Friday, March 6, 2026
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आखिर हंसुलियों और दाथियों की बात कब सुनी जाएगी?

आखिर हंसुलियों और दाथियों की बात कब सुनी जाएगी?

 

By – Gunanand Jakhmola

– अंकिता को मार दिया, ज्योति को जेल में डाल दिया, नेता बाहर कैसे?
– दरांती लहराई तो ज्योति अंदर तो पिस्तौल लहराने वाला विधायक उमेश बाहर क्यों?

हल्द्वानी की सोशल एन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी को दरांती दिखाने और लोक-देवताओं पर टिप्पणी करने के आरोप में जेल में डाल दिया गया। मैं दो दिन पहले तक ज्योति के बारे में नहीं जानता था। पहाड़ों में जाता हूं तो देखता हूं कि अब पहाड़ों में गूलदार, गूणी-बांदर और ब्लागर ही बच गये हैं। ऐसे में ज्योति की ओर कभी ध्यान नहीं गया। मै ज्योति पर कुछ भी नहीं लिखना चाहता था, पर आज सुबह लिखने के लिए मजबूर हो गया। मैंने आज सुबह विधायक उमेश कुमार की एक पोस्ट देखी जिसमें कहा गया है कि ज्योति तो जेल गयी लेकिन अल्मोड़ा की वह लड़की बाहर क्यों है जो मनुवादियों और ब्राह्मणवादियों की सोचवालों को बलात्कारी बता रही है। अल्मोड़ा की लड़की पर अलग से लिखूंगा। अभी बात ज्योति की।

मैंने अभी ज्योति अधिकारी का वह विवादित वीडियो देखा। ज्यादा बोलती है, बहुत बोलती है, रौ में बोलती है, उसके कहने का तरीका गलत था लेकिन उसने बात तो ठीक ही कही। दरांती हथियार नहीं है, यह पहाड़ की महिलाओं का आत्मसम्मान है, उनकी पहचान है। इसी हंसुली और दाथियों की बात हमने राज्य आंदोलन के समय की थी। ज्योति पर हथियार लहराने का केस भी बना दिया। क्यों?

अंकिता भंडारी हत्याकांड न पहला है और न आखिरी। उत्तराखंड में हर साल 300 से भी अधिक रिपोर्टिड रेप केस होते हैं। जो थाने तक नहीं पहुंचते उनकी बात ही अलग है। अंकिता के बहाने हम पहाड़ की अस्मिता की लड़ाई लड़ रहे हैं। पहाड़ की बेटियों की सुरक्षा की बात कर रहे हैं। जबकि सच यह भी है कि हर साल गढ़वाल और कुमाऊं से 100-200 लड़कियां रहस्यमय तरीके से गायब हो रही हैं। यानी मानव तस्करी की शिकार हो रही हैं। अधिकांश केस में पुलिस यह मानकर चलती है कि लड़की अपने प्रेमी के साथ भाग गयी। परिजन भी यही मान कर लोकलाज में चुप्पी साध लेते हैं। क्या पता लड़की किसी गैंग का शिकार हो गयी हो? उस पर क्या बीत रही हो? पुलिस ने कितनी लड़कियों को आज तक रेस्क्यू किया है?

ज्योति ने दरांती दिखाने की हिम्मत तो की है। यदि कानून से न्याय नहीं मिलेगा तो आवाज उठेगी ही। यह क्षोभ और आक्रोश होता है। ज्योति ने वो ही जोश दिखाया। रही देवी-देवताओं के कौथीग में नाचने की बात। ज्योति का बोलने का तरीका भले ही गलत रहा हो लेकिन उसने बात तो सही कही। पश्वा के लिए कुछ नियम कायदे होते हैं। जागर गान होता है। ढौंर-थाली होती है। ढोल-दमाऊं होता है। शिव-पार्वती के गीत होते हैं। डीजे में कौन सा देवता नाचता है भला? सैंडिल, जूते पहन कर और बिना मंडाण के देवी-देवताओं के पश्वा कैसे नाचते हैं? हम अपनी जड़े, संस्कृति और परम्पराएं खो रहे हैं और हम ज्योति को दोषी माने तो यह सरासर गलत होगा।

दरांती लहराने पर ज्योति को जेल और उमेश विधायक है इसलिए बाहर? यह कौन सा कानून है? यह कैसा न्याय है। महेंद्र भट्ट जातिवादी बात करें तो राष्ट्रवाद और अल्मोड़ा की वो लड़की जो मनुवाद और ब्राह्मणवाद की बात करें तो अपराध। हद है, कैसे लोग हो गये हैं हम?

हम देश भर में सबसे अधिक शिक्षित लोगों में शुमार हैं। यह राज्य मातृशक्ति की बदौलत बना है और इसी राज्य में महिला नीति नहीं है। पहाड़ की महिलाओं के पहाड़ से दर्द का कोई इलाज नहीं है। यूसीसी बना लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए। अंकिता हत्याकांड पर यूसीसी और महिला आयोग की खामोशी बताती है कि सब कुछ मैनेज है। यदि मैनेज है तो ज्योति जैसे विरोध के स्वर तेज होंगे। कानून समान होना चाहिए सबके लिए। ज्योति के लिए भी तो उमेश कुमार के लिए भी। ज्योति के साथ ज्याददी हुई है।

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