छः भाजपाईयों के सामने एक कांग्रेसी और एक निर्दलीय।
चुनाव के दौरान अलग अलग अनुभव सामने आते है। आज मैं ऐसे स्थान के चुनाव के बारे में बताने जा रहा हूं जहां कभी चुनावी मैदान के लिए राजनतिक दलो को एक दूसरे के प्रतिद्वन्दी ढूंढने पड़ते थे। जी हां। सीमान्त जनपद उत्तरकाशी के बडकोट नगरपालिका परिषद के चुनाव के परिणाम जो भी आये मगर चुनाव से पहले क्या क्या हो रहा है आप मेरे साथ देख सकते है।
कभी यमुना घाटी स्थित बड़कोट नगर पालिका एक मात्र नगर निकाय हुआ करती थी। आज इसी सहित तीन हो गई है। मौजूदा वक्त के चुनाव में बड़कोट नगर पालिका परिषद में आठ प्रत्याशी मैदान में है। हालात इस कदर है कि अधिकांश प्रत्याशी भाजपा से नाराज होकर चुनाव मैदान में कूद पड़े है। जबकि भाजपा से ही बगावत करके एक ऐसा उम्मीदवार डा० कपिलदेव रावत ने निर्दलीय के रूप पर्चा भर दिया था। मगर उनका पर्चा त्रुटिवश निर्वाचन अधिकारी ने रद्द कर दिया, अब उनके समर्थन का जो एक बड़ा समूह है, उन पर भीतरघात करने का आरोप लगाया जा रहा है। इधर कांग्रेस के प्रत्याशी किसी भीतरघात के शिकार नहीं है। बताया जा रहा है कि आठ प्रत्याशियों में से छः भाजपा से टूटकर चुनाव मैदान में उत्तर आए है, एक भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी है। इस तरह यदि देखा जाय तो भाजपा के वोट यहां बंटते नजर आ रहे है। भीतरघात का भी खतरा भाजपा के प्रत्याशी के ऊपर ही मंडरा रहा है। क्योंकि भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी को भाजपा से बगावत करके आए अन्य प्रत्याशी पैराशूट प्रत्याशी का आरोप लगा रहे है।
हालांकि ऐसा बताया जा रहा है कि भाजपा के क्षत्रपों ने बड़कोट में आकर डैमेज कंट्रोल कर दिया है। इधर आम लोगों में कानाफूसी हो रही है कि भाजपा के झगड़े का खतरा अतोल रावत ने भाजपा का प्रत्याशी बनाकर क्यों मोल लिया होगा? कुछ लोगों का कहना है कि भाजपा के झगड़े का फायदा कांग्रेस को नहीं बल्कि किसी तीसरे को होने वाला है। यह भी चर्चा है कि निर्दलीय प्रत्याशी विनोद डोभाल उर्फ कुतरू ने अपने जोड़ तोड़ की राजनीति आरंभ कर दी है। विनोद डोभाल कोई ख़ांटी राजनीतिक कार्यकर्ता तो नहीं, पर वे क्षेत्र में एक सामाजिक कार्यकर्ता की हैसीयत रखते है। श्री डोभाल ने राजनीतिक दलों से छिटके हुए कार्यकर्ताओं, जो दल इस बार यहां चुनाव में नहीं है उन्हें साधना सहित युवाओं को अपने पक्ष में करने के कई कार्यक्रम आरंभ कर दिए है। इस तरह बड़कोट नगर पालिका परिषद में पहली बार जोड़तोड़ की राजनीति सामने आ रही है। अन्य निर्दलीय प्रत्याशी भी किसी से कम नहीं है वे सभी अपने अपने कुनबों के बलबूते नगर पालिका परिषद को एक नया रूप देने की वकालत कर रहे है। कुलमिलाकर 10 हजार 800 मतदाताओं वाली नगर पालिका परिषद बड़कोट के अध्यक्ष के चुनाव में जीत का कोई बड़ा आंकड़ा सामने नहीं रहेगा। माना कि प्रत्येक प्रत्याशी को व्यक्तिगत छबि के कारण यदि पांच पांच सौ मतदान मिल जाए तो इस तरह 4 हजार मतदान आठ प्रत्याशियों की झोली में चला जाएगा। शेष मतदान यानी लगभग 2 हजार या 2500 जो होगा उसमें ही जीत हार की गणित बताई जा सकती है।
उल्लेखनीय हो कि भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अतोल रावत कई सालों तक कांग्रेस के खेवनहार रहे है। वे छात्रसंघ अध्यक्ष रहे है और पूर्व में नगर पालिका परिषद बड़कोट के चेयरमैन भी रहे है। यही नहीं उन्होंने लंबे समय तक मुख्यधारा की पत्रकारिता की है। अर्थात कह सकते है कि अतोल रावत मंझे हुए राजनीतिक खिलाड़ी है। अलावा इसके उनके पास मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के कई कारण भी है।







