जब हम सामाजिक, राजनीतिक, साहित्यिक और वैचारिक स्तर पर युवाओं को देखते हैं तो एक नाम अनायास हमारे सामने आ जाता है, जो संचित विचारों को बहुत जनपक्षीय तरीके से रखकर उन पर संघर्ष भी करता है। जब हम अलकनंदा के किनारे चलते हैं तो उसकी लहरों में कई ध्वनियां सुनाई देती हैं। वह कुछ संदेश भी देती हैं और संघर्ष से आगे बढ़ने की ताकत भी। साथ में बेगमती पिंडर हो तो जिजीविषा और तनकर सामने खड़ी हो जाती है। इस पूरे क्षेत्र से गुजरते हुए इंद्रेश मैखुरी सामने खड़े हो जाते हैं। या कहिये अड़ जाते हैं। एक प्रतिबद्ध योद्धा मानता हूं मैं उन्हें। एक दृढ़ संकल्पी और विचारों के प्रति घोर आग्रही होते हुए उन्होेंने जनता के साथ खड़े होकर लोगों को लड़ना सिखाया है।
इंद्रेश ने बहुत छोटी उम्र में जनआंदोलनों में हिस्सेदारी करना शुरू कर दिया था। जब उत्तराखंउ राज्य आंदोलन अपने चरम पर था तब वह उत्तरकाशी में बारहवीं कक्षा में पढ़ते हुए आंदोलन में शामिल हुए। आंदोलन मे उनका यह पहला कदम लगातार आगे ही बढ़ता गया। उन्होंने अब तक इतने पड़ाव पार कर लिए हैं कि उनकी गिनती ही नहीं है। जनअंादोलनों ने उन्हें एक व्यापक समझ का रास्ता दिखाया। उस समय उत्तरकाशी में वामपंथी राजनीति बहुत प्रभावी थी। यहां गोविंद सिंह नेगी और कमलाराम नौटियाल जैसे प्रतिबद्ध नेताओं ने एक वैचारिक राजनीतिक धारा की नींव रखी थी। इंद्रेश पर भी इनका प्रभाव रहा। बहुत जल्दी वह वामपंथी धारा से जुड़ गए।
जब वह गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर में पढ़ने आए तो उनकी छात्र राजनीति में सक्रियता बढ़ी। उन्होंने यहां सीपीआई (एमएल) के छात्र संगठन ‘आइसा’ में अपन सक्रियता बढ़ाई। वह गढ़वाल विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष रहे। उन्होंने बहुत कम उम्र में उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपना स्थान बनाया। वे देश के वैचारिक और संर्घषशील छात्र संगठन ‘आइसा’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। देश, पहाड़ और दुनिया के बारे में उनकी जानकारी और समझ अदभुत है। संघर्ष के साथ तो उनका चोली-दामन का संबंध है। कई बार लोग सवाल करते हैं कि पहाड़ की राजनीति में नेतृत्व नहीं उभरा। हम लुटेरों में तो नेतृत्व देख लेते हैं, लेकिन इंद्रेश जो रोज हमारी लड़ाई लड़ रहे हैं उनमें क्यों नेतृत्व नहीं देखते। वह उत्तराखंउ के हर सवाल पर स्पष्टता से अपनी राय रखते हैं। हर संघर्ष में शामिल रहते हैं। राज्य बनने से पहले और बाद में जितने भी आंदोलन रहे, लगभग सभी में उनकी भागीदारी रही है। वे देश-दुनिया की राजनीति पर भी अपना प्रभावी दखल रखते हैं। इंद्रेश इस समय सीपीआई (एमएल) के प्रदेश महासचिव हैं।
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हम सबके प्रिय भाई इंद्रेश मैखुरी को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। शुभकामनाएं।
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