Friday, March 6, 2026
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इतिहास के पन्नों से : पौड़ी रामलीला के शताब्दी के महानायक दल्लू बाबू।

पौड़ी रामलीला के शताब्दी के महानायक दल्लू बाबू।

By Dr. Yogesh dhasmana

पौड़ी रामलीला की विधिवत शुरुआत 1906 में हुई थी। इससे पहले 1897 से 1905, तक इसका स्वरूप नौटंकी शैली में रहा था। अल्मोड़ा में भी 1860 पहली बार डिपुटी कलेक्टर देवीदत्त जोशी ने मुरादाबाद की राम और कृष्ण लीला की लोक कलाकार मंडली को बुलाकर बद्रीश्वर मंदिर के प्रांगण में पहली बार इसका आयोजन किया था।


पौड़ी में भोला दत्त काला जो पेशे से डाक्टर थे, ने तारा दत्त गैरोला, डॉ आलम सिंह के सुपुत्र नरेंद्रसिंह रावत 1905, से 1912 तक रामलीला कमेटी के अध्यक्ष रहे जो कि पौड़ी डी एम कार्यालय में ओ सी के पद पर भी कार्यरत थे।

इस तरह 1920 से 1930 के बीच जिला बोर्ड के प्रथम सचिव सुरेंद्र सिंह बर्तवाल, नरेंद्र सिंह भंडारी, वकील कोतवाल सिंह नेगी ने इस रामलीला को पहली बार 07 दिवसीय कर शास्त्रीय धुनों और लोक प्रचलित रागों पर सजा कर इसे गढ़वाल में लोकप्रिय बनाया। इसके बाद श्रीनगर ओर दुगड़ा में रामलीलाओं का आयोजन प्रारंभ हुआ।

आजादी के बाद मथुरा प्रसाद डोभाल ने देश प्रेम से प्रभावित हो कर के गीत, खुशी मनाओ नगर वासियों, पुण्य भूमि में रामराज्य आया, ने रामलीला में एक गजब का आकर्षण पैदा कर दिया था।

इसके बाद तब से लेकर अब तक के 75 वर्षों के इतिहास में मेहताब सिंह रावत, उर्फ दल्लू बाबू जी ने अभिनय व्यवस्था प्रोमम्टिंग ओर अब 91 वर्ष की उम्र में रामलीला कमेटी के संरक्षक्षक के रूप में जिस तरह से जिम्मेदारी का निर्वहन किया है, उसकी मिशाल कम ही अन्यत्र देखने को मिलती है।

पौड़ी रामलीला में संगीत पक्ष में अजीत सिंह नेगी, सुखदेव सिंह रावत, मट्टू जमादार, भूपेंद्र सिंह नेगी, बच्चू मिस्त्री, व्यवस्था और आकाशवाणी करने वाले पात्र मेहताब सिंहजी बुकसेलर की अहम भूमिका होती थी।

कलाकारों का मेकअप करने वालो में महबूब अहमद उर्फ मुद्दि भाई यादव चंद्र गुप्ता, महिला पात्रों में पूर्णचंद्र थपलियाल, दिगम्बर चंदोला, रावण के पात्रों में दयासागर धस्माना, जगदंबा पंत, पीतांबर सेमवाल, गोविंद नैथानी तथा अब जगत किशोर, संगीत निर्देशन में गौरीशंकर थपलियाल, दिनेश रावत, टिन्नु, मनोज रावत अंजुल, पदमेंद्र नेगी, कुशलता से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

पौड़ी की रामलीला में ही नहीं वरन उत्तराखंड के विभिन्न शहरों में मुस्लिम ओर ईसाई समुदाय के लोग अपनी भागीदारी निभाते रहे हैं। पौड़ी में मुहम्मद सलार थैलीसैण से अभिनय करने पहुंचते थे। रावण दरबार में राक्षकों की टीम का नेतृत्व जब्बार हुसैन सुषेण वैद्य के रूप में, ज्ञान विक्टर, सारंगी वादक हुसैनी बोड़ा, राम विवाह पर आतिशबाजी करने वाले इकराम अली और अब नई पीढ़ी में मुस्लिम युवक साहिल भी इस आयोजन में व्यवस्था से लेकर केवट का अभिनय तक बखूबी से कर रहे हैं। कमेटी के अध्यक्ष उमाचरण बड़थ्वाल आयोजन कमेटी के सूत्रधार बने हुए हैं।

रामलीला के सेट्स निर्माण एवं ग्रीन रूम को संभाल रहे प्रदीप रावत, आशीष नेगी भी पूरी मेहनत से रामकथा मंचन को सफल बनाने में लगे है।

अतः इस लोक मंच को अपनी उपस्थिति से जीवंत बनाते हुए मेहताब सिंह जी ओर उनकी अन्य दो पीढ़ियां स्वर्गीय दिनेश्वरी राणा की छोटी बहने, पुत्र आज दिन तक भक्तिभाव से इस यज्ञ में अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं।


पौड़ी के नागरिक और रामलीला कमेटी को उनके शतायु आरोग्यपूर्ण जीवन की कामना करते हैं।

@लेखक साहित्यकार है।

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