Friday, March 6, 2026
Home पौड़ी गढ़वाल सरकारो की उदासीनता के चलते पौड़ी कमिश्नरी के दिन डूबने की कगार...

सरकारो की उदासीनता के चलते पौड़ी कमिश्नरी के दिन डूबने की कगार पर।

सरकारो की उदासीनता के चलते पौड़ी कमिश्नरी के दिन डूबने की कगार पर

Pauri
Paudi

अंग्रेजों के जमाने में भी पौड़ी का अपना गौरवमयी इतिहास रहा है। आजादी के बाद भी उत्तरप्रदेश के रहते पौड़ी को कमिश्नरी बनाया गया है। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद ऐसा लग रहा था कि पौड़ी के प्राकृतिक सौंदर्य का विकास होगा, पर्यटन का नया डेस्टिनेशन बनेगा। कमिश्नरी मुख्यालय है तो राज्य बनने के बाद पौड़ी के दिन बहुरेंगे। पर राज्य बनने के बाद हुआ इसका उलटा।

ज्ञात हो कि उत्तराखंड सरकार द्वारा राष्ट्रीय खेलो के आयोजन में पौड़ी की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। यहां तक कि सांसद और विधायक भी चुप्पी साधे हुए है। परिणाम स्वरूप जनप्रतिनिधि भी अपनी अपनी पार्टी के गुलाम हो चुके है।

अब हालत इस कदर है कि कोई भी जनप्रतिनिधि जनपक्षीय मुद्दों पर पार्टी लाइन से हट कर बोलने का  साहस ही नहीं जुटा पाते है। पौड़ी की अंकिता भंडारी हत्याकांड इसका ज्वलंत उदाहरण है।

गौरतलब हो कि पौड़ी के रासी स्टेडियम पर हाल के वर्षों में 50 करोड़ खर्च करने के बाद भी आगामी राष्ट्रीय खेलो के आयोजन में कोई खेल प्रतियोगिता पौड़ी में नहीं हो रही है। यही नहीं पौड़ी में आयोजन न होने पर बीजेपी के पौड़ी का प्रतिनिधत्व करने वाले नेताओं की उदासीनता के चलते पौड़ी की घोर उपेक्षा पर मीडिया भी चुप है। फलस्वरूप इसके पौड़ी के पुराने टेनिस मैदान को हैरिटेज के रूप में विकसित करने की संभावनाएं भी परवान नहीं चढ़ सकी।

पौड़ी निवासी प्रो गणेश पोखरियाल और पूर्व पुलिस उप अधीक्षक गिरीश बिजलवान, इतिहासकार डॉ० योगेश धस्माना का कहना है कि विंटर लाइन या फिर पौड़ी   शरदोत्सव जैसे आयोजनों से पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पार्किंग पानी और राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार प्रसार के  के लिए आवश्यक कार्ययोजना भी बनाई जानी चाहिए। नगर में बढ़ता अतिक्रमण  इसकी सुंदरता पर दाग लगा रही है। बदहाल सड़के  सड़कों पर बहता सीवर का पानी  दुर्गंध फैला रहा है। आज तक नगर में सीवर लाइन का न बन पाना दुर्भाग्य पूर्ण है।आखिर पौड़ी में पर्यटकों को लाने के लिए आकर्षित कैसे करेंगे। पौड़ी की पुरानी जेल  पर लोक कला संग्रहालय की योजना परवान नहीं चढ़ सकी है। पौड़ी कमिश्नरी को जीवंत बनाने के सरकारी प्रयास नाकाफी साबित हुवे है। जब नेता ही पौड़ी से पलायन कर गए है, तब अधिकारियों और कार्यालयों को कैसे पौड़ी लाया जा सकता है। पौड़ी का पलायन आयोग का दफ्तर पुनः देहरादून चला गया है,अब तो इसका दफ्तर महज सफेद हाथी बन कर रह गया है।

उल्लेखनीय हो कि राज्य बनने के बाद डीएम, कमिश्नर के अधिकारों पर अंकुश लगा कर कमजोर कर दिया गया है, इसके चलते पौड़ी की जनता ने भी देहरादून की ओर रुख किया है। कारण इसके देहरादून में दबाव और सचिवालय शासन पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। स्वास्थ्य सेवाएं  बदहाल होने से भी पौड़ी से पलायन की रफ्तार बढ़ ही रही है। घोस्ट गांवों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि ने भी सरकार के विकास के दियो की पोल खोल दी है।

तत्कालीन उत्तरप्रदेश के समय में पौड़ी का जो गौरव था, राज्य बनने के बाद वह धूमिल हो गया है। यदि हालात यही रहेंगे तो एक दिन देहरादून केंद्रित विकेंद्रित व्यवस्था से जिलों ओर दोनों कमिश्नरी का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।

RELATED ARTICLES

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...

हाईकमान की घुड़की का दिखा असर, निर्णायक चुनाव से पहले कांग्रेस ने दिखाया जोश।

- हाईकमान की घुड़की का दिखा असर निर्णायक चुनाव से पहले कांग्रेस ने दिखाया जोश। - दिन भर के फेक नैरेटिव पर जोश जूनून दिखा...

इतिहास के पन्ने : दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री का पौड़ी कनेक्शन

दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री का पौड़ी कनेक्शन।   By - Dr. Yogeah Dhasmana   दिल्ली के प्रथम मुख्यमंत्री ब्रह्मप्रकाश का नाम कम ही लोगो ने सुना होगा।किंतु इससे...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

होली विशेषांक : खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर।

- खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर। - दून पुस्तकालय में संगीताजंलि की शानदार होली प्रस्तुति दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में आज संगीतांजली शास्त्रीय...

बर्लोगंज एंड बियोंड पुस्तक का लोकार्पण

पुस्तक : बर्लोगंज एंड बियोंड   By - Dr. Yogesh dhasmana   देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो बी के जोशी के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक बर्लोगंज एंड बियोंड...

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में।

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में। By - Neeraj Uttarakhandi पुरोला विकासखंड के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में राष्ट्रीय...

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी।

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी। .......... दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में ‘स्पेक्स’ संस्था के सहयोग...

जनगणना की पूरी तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी जनगणना

जनगणना-2027 की डिजिटल तैयारियां शुरू, देहरादून में 25-27 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू चार्ज अधिकारियों से लेकर सेन्सस क्लर्क तक, सभी ले रहे डिजिटल...

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...