर में नहीं जा सकते तो चोरी भी उन्हीं लोगों ने की है जो मंदिर को जा रहे हैं और देर तक मंदिर में रहते है। कुछ लोग ऐसा भी सवाल उठा रहे है कि जब 14 फरवरी को प्यार का इज़हार करने वाले युवा बजरंग दल से डरे रहते हैं तो ये चोर इस दल से क्यों नहीं डरते? यह भी सोचने वाली बात है। सच यह है कि बजरंग दल और अन्य सामाजिक दल जब मंदिर वाले मामले में हर वक्त संवेदनशील दिखते है तो मंदिर में हुई चोरी पर ये संगठन एक बयान भी नहीं दे पा रहे है। कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय स्तर के अयोध्या मंदिर और बद्रीनाथ मंदिर में हुई चोरी सनातन समुदाय पर कलंक है। अब यदि हम ऐसा समझे कि इन मंदिरों में चोरी कैसे रुके, तो उस पर भी हम सभी को विचार करना चाहिए।

थोड़ी देर के लिए, हम यहां बात करेंगे गुरुद्वारा और बौद्ध मठ पर। यहां कभी भी किसी के लिए न तो पाबंदी है और ना ही इन जगहों पर भीड़ बढ़ती है। लोग जा रहे है, दर्शन कर रहे है। जब चाहे तब दर्शक आते जाते रहते है। कोई भी और किसी भी प्रकार का यहां आने वालो के चेहरे पर तनाव कतई नहीं दिखत है।

अब हम फिर चोरी पर बात करेंगे तो हम अपने आप को लोकतांत्रिक देश में नहीं पाएंगे। चोरों पर राजनीति करनी कितनी सही है कितनी गलत है यह तो समाज देख रहा है, समझ रहा है। मगर राष्ट्रीय स्तर के स्मारक एवं मंदिर यदि चोरो के अड्डे बन रहे हैं तो यह भविष्य के हिंदुस्तान के लिए बड़ा खतरा है। साथ ही यह भी कहा जाएगा कि जो लोग व्यवस्था, प्रबंधन में रह रहे हैं और उन्हीं पर चोरी का आरोप लग रहा है तो यह समझा जाएगा कि ये लोग स्वार्थी है और नकली सनातनी है।

RELATED ARTICLES

25 जुलाई विशेष : 209 दिन की जेल यातना, 84 दिन की भूखहड़ताल

By - RP Vishal अमर बलिदानी श्रीदेव सुमन जिनकी 209 दिन की जेल यातना तथा 84 दिन की भूख हड़ताल के बाद मृत्यु हुई थी...

वृक्षारोपण को सांस्कृतिक अभियान बनाया – कल्याण सिंह रावत “मैती”

वृक्षारोपण को सांस्कृतिक अभियान बनाया - कल्याण सिंह रावत "मैती" By - Prem Pancholi दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के तत्वाधान में आयोजित "मैती" व्याख्यान पर...

डॉ. सुशील उपाध्याय बनेंगे हिंदी संवाद का सेतु

केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा चुने गए देश भर से आठ विद्वान By - Desk देहरादून। चमन लाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षाविद् डॉ. सुशील उपाध्याय...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

25 जुलाई विशेष : 209 दिन की जेल यातना, 84 दिन की भूखहड़ताल

By - RP Vishal अमर बलिदानी श्रीदेव सुमन जिनकी 209 दिन की जेल यातना तथा 84 दिन की भूख हड़ताल के बाद मृत्यु हुई थी...

वृक्षारोपण को सांस्कृतिक अभियान बनाया – कल्याण सिंह रावत “मैती”

वृक्षारोपण को सांस्कृतिक अभियान बनाया - कल्याण सिंह रावत "मैती" By - Prem Pancholi दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के तत्वाधान में आयोजित "मैती" व्याख्यान पर...

डॉ. सुशील उपाध्याय बनेंगे हिंदी संवाद का सेतु

केंद्रीय हिंदी निदेशालय द्वारा चुने गए देश भर से आठ विद्वान By - Desk देहरादून। चमन लाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षाविद् डॉ. सुशील उपाध्याय...

बिना अनुमति एवं निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित लाउडस्पीकरों पर की गई कार्रवाई।

By - Prem Pancholi माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण एवं सार्वजनिक शांति व्यवस्था बनाए रखने के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन...

गुणवत्ता और पारदर्शिता से पूरे हों पंचायतों के विकास कार्य-जोत सिंह बिष्ट

गुणवत्ता और पारदर्शिता से पूरे हों पंचायतों के विकास कार्य-जोत सिंह बिष्ट Harish Thapliyal   ।। ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरडब्ल्यूडी) के उपाध्यक्ष उत्तराखंड सरकार जोत सिंह बिष्ट...

प्रख्यात फोटोग्राफर कमल जोशी पर वृतचित्र : “आवारगी”

प्रख्यात फोटोग्राफर कमल जोशी पर वृतचित्र : "आवारगी" @ Prem Pancholi प्रख्यात फोटो ग्राफर, कवि पत्रकार और यायावर दिवंगत कमल जोशी पर एक विशेष प्रकार की...

वन विदोहन की दास्तान बता रहे है समाज चिंतक विनय केडी

इस बार हरेला से एक दिन पहले जंगल में पेड़ों की पंचायत बैठी थी। अध्यक्षता सबसे बूढ़े देवदार ने की। वह पिछले ढाई सौ...

मंदिर चोरी : सनातन पर सबसे बड़ा कलंक

By - Prem Pancholi   ।। अगर मंदिरों में चोरी हो रही है तो यह बड़ा सवाल ही तो है। इसके अलावा जब हम हिन्दू संस्कृति...

जब लिंगुड़ा देखा, जब याद आया पहाड़।

आए याद पहाड़ By - Diwan mewadi आज लिंगुड़ क्या आए कि इन्होंने बचपन से मन में बसी पहाड़ की यादें ताज़ा कर दीं। थाली में रखे...

यात्रा संस्मरण : रुद्रनाथ यात्रा- सरकार यहाॅं लापता है

रुद्रनाथ यात्रा- सरकार यहाॅं लापता है By - Arun kuksal ....सुबह के 7 बजे हैं और मोलिखर्क में बारिश की रुण-झुण जारी है। परन्तु मेरे लिए...