Thursday, May 14, 2026
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रोबो जर्नलिस्ट के हाथ में होगा भविष्य का मीडिया

रोबो जर्नलिस्ट के हाथ में होगा भविष्य का मीडिया 

By – Desk

दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र की ओर से . आयोजित ‘न्यू मीडिया के विविध आयाम’ पुस्तक के लोकार्पण समारोह में मीडिया विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य के मीडिया को रोबो जर्नलिस्ट संभालेंगे। उन्होंने नई मीडिया तकनीकों और सूचना संकलन के परम्परागत तौर-तरीकों में संतुलन बनाने पर जोर दिया।
दून पुस्तकालय के तत्वावधान में आयोजित समारोह में अतिथियों द्वारा ‘न्यू मीडिया के विविध आयाम’ पुस्तक का विमोचन किया गया। समारोह की अध्यक्षता कर रहे उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं लेखक अनिल रतूड़ी ने कहा कि मीडिया अनंत संभावनाओं के द्वार खोलता है, लेकिन इसके साथ अनेक चुनौतियाँ भी आती हैं। उन्होंने कहा कि गैजेट आधारित पत्रकारिता ने जहाँ अभिव्यक्ति के अवसरों का विस्तार किया है, वहीं नई तकनीक ने सूचना की गुणवत्ता और उसके प्रभाव को भी प्रभावित किया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि तकनीक और पत्रकारों के व्यावहारिक प्रयासों के बीच संतुलन अत्यंत आवश्यक है।

इस अवसर पर वरिष्ठ टीवी पत्रकार अनुपम त्रिवेदी ने कहा कि मीडिया क्षेत्र में चुनौतियाँ बढ़ने के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म ने नई संभावनाएँ भी उत्पन्न की हैं। अब पत्रकार के लिए किसी एक संस्थान से जुड़ना अनिवार्य नहीं रहा, बल्कि वह अपने व्यक्तिगत डिजिटल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी सूचनाओं का प्रसार कर सकता है। उन्होंने गुणवत्ता के प्रश्न को रेखांकित करते हुए कहा कि भविष्य में यह संभव है कि टीवी समाचार प्रस्तुति से लेकर विश्लेषण और डिजाइनिंग तक के कार्य ‘रोबो पत्रकार’ संभालें।

दूरदर्शन के कार्यक्रम प्रमुख डॉ. अनिल भारती ने आकाशवाणी और दूरदर्शन के संदर्भ में नई मीडिया तकनीकों के प्रयोग तथा सोशल मीडिया की बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भविष्य का मीडिया आज के मीडिया से कई मायनों में भिन्न होगा—तकनीक और गैजेट्स की भूमिका बढ़ेगी, जबकि मानव हस्तक्षेप कई स्तरों पर सीमित हो सकता है। ऐसे में सूचनाओं का प्रभाव तो व्यापक होगा, लेकिन उनकी सत्यता और प्रमाणिकता एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आएगी।

विशेषज्ञ टिप्पणी में डॉ. ताहा सिद्दीकी ने मीडिया के अकादमिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मीडिया प्रशिक्षण संस्थानों और मीडिया हाउसों के बीच अधिक निकटता आवश्यक है, अन्यथा अकादमिक जगत और व्यावहारिक मीडिया क्षेत्र के बीच दूरी बनी रहेगी। वरिष्ठ पत्रकार संजीव कंडवाल ने पिछले दो दशकों में मीडिया जगत में आए परिवर्तनों पर चर्चा करते हुए कहा कि कोरोना काल के बाद सूचनाओं के प्रवाह में तेजी आई है, किंतु उनकी गुणवत्ता प्रभावित हुई है। अब सूचनाएँ प्रायः अफवाहों के रूप में भी सामने आती हैं, जिनके स्रोतों की पुष्टि करना कठिन होता जा रहा है।

चर्चा सत्र का संचालन कर रहे शिक्षाविद् एवं लेखक डॉ. सुशील उपाध्याय ने न्यूज इंडस्ट्री में एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के बढ़ते प्रभाव और उससे उत्पन्न चुनौतियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि एआई के बढ़ते दखल को रोकने के बजाय उसके साथ संतुलन स्थापित करना अधिक आवश्यक है। पुस्तक के सह-संपादक प्रो. योगेश कुमार योगी ने कहा कि गैजेट आधारित पत्रकारिता ने मीडिया के कई पारंपरिक स्तरों और अवरोधों को समाप्त कर दिया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म सभी के लिए खुले हैं, किंतु इनका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण आवश्यक है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. भारती मिश्रा ने किया, जबकि स्वागत और आभार ज्ञापन दून पुस्तकालय के कार्यक्रम अधिकारी चंद्रशेखर तिवारी ने दिया। इस अवसर पर राधा रतूड़ी, मुख्य सूचना आयुक्त, पूर्व कुलपति डॉ. सुधा रानी पांडे, उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान से सम्मानित कथाकार श्री जितेन ठाकुर, उच्च शिक्षा की पूर्व निदेशक डॉ. सविता मोहन, साहित्य गौरव सम्मान प्राप्त डॉ. सुधा जुगराण, शीशपाल गुसाईं, प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री अजय राणा, डॉ. संजय मोहन, विभूति भूषण भट्ट, अरविन्द शेखर, जितेन्द्र अथंवाल, सोमवारी लाल उनियाल, प्रेम पंचोली, रजनीश त्रिवेदी, जगमोहन मेंहदी रत्ता, भारत रावत, डॉ. डी.के. पाण्डे, शिव मोहन सिंह, प्रवीण भट्ट, डॉ. लालता प्रसाद, सुंदर सिंह बिष्ट, सहित अनेक विद्वान एवं मीडिया कर्मी .

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