Saturday, September 12, 2026
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क्वानू हादसा : सबसे घातक होता है इंसानियत का मर जाना। पढ़े वरिष्ठ पत्रकार नीरज उत्तराखंडी की यह रिपोर्ट।

By – Neeraj Uttarakhandi

“कवाणू सड़क हादसा शोक संग दे गया सीख और सबक।आपदा में अवसर तलाशने वालों ने नहीं छोड़ी कसर। समाज और राष्ट्र के लिए घातक होता है इंसानियत का मर जाना। प्रसिद्धि पाने की हवस में पार कर दी मानवता की सीमा”।

 

हाल ही में जनपद देहरादून के कवाणू में हिमाचल पथ परिवहन निगम के दर्दनाक बस हादसे ने जहां तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं, वहीं घटना स्थल पर इन्सानियत को शर्मसार करने वाला मंजर भी देखने को मिला। एक ओर चीख-पुकार मची थी, तो दूसरी ओर हादसे में घायल एक यात्री के नोटों से भरे बैग पर कब्जा जमाने के लिए कुछ लोग आपस में भिड़ गए। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी से लाखों की यह राशि उसके असली मालिक तक सुरक्षित पहुंच गई।
बताते चलें कि हादसे के बाद राहत कार्य के दौरान बस में नोटों से भरा एक बैग मिला। खबर फैलते ही मौके पर मौजूद कुछ लोगों में उसे हथियाने की होड़ मच गई। कोई उसे अपने मौसा का बताने लगा तो कोई किसी अन्य रिश्तेदार का हवाला देकर दावा ठोकने लगा। पुलिस द्वारा की गई जांच में पता चला कि यह बैग जिला शिमला के नेरूवा में इलेक्ट्रॉनिक्स और क्रॉकरी की दुकान चलाने वाले अन्दुल क्यूम का था। गणना करने पर बैग में कुल 3,20,500 (500 के 635 नोट, 200 के 9 और 100 के नोट) रूपए पाए गए। बैग में अब्दुल का पैन कार्ड और फोटो आईडी कार्ड भी मिला।
कालसी पुलिस के थाना प्रभारी दीपक धारीवाल ने बताया कि घायल अब्दुल क्यूम ने अस्पताल से फोन पर कर अपने बैग की जानकारी दी थी। एसडीएम चकराता और नायब तहसीलदार की मौजूदगी में पूरी छानबीन के बाद बैंग घायल अब्दुल कय्यूम की बेटी को सौंप दिया है।

– क्षणिक प्रसिद्धि पाने की हसरत में मानवता की पार कर दी हदें।

वहीं दूसरी ओर भीषण बस हादसा जहां एक तरफ मातम लेकर आपा, वहीं डिजिटल दुनिया के कुछ चेहरों ने इस दुखद घड़ी में मानवता को भी शर्मसार कर दिया। क्षणीक प्रसिद्धि पाने के लालच, लाइक, शेयर और व्यूज बढ़ाने की होड़ में कुछ तथाकथित इन्फ्लुएंसर्स और सोशल मीडिया पेजों ने संवेदनशीलता की सारी हदें पार कर दीं। हादसे के बाद जब पूरा प्रशासन और स्थानीय लोग राहत कार्य में जुटे थे, तब सोशल मीडिया पर एक सनसनीखेज अफवाह जंगल की आग की तरह फैल गई। कुछ लोगों ने बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे बस चालक को मृत घोषित कर दिया। बिना किसी आधिकारिक पुष्टि या डॉक्टरी रिपोर्ट के फैलाई गई इस झूठी खबर में घायल के परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया। क्या इसकी भरपाई हो पाएगी। कभी नहीं।
बुद्धिजीवी वर्ग का कहना है कि किसी भी खबर को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच हिमाचल प्रदेश पुलिस की आधिकारिक सूचनाओं या सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के माध्यम से जरूर की जानी चाहिए।

– निर्माण कार्यों में हुई मानकों की अनदेखी
– कमजोर दीवार ने बुझाए तीन घरों के चिराग
– सरकार, प्रशासन और विभाग की लापरवाही आई सामने

हिमाचल और उत्तराखंड की सीमाओं को जोड़ने वाली लाइफलाइन कही जाने वाली मीनस कोटी विकासनगर सड़क एक बार फिर मौत के मंजर में तबदील होने के लिए सुर्खियों में आ चुकी है, यहां सड़क किनारे हुए हादसे के बाद आत्मा की शांति के लिए किए गए हवन पूजन के बाद सड़क किनारे बनें स्मृति चिन्ह किसी न किसी हादसे के निशान की गवाही दे रहे हैं।

हाल ही में चौपाल से वाया विकासनगर जा रही बस का खाई में गिरना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि सिस्टम की उस अंधी लापरवाही का नतीजा है, जिसने तीन और हंसते-खेलते परिवारों को उम्र भर का मातम दे दिया।
पिछले तीन सालों का ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो यह मार्ग लाइफ लाइन कम और मौत का मार्ग अधिक साबित हुआ है। इस मार्ग पर करीब 18 सड़क हादसों में 24 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके है, जिसमें कई घर उजड़ गए। टूटी हड्डियों के साथ सिस्टम को कोस रहे है।
स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गाड़ी को पास देते समय यह हादसा हुआ बताया जा रहा है। जिससे लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते है। सड़क को सहारा देने वाली दीवारें पत्थरों के नहीं, बल्कि कथित भ्रष्टाचार की कच्ची मिट्टी पर टिके है। कमजोर दीवालें भारी वाहनों का दबाव सहने के बजाय ताश के पत्तों की तरह ढह रही है। बस एक अन्य वाहन को पास देते वक्त दीवार धंसने से नाले में जा गिरी।स्टील के क्रैश बैरियर नाममात्र के है।
हैरानी इस बात की है कि विभाग की नींद तभी टूटती है, जब कोई हादसा होता है। बता दें कि उत्तराखंड के दर्जनों गांवों सहित हिमाचल प्रदेश के नेरवा, चौपाल, हरिपुरधार और शिलाई के लोगों के लिए यह मार्ग देहरादून पहुंचने का सबसे रास्ता है। छात्र पढ़ाई के लिए, मरीज इलाज के लिए और व्यापारी व्यापार के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है।

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