हैस्को और आईआईटी (बीएचयू) बनारस के बीच 22 जनवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण सहयोग समझौता (MoU) संपन्न हुआ।
By – Prem Pancholi
इस समझौते के अंतर्गत आईआईटी बनारस अपने परिसर में सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) को केंद्र में रखते हुए एक समर्पित केंद्र की स्थापना करने जा रहा है। इस प्रस्तावित सस्टेनेबिलिटी सेंटर की प्राथमिकताओं, दृष्टि और कार्य-आयामों के निर्धारण हेतु संस्थान ने हैस्को से मार्गदर्शन एवं परामर्श लेने की स्पष्ट इच्छा व्यक्त की है, ताकि अतीत, वर्तमान और भविष्य से जुड़े जटिल पर्यावरणीय एवं सामाजिक मुद्दों पर समग्र दृष्टिकोण के साथ कार्य किया जा सके।
इस केंद्र की गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता और मार्गदर्शन हेतु हैस्को के संस्थापक डॉ. अनिल प्रकाश जोशी से विशेष रूप से सलाहकार (Advisory) के रूप में सहयोग लेने का अनुरोध किया गया है। इसी क्रम में डॉ. जोशी और आईआईटी बनारस के निर्देशक प्रो. अमित पात्रा के बीच एक महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ, जिसकी मध्यस्थता डॉ. विकास दूबे द्वारा की गई। इस संवाद में प्रस्तावित सस्टेनेबिलिटी सेंटर की अवधारणा, कार्यदिशा और संभावनाओं पर गहन चर्चा की गई।
इस समझौते के अंतर्गत सहयोग को तीन प्रमुख दिशाओं में आगे बढ़ाने पर सहमति बनी—
पहला, सस्टेनेबिलिटी से जुड़े ऐसे रूटीन एवं सतत कार्यक्रमों का संचालन, जो शिक्षण, शोध और व्यवहारिक प्रयोगों को आपस में जोड़ सकें।
दूसरा, स्थानीय एवं क्षेत्रीय परिस्थितियों, समस्याओं और आवश्यकताओं के अनुरूप शोध एवं समाधानात्मक पहलें, जिनका सीधा प्रभाव समाज और पर्यावरण पर पड़े।
तीसरा, आईआईटी बनारस और हैस्को के संयुक्त प्रयासों से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नवाचारी प्रयोग और शोध, विशेष रूप से वे प्रयोग जिनका प्रत्यक्ष संबंध प्रकृति, पर्यावरण, वायु, मिट्टी, जल और वनों से है, ताकि वैश्विक स्तर पर नए शोध विमर्श को दिशा दी जा सके।
चर्चा के दौरान यह भी सहमति बनी कि प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक दृष्टिकोण से नए सिरे से गहन अनुसंधान की आवश्यकता है, जिसमें अकादमिक ज्ञान और जमीनी अनुभव का समन्वय हो।
इस अवसर पर प्रो. अमित पात्रा ने पूर्ण गंभीरता के साथ हैस्को की भागीदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि हैस्को के साथ किया गया यह MoU संस्थान की सस्टेनेबिलिटी-आधारित शोध, तकनीकी नवाचार तथा सामाजिक रूप से प्रासंगिक अनुसंधान के प्रति मजबूत संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस सहयोग से अकादमिक जगत और जमीनी अनुभव के बीच एक सशक्त और जीवंत सेतु स्थापित होगा।
यह MoU आईआईटी बनारस और हैस्को के बीच संस्थागत सहयोग, साझा दृष्टि और दीर्घकालिक सतत विकास की सोच का प्रतीक है, जिसे डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के व्यापक पर्यावरणीय एवं ग्रामीण विकास अनुभव के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।







