मुंबई कौथीग के मंच पर उत्तरकाशी की सबसे पहले नंबर की विधानसभा पुरोला से आए दुर्गेश्वर लाल ने प्रवासी उत्तराखंडायों को संबोधित किया।
उन्होंने न कोई अपनी गतिविधि, ना अन्य राजनीतिक भाषण दिया। उन्होंने प्रवासी उत्तराखंडायों से निवेदन किया कि इस जनप्रतिनिधि को आप सभी प्रवासी उत्तराखंडायों का आशीर्वाद चाहिए। उन्होंने मुंबई में रह रहे अपनों से कौथीग़ के मंच से भी अपनी निजी बात साझा की है।
उन्होंने कहा कि वह बहुत ही जमीनी स्तर से आते हैं। उनके परिवार का कहीं से कहीं तक भी राजनीतिक परिचय नहीं था। लेकिन पुरोला विधानसभा की जनता ने सोचा कि पिछले 20 सालों से वे थके हारे जैसे राजनीतिक रंगों से रंगे हुए जनप्रतिनिधियों को ढो रहे हैं। इसलिए उन्होंने दुर्गेश्वर को चुना। और, यही नहीं आगे भी पुरोला की विधानसभा का आशीर्वाद उन पर बना रहेगा।
उन्होंने अपने भाषण में कई भावनात्मक बातें कही है। कहा कि जिस जगह पर वह आज खड़ा है यह जगह भी उनकी विधानसभा की सम्मानित जनता ने उन्हें बना कर दी है। उन्होंने प्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि वह अपने जनप्रतिनिधि होने का प्रस्तुतीकरण जनता के मध्य करके दिखाएंगे ऐसा उनका संकल्प है।
उन्होंने अपने 4 साल के कार्यकाल के बारे में कहा कि 2 साल तो उन्हें सीखने में ही लग गए। की, सरकारी विभागों के अधिकारियों के साथ काम करना कि स्तर पर होता है। अगर कहें तो उन्हें अभी विकास के कामों को करने का अनुभव सिर्फ 2 साल का है। उन्होंने यह भी कहा कि पुरोला विधानसभा सबसे विकट और सीमांत विधानसभा है। जहां आज भी सड़के हैं लेकिन सड़कों की हालत ठीक नहीं थी। जिन्हें ठीक करने में वह जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वह अपनी विधानसभा में “शिक्षा और स्वास्थ्य” को लेकर विशेष कार्य करना चाहते हैं। प्रवासी उत्तराखंडायों को संबोधित करते हुए कहा कि वह उनके कार्यों की जानकारी उनकी विधानसभा के लोगों से ले सकते हैं।
उन्होंने सभी प्रवासी उत्तराखंडायों को प्रणाम करते हुए कहा कि उनके लिए यहां बड़े गौरव का दिन है कि मुंबई कौथीग में संपूर्ण उत्तराखंड दिखाई देता है। ऐसा लगता है कि सागर के किनारे हिमालय खड़ा हो गया है। यहां जो आदर सत्कार आप लोग अतिथियों का करते हैं वह कभी ना भूलने वाला पल होता है। यह भी कहा कि अब वह हर साल मुंबई कौथीग में आकर आप सब लोगों का आशीर्वाद लेंगे।
अंत में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का विकास इस समय युवा कंधों पर है। क्योंकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री “युवा” हैं और लगातार दौड़ते रहते हैं। ऐसी कोई जगह नहीं है जहां उत्तराखंड के मुख्यमंत्री माननीय पुष्कर सिंह धामी जी नहीं पहुंचते हैं। उनके नेतृत्व वाली सरकार आज उत्तराखंड राज्य में एक विशेष स्थान पा चुकी है।







