रंगमंच से जीवंत हुई कल्पनाएँ: दून पुस्तकालय में बच्चों की नाट्य कार्यशाला ।
दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र द्वारा पुस्तकालय के एम्फीथिएटर में बच्चों के लिए दो घंटे की एक रचनात्मक नाट्य कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का संचालन उभरते हुए रंगमंच प्रतिभा वैभव तिवारी ने किया, जो मराठी नाटककारों के नाटकों के निर्देशन के लिए जाने जाते हैं। वैभव तिवारी अपने निर्देशन में शारीरिक गतियों और भाव-भंगिमाओं के प्रभावी प्रयोग के लिए प्रसिद्ध हैं। वे थिएटर इन एजुकेशन तकनीकों के माध्यम से बच्चों को शरीर को मुक्त करने और अभिव्यक्ति को जीवंत बनाने का अवसर प्रदान करते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार रंगमंच बच्चों में आलोचनात्मक चिंतन और रचनात्मक अभिव्यक्ति के विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसी विचारधारा के अनुरूप दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र का मानना है कि बच्चों को रंगमंच और पुस्तकों के पात्रों से परिचित कराना आवश्यक है, जिससे पुस्तकें उनके लिए जीवंत बन सकें और वे स्वयं कहानियाँ रचने की क्षमता विकसित कर सकें। इस दिशा में वैभव तिवारी एक कुशल शिक्षक एवं संवेदनशील मार्गदर्शक के रूप में बच्चों के साथ सार्थक संवाद स्थापित करते हैं।
कार्यशाला के दौरान बच्चों ने स्वर-प्रक्षेपण, शारीरिक गतियों तथा अभिनय की मूलभूत तकनीकों का अभ्यास किया। इस कार्यक्रम में आसरा ट्रस्ट, कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी, सेंट जोसेफ्स अकादमी, श्री गुरु राम राय सहित विभिन्न संस्थानों से लगभग 30 बच्चों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में दून पुस्तकालय की बाल अनुभाग प्रभारी सुश्री मेघा ऐन विल्सन, लाइब्रेरियन डी.के. पांडेय, रंगमंच कलाकार सुश्री अंशिका, तथा शिक्षक, लेखक, अभिनेता एवं अन्य समुदाय सदस्य उपस्थित रहे।







