Saturday, March 7, 2026
Home lifestyle कभी न भरने वाले जख्म दे गई धराली आपदा।

कभी न भरने वाले जख्म दे गई धराली आपदा।

By Pankaj Kushwah

इंसानी याददाश्त बहुत कमजोर होती है, धराली में बाढ़ आई दर्जनों मलबे में दबकर हमेशा के लिए लापता हो गए, दर्जनों होटल, भवन मलबे में दब गए। दर्जनों लोग बेघर हो गए, आजीविका का जरिया खत्म हो गया।

धराली में आई आपदा ने हर्षिल समेत पूरे इलाके में भीषण संकट पैदा कर दिया, सड़के अब तक नहीं खुली है लिहाजा रोजमर्रा की जरूरतों के सामानों की आपूर्ति भी नहीं हो पा रही।

सरकार, प्रशासन, निजी संगठन, सेना, लोग सब अपने स्तर से सब कुछ झोंक कर काम कर रहे हैं लेकिन लगातार खराब मौसम बेहद विपरित परिस्थितियां साथ नहीं दे रही है। लेकिन, धराली में जैसी आपदा आई हर कोई इस बात को स्वीकार कर रहा है कि धराली ने बेतरतीब ढंग से विस्तार लिया, नदी के बाढ़ क्षेत्र को घेर दिया और होटल, ढाबे, दुकानें, बगीचे बनाए। अब नदी ने अपना पुराना बाढ़ क्षेत्र वापस ले लिया। इन दिनों इस मामले पर हर कोई चिंता जता रहा है। सबको लग रहा है कि कुदरत को हल्के में नहीं लेना चाहिए, लेकिन यह पहली बार नहीं है।

2012 और 2013 में जब उत्तरकाशी में भागीरथी नदी और असी गंगा में भीषण बाढ़ आई तो नदी तटों को कब्जा कर बने होटल, भवन ताश के पत्तों की तरह ढह गए और उफनती भागीरथी में समा गए, तब भी लोगों ने कुदरत से पंगा न लेने पर सहमति बनाई। लेकिन, आपदा बीती, लोग भूल गए कि कुदरत को चुनौती नहीं देनी चाहिए। पहाड़ के ज्यादातर कस्बे नदी तटों, बाढ़ क्षेत्र को कब्जा कर तेजी से फैल रहे हैं, पहाड़ों को खोदकर भवन, होटल बनाए जा रहे हैं, दस बीस लाख रूपए की सुरक्षा दीवार बनाकर लोगों को लग रहा है कि उन्होंने नदी को बांध दिया है।

हर छोटे बड़े कस्बों को देखिए, प्रशासन मजबूर है, वह ऐसे निर्माण पर नोटिस जारी करता है, व्यक्ति संबंधित स्थानीय विधायक से प्रशासन पर दबाव डलवाता है या फिर खुद ही इतना प्रभावशाली होता है कि प्रशासन को घुटने टेकने पड़ते हैं।

2003 में उत्तरकाशी में वरूणावत पर्वत से भूस्खलन शुरू हो गया, पूरे शहर की तस्वीर ही बदल गई, कई मकान, होटल मलबे में दब गए। लोग डर गए, डर ऐसे गए कि लगा कि अब वरूणावत की इस घटना से सबक लेंगे। लेकिन, दो दशक के दौरान वरूणावत पर्वत की तलहटी में नियम कायदों को धता बताकर कंक्रीट के जंगल उग आए, जबकि वरूणावत यदा कदा पत्थर मलबे की बारिश करता रहता है। वरूणावत तलहटी को बफर जोन घोषित कर यहां निर्माण को प्रतिबंधित कर दिया गया था लेकिन देखिए वरूणावत त्रासदी के बाद वरूणावत की तलहटी में जहां लोगां को खाली जमीन दिखी वहीं मकान उगा दिए, विशाल मकान, बड़ा निर्माण। प्रशासन ने नोटिस दिए लेकिन नेताओं के दबाव के चक्कर में किसी पर कोई कार्रवाई न हुई। अब निर्माण इतने बड़े और वृहद पैमाने पर हो चुके हैं न तो इन्हें खाली करवाया जा सकता है न ही इन्हें विस्थापित।

ऐसे में अगर कभी वरूणावत फिर रूठा तो…

पहाड़ के हर छोटे बड़े कस्बे को उठा लीजिए, आदमी किसी से नहीं डरता, आपदा आने पर वह सरकार को कोसता है, गाली देता है कि सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए लेकिन वह गदेरे में उतरकर एक सुरक्षा दीवार लगाकर मानने लगता है कि नदी, पर्वत उसका क्या ही बिगाड़ लेंगे…

RELATED ARTICLES

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

होली विशेषांक : खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर।

- खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर। - दून पुस्तकालय में संगीताजंलि की शानदार होली प्रस्तुति दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में आज संगीतांजली शास्त्रीय...

बर्लोगंज एंड बियोंड पुस्तक का लोकार्पण

पुस्तक : बर्लोगंज एंड बियोंड   By - Dr. Yogesh dhasmana   देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो बी के जोशी के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक बर्लोगंज एंड बियोंड...

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में।

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में। By - Neeraj Uttarakhandi पुरोला विकासखंड के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में राष्ट्रीय...

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी।

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी। .......... दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में ‘स्पेक्स’ संस्था के सहयोग...

जनगणना की पूरी तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी जनगणना

जनगणना-2027 की डिजिटल तैयारियां शुरू, देहरादून में 25-27 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू चार्ज अधिकारियों से लेकर सेन्सस क्लर्क तक, सभी ले रहे डिजिटल...

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...