Sunday, September 13, 2026
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उत्तराखण्ड हिमालय को जानने-समझने के लिए एक जरूरी पुस्तक-

उत्तराखण्ड हिमालय को जानने-समझने के लिए एक जरूरी पुस्तक-

@Dr. Arun Kuksal

हिमालय और हिमालयी जनजीवन के एक अध्येता के रूप में चन्द्रशेखर तिवारी लोकप्रिय हैं। उत्तराखण्ड हिमालय के सामाजिक, सांस्कृतिक और यात्रा-लेखन पर उनका लेखन चर्चित रहा है।
कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के सन् 1984 में एम. ए. (भूगोल) के गोल्ड मेडलिस्ट चन्द्रशेखर तिवारी के लेखन में तथ्यों एवं प्रसंगों की प्रमाणिकता हर स्तर पर मौजूद रहती है। इसी कारण, भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक मुद्दों पर उनका विगत चालीस वर्षीय संपूर्ण लेखन शोधपरक, समसामयिक और उपयोगी है।

Uttrakhand ka bhoogol
Uttrakhand ka bhoogol

चन्द्रशेखर तिवारी की समय-साक्ष्य, देहरादून से हाल ही में ‘उत्तराखण्ड का भूगोल (प्राकृतिक व सामाजिक सन्दर्भ) पुस्तक प्रकाशित हुई है। एक लम्बे समय बाद उन्होने अपने मूल एवं प्रिय विषय भूगोल पर केन्द्रित पुस्तक की रचना की है। यह किताब उनके वर्षों की समझ, ज्ञान और अनुभवों का सुंदर संयोजन है। इस माध्यम से उत्तराखण्ड हिमालय को उसके प्राकृतिक और सामाजिक सन्दर्भों में जानने-समझने के दृष्टिगत एक प्रमाणिक दस्तावेज को उन्होने सार्वजनिक किया है।

इस पुस्तक में लेखक चन्द्रशेखर तिवारी ने ‘उत्तराखण्ड राज्य’ अर्थात इसके प्रशासनिक स्वरूप और ‘उत्तराखण्ड प्रदेश’ इसके भौगोलिक स्वरूप को क्रमबद्ध तरीके से संयोजित किया है। इस पुस्तक में उत्तराखण्ड के विविध आयामों को 275 पृष्ठों और 08 अध्यायों में उन्होने समाहित किया है। प्रमुख समाज वैज्ञानिक प्रो. बी. के. जोशी जी ने इस पुस्तक की भूमिका में पुस्तक की सार्वजनिक उपयोगिता के विविध संदर्भों का जिक्र किया है।

पुस्तक में, उत्तराखण्ड के सामान्य परिचय, भौगोलिक संरचना, पारिस्थिकीय, वन्यता, स्थलाकृति, मृदा एवं खनिज, जल-प्रवाह प्रणाली, भूमिगत जल, ग्लेशियर, झील, बुग्याल, जलवायु वर्गीकरण एवं विशेषताएं, वर्षा एवं तापमान, वनस्पति, वन वर्गीकरण एवं स्थिति, वन उपज, वन्य जीव, परम्परागत उद्यमों आदि पर प्रमाणिक तथ्यपरक आंकड़ों, सूचनाओं, रेखांकनों, छाया चित्रों तथा मानचित्रों के माध्यम से उत्तराखण्ड के जीवंत स्वरूप को उजागर किया गया है।

यह किताब उत्तराखण्ड के विविध संदर्भों पर महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ संदर्भ ग्रन्थों से भी अवगत कराती है। उत्तराखण्ड हिमालय की पारिस्थिकीय एवं वन्यता और सामाजिक संरचना एवं जन-जीवन की दृष्टि से गढ़वाली-कुमाऊँनी भाषा में प्रचलित शब्दों और सम्बोधनों को उनके सारगर्भित अर्थों के साथ इस पुस्तक में शामिल किया गया है।

यह उत्तराखण्ड के अतंस को जानने-समझाने का आत्मीय प्रयास लेखक का है।

यह सामान्य बात है कि, किसी क्षेत्र-विशेष के समग्र विकास की रूपरेखा बनाने के लिए सर्वप्रथम उस क्षेत्र-विशेष के परिवेशीय जानकारी के आधारभूत एवं प्रामाणिक तथ्यों एवं प्रसंगों की आवश्यकता होती है। क्योंकि, क्षेत्र-विशेष की भौगोलिक एवं पारिस्थितिकीय स्थिति, स्थलाकृति, प्राकृतिक संरचना उसके भविष्य के सर्वागीण प्राकृतिक और सामाजिक पक्षों के उपयोग की संभावनाओं को निर्धारित करते हैं।

उक्त दृष्टि से यह किताब लेखक चन्द्रशेखर तिवारी के गहन शोध-अध्ययनों के उपरान्त अपने आकर्षक और रोचक कलेवर के साथ सामने आई है। जो कि, प्रमुखतया माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा में अध्ययनरत विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अध्येताओं, शिक्षकों एवं समाज वैज्ञानिकों को उत्तराखण्ड हिमालय को जानने-समझने के लिए एक महत्वपूर्ण पुस्तक है।

निःसंदेह, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए तो यह बेहद उपयोगी है। साथ ही, उत्तराखण्ड हिमालय की ओर यात्रा करने वाले तीर्थयात्री, पर्यटक, घुमक्क़ड़ों के लिए एक प्रमाणिक गाइड पुस्तक भी है।

लेखक और प्रकाशक दोनों के लिए इस समसामयिक समाजोपयोगी पुस्तक को तैयार करने के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामना।

पुस्तक- उत्तराखण्ड का भूगोल (प्राकृतिक व सामाजिक सन्दर्भ)
लेखक- चन्द्रशेखर तिवारी
आवरण- अनूप साह
संस्करण- प्रथम, 2024, मूल्य- ₹ 325
प्रकाशक- समय साक्ष्य (7579243444) और
दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र, देहरादून

अरुण कुकसाल
ग्राम- चामी, पोस्ट- सीरौं- 246163
पट्टी- असवालस्यूं, विकासखण्ड- कल्जीखाल
जनपद- पौड़ी (गढ़वाल), उत्तराखण्ड

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