विनोबा भावे को उनकी 129 वीं जयंती पर किया याद।
………………………
आचार्य विनोबा भावे की 129 वीं जयंती पर उनका भाव पूर्ण स्मरण जिला सर्वाेदय मंडल, देहरादून द्वारा दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के सहयोग से आज शाम को किया गया। दून पुस्तकालय के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. इन्दु शुक्ल, उपाध्यक्ष, देहरादून सर्वाेदय मंडल ने की। इस अवसर पर विनोबा के कुछ प्रिय भजन गीतों गायन भी किया गया। लोगों द्वारा बिनोवा जी के चित्र पर पुष्पांजलि भी दी गयी।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर प्रसिद्ध पर्यावरणविद डॉ. रवि चोपड़ा ने सर्वाेदय और विनोबा पर अपने सम्यक विचार रखें। उन्होंने उनके विचार व जीवन से जुड़े अनेक उदाहरण लोगों के सामने रखा। उल्लेखनीय है कि डॉ.चोपड़ा ने विनोबा,सर्वाेदय और भूदान को बहुत निकट से देखा और समझा है। कार्यक्रम में सह वक्ता के रूप में श्री अशोक कुमार, निदेशक, दूरदर्शन और आकाशवाणी थे। इन्होंने भी सर्वाेदय और भूदान के साथ विनोबा के जीवन और दर्शन पर अपने विचार व्यक्त किये। अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने गांधी व बिनोवा दर्शन से प्रभावित होकर अपनी दिनचर्या भी उनकी दर्शन शैली में समाहित की हुई है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि विनोबा जी एक महान स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ महात्मा गांधी द्वारा घोषित प्रथम सत्याग्रही थे। धुलिया जेल मे उनके द्वारा लिखित गीता दर्शन और विभिन्न धर्माे के ग्रंथों पर आधारित यथा-कुरान सार ,धम्मपद सार,बाइबिल, गुरुग्रंथ साहब, वैदिक धर्म सार इत्यादि के अतिरिक्त ईसावास्यवृत्ति,स्थितप्रज्ञ दर्शन उनकी प्रमुख कालजयी रचनाएं हैं।उनका भूदान आंदोलन जिसमें संपूर्ण देश में लगभग 48 लाख एकड जमीन दान में मिली उसीके कारण भारत देश एक बहुत बड़े सामाजिक सशस्त्र संघर्ष से बच गया।
सर्वोदयी विचारक विजय शंकर शुक्ल ने कहा कि विनोबा के प्रभाव से उत्तराखंड में हरिद्वार को छोड़कर करीब 3000 एकड जमीन भूदान में प्राप्त हुई और उत्तरकाशी जिले का जिलादान संपन्न हुआ। विनोबा जी ने निष्पक्ष और निर्बैर रहते हुए निर्भय और फिर अभय होने का सूत्र देते हुए जय जगत का उद्घोष किया। वह कहते थे कि मैं किसी देश विशेष का अभिमानी नहीं,किसी धर्म विशेष का आग्रही नहीं,किसी संप्रदाय, मत मतांतर के उलझन में न पड़कर प्रकृति के स्वतंत्र उद्यान में शून्य भेदभाव से विचरण करने वाला व्यक्ति हूं।
कार्यक्रम का संचालन सुप्रसिद्ध अधिवक्ता हरवीर सिंह कुशवाहा ने किया। प्रारम्भ में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के चंद्रशेखर तिवारी ने सभागार में उपस्थित जनों का स्वागत किया। इस अवसर पर कुसुम रावत, हिमांशु आहूजा,डॉ.राजेश पाल,चन्दन नेगी, सुरेन्द सजवाण, शैलेंद्र भंडारी, समदर्शी बड़थ्वाल, सुंदर सिंह बिष्ट व मनमोहन चढ्ढा, अतुल शर्मा सहित कई सर्वोदयी विचारक लेखक, साहित्यकार, व अनेक पाठक और प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।
……………………….
संपर्क – दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र, लैंसडाउन चौक, देहरादून, 9410919938
चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना
तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...
चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना
तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...
डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
https://www.facebook.com/janmanchaajkal?locale=hi_IN
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय...
Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas
By - Prem Pancholi
The Shail Shilpi Vikas Sangathan organized...
जनसमस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऋषिपर्णा सभागार में समाधान दिवस आयोजित किया गया। जिलाधिकारी डॉ....
गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में दिखाई देने वाली छोटी हिमनदीय झीलों से तत्काल बड़े खतरे की स्थिति नहीं-वाडिया
मीडिया में प्रसारित खबरों के संबंध में यूएसडीएमए...