Sunday, June 28, 2026
Home entertainment प्रसिद्ध उद्घोषिका ममता सिंह विविध भारती के साथ का अनुभव साझा कर...

प्रसिद्ध उद्घोषिका ममता सिंह विविध भारती के साथ का अनुभव साझा कर रही है। पढ़े इस रिपोर्ट को।

“घड़ी की टिक-टिक, पंखे की सरसराहट और बीच में बजता विविध भारती—यही तो था हमारे जीवन का संगीत।”

By – Mamata Singh

विविध भारती रेडियो के रूप में केवल एक यंत्र नहीं था, वह तो मन का साथी था, जो अकेलेपन में हौसला देता, भीड़ में अपनापन जगाता और दूर रहते प्रियजनों की यादों को गीतों के ज़रिए करीब ले आता था। विविध भारती ने कितनी बड़ी तिलिस्मी दुनिया रच दी थी।

1957 में जन्मा विविध भारती सिर्फ़ रेडियो नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की साँसों की लय बन गया।

विविध भारती पर प्रसारित होने वाला पहला गीत एक विशेष “प्रसार गीत” था। इसके बोल पंडित नरेंद्र शर्मा ने लिखे थे, संगीत अनिल विश्वास ने दिया था और इसे मशहूर गायक मन्ना डे ने गाया था। इस गीत के बोल थे: “नाच मयूरा नाच”।
​शुरुआत में इसका प्रसारण केवल दो केंद्रों, बम्बई (अब मुंबई) और मद्रास (अब चेन्नई) से होता था।

भक्ति संगीत, चित्रलोक, जयमाला, छायागीत हवा महल, मनचाहेगीत, गुंजन, एक फनकार, आपकी फरमाइश जैसे कार्यक्रमों के समय से तय होता था घर के कामकाज।
कहीं घर का काम रेडियो के साथ पूरा होता, कहीं फौजी भाइयों को देशवासियों का प्यार पहुँचता, तो कहीं बच्चे कहानी सुनते-सुनते नींद में खो जाते।

छत की दीवारों पर तिरछी हो कर झूलती डालियां आसमान से झरतीं चांदनी से नहा रही होती, हम निखरे सलोने चांद और आसमान में छिटके तारों को निहारते हौले- हौले चहलकदमी कर रहे होते। कानों में छायागीत के गूंजते गाने , गानों से पहले की कॉम्परिंग जैसे एक अलग ही दुनिया में ले जाती।
इस दौरान न किसी और का बोलना सुहाता , न ही पढ़ना। एक प्रेमी की तरह रेडियो साथ होता, जो तिलिस्म पैदा कर रहा होता।

आज भी विविध भारती के स्टूडियो में माइक्रोफोन के सामने कार्यक्रम पेश करने बैठती हूं तो जैसे अतीत हमें पुकार रहा हो।

शुक्रगुजार हूं उन तमाम श्रोताओं की, जो हमें इतना प्यार देते हैं। सिर आंखों पर बिठाते हैं। शुक्रिया विविध भारती का, जिसके स्‍टूडियो में बैठकर तमाम नामचीन फिल्मी हस्तियों से, तमाम साहित्यिक हस्तियों से, संगीत और कला के नामचीन सितारों से साक्षात्कार का मौका मिला। शुक्रिया तकनीक और तकनीकी विभाग की जिसके माध्यम से विविध भारती गूंजती है पूरी दुनिया में।

शुक्रिया उन माइक्रोफोन्‍स का जिनके ज़रिए अनगिनत चुनौती भरे कार्यक्रम कर सके।

RELATED ARTICLES

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

एक्शनएड की पहल : जलवायु परिवर्तन के खतरे और समाधान पर चिंतन

By - Prem Pancholi   सामाजिक एवं पर्यावरणीय मुद्दों पर कार्य करने वाली सामाजिक संस्था एक्शनएड एवं दून विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में "हिमालयी भविष्य की...

जलवायु परिवर्तन चर्चा : प्राकृतिक संसाधनों पर परंपरागत अधिकारों पर सरकारी कब्जा।

By - Prem Pancholi   दून विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित "हिमालयी एक्शन स्कूल" कार्यक्रम के दूसरे दिन प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, सुशासन, रोजगार, पलायन और...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...