पचास-पचपन साल पहले लिखा गया उपन्यास क्या आप दोबारा पढ़ेंगे?
पचास-पचपन साल पहले लिखा गया उपन्यास क्या आप दोबारा पढ़ेंगे? यदि पढ़ेंगे तो क्या इक्कीसवीं सदी का एक चौथाई समय बीत जाने के बाद उस उपन्यास की परिस्थितियाँ-देशकाल-चरित्रों से खुद का तारतम्य बिठा पाएँगे? क्या वह उपन्यास आपको अन्त तक जोड़कर रख पाएगा? क्या आप उसे पढ़कर किसी और पाठक को पढ़ने के लिए कहेंगे?
एक और अंश पढ़िएगा। भाषा की रवानगी के दर्शन कीजएगा-
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