प्रिय मीडियाकर्मियों, कहां गया राजीव प्रताप
By – Pankaj Kushwah
जो परसों रात से लापता है वह पत्रकार था और नाम था राजीव प्रताप। आज अखबारों में खबर पढ़ रहा हूं कि एक युवक लापता है और जिस कार में वह सवार था वह भागीरथी नदी में मिली है लेकिन लापता युवक का पता नहीं चल पाया है।
एक फेसबुक पेज के जरिए क्षेत्र में सक्रिय वह युवक राजीव प्रताप था, जो लगातार सक्रिय रहता, लोगों की आवाज सुनाता, वह सब कुछ करता जो एक पत्रकार को करना चाहिए, आपके मानने न मानने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
आज यूट्यूबर्स, फेसबुक के जरिए लाइव होने वाले कई दर्जनों पत्रकार मुख्यधारा की मीडिया से भी बेहतर काम कर रहे हैं, जहां मुख्यधारा की मीडिया ने मुद्दों पर समझौते शुरू किए उसके बाद जनता और मीडिया के बीच एक बड़ा खालीपन आया जिस खालीपन को इन यूट्यूबर्स, फेसबुक रिपोर्टर ने भरा, वह लोगों के बीच पहुंचे, लोगों के बीच लोकप्रिय हुए, न आता हो उन्हें लच्छेदार भाषा में बोलना, न हो उनका उच्चारण सही, न हो उन्हें मुद्दों की समझ लेकिन वह उस बड़ी आबादी की आवाज बने हैं जिन्हें मुख्यधारा की मीडिया ने इसलिए सुनना बंद कर दिया क्योंकि वह आवाज सरकार की कानों में चुभने लगती है।
अखबार, टीवी चैनल सरकार के विज्ञापन बोर्ड लगते हैं, जिनपर खबरें सिर्फ विज्ञापनों के रूप में चल रही है और सिर्फ सिटिजन जर्नलिज्म ही बचा हुआ है जिस पर थोड़ी सी उम्मीदें बाकी बची है।
राजीव प्रताप हो या कोई और यूट्यूबर्स पत्रकार, वह लोगों के बीच रहते थे, लोगों से बातचीत करते थे, लोगों की बाते सामने लाते थे, वह प्रेस क्लब पॉलिटिक्स में नहीं रहते, वह सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों की तारीफें नहीं बांध रहे होते।
वह अच्छा युवक था, मेरी उससे बिल्कुल मुलाकात नहीं थी, किसी दिन मैंने उसके पेज के किसी पोस्ट पर कोई हल्का कमेंट किया था, उसका जवाब आया तो मैंने भी आदतानुसार एक झिड़की लगा दी। मैं राजीव को नहीं जानता था न ही उस जैसे उन तमाम युवाओं को जो दूर दराज के इलाकों में मुख्यधारा की मीडिया की मौत के बाद पैदा हुए खालीपन को भर रहे हैं।
राजीव प्रताप का अब तक पता नहीं चल सका है, नदी में बही कार बरामद हो चुकी है लेकिन उसमें सवार राजीव प्रताप लापता है, उम्मीद करता हूं कि वह सुरक्षित हो।
प्रिय पत्रकार साथियों, जिन मीडिया संस्थानों में तुम लोग काम करते हो वह भी तुम्हें पत्रकार नहीं मानता, तुम्हारें न होने पर वह तुमसे नाता भी तोड़ देगा इसलिए ज्यादा संवेदनशील बनने की कोशिश करो।
@पंकज कुशवाह वरिष्ठ पत्रकार है







