न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी, एन. कोटेश्वर सिंह एवं श्री संदीप मेहता, साथ ही उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता की इस कसर पर विशेष उपस्थिति रही। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष मनोज कुमार तिवारी, उत्तराखंड लीगल सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा तथा उत्तर भारत के विभिन्न उच्च न्यायालयों से पहुंचे न्यायमूर्तिगण भी उपस्थित रहे।
इस दौरान उत्तराखंड राज्य के समस्त जनपदों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्ष, सचिव एवं न्यायिक अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की। विभिन्न सत्रों के माध्यम से न्याय तक पहुँच को सशक्त बनाने हेतु अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया।आयोजित दो प्रमुख सत्रों में, प्रथम सत्र में वन समुदायों के अधिकारों एवं वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया, जिसमें वन गुज्जर समुदाय के प्रतिनिधियों की भी सहभागिता रही। द्वितीय सत्र में जेल सुधार (Prison Reforms) पर विशेष चर्चा करते हुए बंदियों के अधिकार, न्याय तक उनकी पहुँच तथा सुधारात्मक उपायों पर महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए।
बता दें कि यह सम्मेलन न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ एवं मानव-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य को सुदृढ़ करता है।







