Friday, September 11, 2026
Home उत्तराखंड अनुभव : जल सिंधु की भावना समझनी जरूरी है।

अनुभव : जल सिंधु की भावना समझनी जरूरी है।

@Bacchi singh bisht

पहाड़ में नौला, खासकर कुमाऊ में तो यह जीवन से जुड़ा है ही। शायद इसे ही कश्मीर में चश्मा कहते हैं।जिसका आकार थोड़ा अलग होता है।

Jalsindhu
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हमने अपने जल संचय और जल संस्कृति अभियान के दौर में नौला को लेकर यह बातें सुनी कि इसका एक पंचांग होता है।इसमें पानी ज्वार भाटे की गति के साथ यानि चंद्रकला के अनुसार बढ़ता और घटता है।प्राचीन समय में जब से नौला बनाया जाने लगा, इसमें शुद्धता के लिए तांबा और जड़ों को अंदर आने से रोकने के लिए हल्दी का प्रयोग किया जाता था।

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जानकर वास्तुविद यानि ग्रामीण शिल्पकार, पंचांग के जानकर पंडित की भूमिका बहुत बड़ी होती थी और जिसके नौला बनवाना था, वह आर्थिक स्थिति के अनुसार इसको पांच, सात, नौ, ग्यारह कुंडी बनवाता और इसका ऊपरी भाग भी नीचे के पत्थरों की बनावट के आधार पर ही बनता था।

शुद्धता बनाए रखने के लिए उसके पास रजस्वला, आसन्न प्रसवा और जूते धारण किए व्यक्ति का जाना मना किया गया था।

इसके साथ ही इसमें विष्णु की मूर्ति, नाग का विग्रह आदि भी रखे जाते थे।इनमें दीपदान होते थे, जिनमें नजदीक रहने वाले गृहस्थ दीया जलाकर रखते थे…

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लोक देवताओं के अवतरण के बाद भी कुछ नौले प्रकट हुए थे, कुछ नौले सिर्फ देव कार्य के लिए ही बनाए गए थे..

उन जगहों पर नौले के नाम पर ही नौलाधार, या गैर या कुछ और नाम दिए गए हैं।आज हमारी संस्कृति का यह सबसे महत्वपूर्ण जल श्रोत खतरे में है।इनका दुरुपयोग किया जाने लगा है।कुछ नौले अशुद्ध कर दिए गए, कुछ के जल धारण क्षेत्र में निर्माण कर दिया गया और कुछ के जलागम में वृक्ष वनस्पतियों को काट डाला गया। नौले में मोटर लगाना, जूते सहित जाना या उसका पानी पूरी तरह निचोड़ लेना कुकर्म और पाप की श्रेणी में रखा गया है।लोगों को यह मालूम ही नहीं कि राजे रजवाड़े जिन नौलों का निर्माण और उपयोग करते रहे, उनका प्रयोग आम जन नहीं कर सकते थे, लेकिन आम जन ने जिन नौलों का निर्माण किया वे बेहद पवित्र भाव से उपयोग किए जाते रहे हैं। सेठ साहूकार, दानी, धर्मप्रेमी लोगों ने नौला बनवाकर पुण्य का भागी बनने का मौका प्राप्त किया था।वास्तव में नौला जल संचय, जल के सम्यक उपयोग और प्रकृति संरक्षण का अद्भुत निर्माण रहे हैं।

जिस तरह हरे युवा पौधे पर हथियार से वार करके उसे नष्ट करना अपने बच्चे की गर्दन काटने जितना पाप और पीड़ादायक कुकर्म है, उतना ही पाप का कार्य प्राकृतिक जल श्रोत को बर्बाद करना और नौले को गंदा करना, तोड़ना, कब्जा करना और उसके जल को खराब करना है।लोक की वाणी में नौला विष्णु का क्षीर सागर है।

आप हम उसको बचाने की दिशा में कुछ कर सकते हैं ताकि पीढियां सुरक्षित रहें और जल सिंधु का यह सर्वाधिक पवित्र स्थान हमारे निसर्ग को जीवित बनाए रखे।

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