Sunday, September 13, 2026
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चारधाम यात्रा की तैयारी जोरो पर, पूर्वाभ्यास कर किया सुरक्षा और सुगम यात्रा की तैयारी।

By – Prem Pancholi
  • चारधाम यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता- मदन कौशिक
  • कहा-सुरक्षित व सुगम यात्रा के लिए सरकार प्रतिबद्ध
  • चारधाम यात्रा पर माॅक ड्रिल का निरीक्षण किया  

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) तथा उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के संयुक्त तत्वावधान में आगामी चारधाम यात्रा को आपदा सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को गढ़वाल मंडल के सभी सात जनपदों में व्यापक माॅक ड्रिल आयोजित की गई। यह माॅक ड्रिल अलग-अलग आपदाओं के काल्पनिक परिदृश्यों के साथ 50 विभिन्न स्थलों पर एक साथ संपन्न हुई, जिसमें जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, वायु सेना, अर्द्धसैनिक बल, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन, परिवहन, लोक निर्माण, विद्युत, दूरसंचार तथा अन्य संबंधित विभागों ने सहभागिता की। यह माॅक ड्रिल सामुदायिक सहभागिता पर केंद्रित रही।

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने माॅक ड्रिल का निरीक्षण किया तथा वर्चुअल माध्यम से विभिन्न जनपदों के इंसीडेंट कमाण्डरों, उत्तरदायी अधिकारियों, सेक्टर प्रभारियों एवं मैदानी टीमों से संवाद कर अभ्यास के दौरान समन्वय और प्रतिक्रिया क्षमता की जानकारी ली। मंत्री श्री कौशिक ने कहा कि वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद उत्तराखण्ड के आपदा प्रबंधन तंत्र ने लंबा सफर तय किया है। राज्य ने अपनी आपदा प्रतिक्रिया क्षमता, पूर्व चेतावनी व्यवस्था, राहत एवं बचाव संसाधनों तथा संस्थागत समन्वय में लगातार सुधार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित चारधाम यात्रा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में यात्रा को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं।

उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की पहचान, अर्थव्यवस्था और गौरव से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। ऐसे में यात्रा से जुड़े सभी विभागों, एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को यह संकल्प लेना होगा कि प्रत्येक श्रद्धालु को सुरक्षित, सुगम और बेहतर यात्रा अनुभव उपलब्ध कराया जाए, ताकि देवभूमि उत्तराखण्ड की सकारात्मक छवि देश-विदेश तक पहुंचे। उन्होंने मौसम आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिये यात्रियों तक सभी एलर्ट पहुंचाने के निर्देश दिए ताकि वे सुरक्षात्मक कदम उठा सकें। उन्होंने संवेदनशील एवं संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की पूर्व पहचान कर वहां आवश्यक संसाधनों, मशीनरी, चिकित्सा सुविधाओं, संचार साधनों और राहत दलों की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

माॅक ड्रिल में उपाध्यक्ष, राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विनय रूहेला ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि यात्रा मार्गों पर यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, पार्किंग व्यवस्था, स्वास्थ्य सहायता, पेयजल, शौचालय, स्वच्छता और आपात निकासी योजना को और प्रभावी बनाया जाए। यात्रा मार्गों पर भूस्खलन संभावित स्थलों, संकरे मार्गों, पुलों तथा संवेदनशील पड़ावों पर विशेष सतर्कता बरती जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, मौसम विभाग और यात्रा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। सभी जिलों में 24×7 कंट्रोल रूम, हेल्पलाइन और संचार नेटवर्क को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सूचना, समन्वय और राहत कार्य सुनिश्चित हो सके।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि चारधाम यात्रा जैसे संवेदनशील आयोजन के लिए एनडीएमए के सहयोग से यूएसडीएमए द्वारा प्रत्येक वर्ष माॅक ड्रिल का आयोजन किया जा रहा है। इस अभ्यास से मैदानी स्तर पर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन हुआ है तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था और राहत-बचाव तंत्र की तैयारी और मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि माॅक ड्रिल के माध्यम से संभावित चुनौतियों और जिन कमियों की पहचान हुई है, उन्हें यात्रा शुरू होने से पहले दूर किया जाएगा। इस अवसर पर सचिव आनंद स्वरूप, एनडीएमए के लीड कंसलटेंट मेजर जनरल सुधीर बहल, एसीईओ प्रशासन महावीर सिंह चौहान, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, कमाण्डेंट एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी, कमाण्डेंट एनडीआरएफ संतोष कुमार, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी आदि मौजूद रहे।

हेली सेवाओं के सुरक्षित संचालन पर दिए दिशा-निर्देश

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के लीड कंसलटेंट मेजर जनरल सुधीर बहल के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने देहरादून में माॅक ड्रिल के तहत विभिन्न स्थलों का फील्ड निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। टीम ने सबसे पहले सहस्त्रधारा हेलीपैड पहुंचकर हेलीकाॅप्टर संचालन से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया, मौसम आधारित निगरानी तंत्र, कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली तथा एयर ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम का निरीक्षण किया। इस दौरान आपात स्थिति में हवाई राहत एवं निकासी की तैयारियों की बारीकी से समीक्षा की गई। इसके बाद टीम सपेरा बस्ती पहुंची, जहां अत्यधिक वर्षा के कारण रिस्पना नदी में बाढ़ आने की काल्पनिक स्थिति पर राहत एवं बचाव अभ्यास किया गया। टीम ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से त्वरित प्रतिक्रिया, समन्वय और संसाधनों के उपयोग की जानकारी ली। इसके पश्चात विशेषज्ञ टीम ने कोरोनेशन अस्पताल पहुंचकर आकस्मिक स्थिति में मरीजों की बढ़ती संख्या से निपटने, ट्रायेज सिस्टम, आपात चिकित्सा, अतिरिक्त बेड व्यवस्था, ऑक्सीजन सपोर्ट, रेफरल प्रबंधन तथा अस्पताल के संकट प्रबंधन तंत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल प्रशासन के साथ क्राइसेस मैनेजमेंट, संसाधनों की उपलब्धता तथा आपदा के समय स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने पर विस्तार से चर्चा की गई।विभिन्न परिदृश्यों से परखी तैयारियां


 रुद्रप्रयाग जनपद में केदारनाथ हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर की आपात स्थिति का अभ्यास किया गया। तकनीकी खराबी के कारण हार्ड लैंडिंग की सूचना मिलते ही प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और हेली रेस्क्यू टीम तत्काल सक्रिय हुई। घायलों को प्राथमिक उपचार देकर सुरक्षित निकासी की गई तथा हेलीपैड क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण और आपात संचालन का अभ्यास किया गया।चमोली जनपद में बदरीनाथ-गोविंदघाट मार्ग पर अचानक भारी हिमपात और हिमस्खलन जैसी स्थिति में यात्रियों के फंसने का परिदृश्य लिया गया। राहत दलों ने मार्ग बंद होने की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित होल्डिंग एरिया तक पहुंचाने, भोजन, दवा और आश्रय उपलब्ध कराने की व्यवस्था का अभ्यास किया।
उत्तरकाशी जनपद में गंगोत्री क्षेत्र में ग्लेशियल झील फटने से आई आकस्मिक बाढ़ की स्थिति पर अभ्यास किया गया। सूचना मिलते ही निचले क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया गया, संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया तथा संचार और राहत समन्वय की व्यवस्था का परीक्षण किया गया।

देहरादून जनपद में ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में आग लगने और भगदड़ की स्थिति पर माॅक ड्रिल हुई। दमकल, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन टीमों ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला, घायलों को उपचार उपलब्ध कराया और राहत शिविर संचालन का अभ्यास किया।
पौड़ी जनपद के श्रीनगर स्थित धर्मशाला में भूकंप के झटकों के बाद निकासी और राहत का अभ्यास किया गया। झटके महसूस होते ही धर्मशाला में ठहरे श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर घायलों को प्राथमिक उपचार दिया, भवन की सुरक्षा का आकलन किया तथा खुले सुरक्षित स्थानों पर अस्थायी राहत व्यवस्था सुनिश्चित की।

टिहरी जनपद में टिहरी बांध से नियंत्रित जल छोड़े जाने के बाद देवप्रयाग और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने की स्थिति पर माॅक अभ्यास किया गया। अलर्ट मिलते ही प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और राजस्व विभाग की टीमें सक्रिय हुईं। नदी किनारे ठहरे यात्रियों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, घाटों और निचले इलाकों को खाली कराया गया तथा पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से लोगों को सतर्क किया गया

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