Friday, March 6, 2026
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क्या ‘मिनी क्लाउड बर्स्ट ‘ ला रहे तबाहीॽ

क्या ‘मिनी क्लाउड बर्स्ट ‘ ला रहे तबाहीॽ

– बहुत छोटे क्षेत्र में 5 से 10 सेमी प्रति घंटा वर्षा वाली घटनाओं को ‘मिनी क्लाउड बर्स्ट’ कहा जा रहा है। 

– हाल के दिनों में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में नदियों‚ नालों में बाढ से तबाही ऐसे ही संकेत कर रही 

– 2015 से 2024 तक उत्तराखंड़ में अतिवृष्टि और बाढ़ की 12758 की घटनाएं , जिनमें 67 बादल फटने की.

By – Arvind shekhar

क्या बादल फटने की छोटी–छोटी घटनाएं यानी ‘मिनी क्लाउड बर्स्ट’ प्रदेश में तबाही ला रही हैं हाल के दिनों में बारिश से तबाही और फिर सोमवार रात देहरादून के विभिन्न क्षेत्रों में नदियों‚ नालों में बाढ़ से तबाही ऐसे संकेत कर रही है। माना जा रहा है कि देहरादून में कम से कम तीन ‘मिनी क्लाउड बर्स्ट’ हुए। बहुत छोटे क्षेत्र में 5 से 10 सेमी प्रति घंटा वर्षा वाली घटनाओं को ‘मिनी क्लाउड बर्स्ट’ कहा जा रहा है। हालांकि कुछ मौसम वैज्ञानिक ‘मिनी क्लाउड बर्स्ट’ की अवधारणा से सहमत नहीं लेकिन बीते दिनों भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र मिनी क्लाउड बर्स्ट यानी बादल फटने की छोटी घटनाओं में बढ़ोतरी की बात कर चुके हैं। मौसम विभाग के मुताबिक हाल के वर्षों में भारत में बादल फटने की घटनाओं में कोई बढ़ती प्रवृत्ति नहीं देखी गई है और इनका पूर्वानुमान लगाना असंभव बना हुआ है।

तकनीकी रूप से 10 वर्ग किमी क्षेत्र में एक घंटे में 10 सेमी से अधिक बारिश को बादल फटना कहते हैं लेकिन विभिन्न जगहों में भारी लगातार बारिश की जो घटनाएं हो रही हैं‚ वे ये मानक पूरा नहीं करतीं। ऐसे में बहुत छोटे क्षेत्र तक सीमित 5–10 सेमी बारिश प्रति घंटा वाली घटनाओं को मिनी क्लाउड़ बर्स्ट कहा जा रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग के के आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड़ में वर्ष 2015 से 2024 तक अतिवृष्टि–बाढ़ की 12758 की घटनाएं हुई जिनमें बादल फटने की 67 घटनाएं थीं। इस मानसून सीजन (1 जून से अब तक) में उत्तराखंड में बादल फटने की आधा दर्जन से ज्यादा घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें उत्तरकाशी‚ रुद्रप्रयाग‚ चमोली‚ बागेश्वर‚ टिहरी और अब देहरादून जैसे जिलों में हुई घटनाएं शामिल हैं।

आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार‚ 1980 से सितंबर में भारत में होने वाली बारिश में बढोतरी देखी जा रही है। उत्तरी भारत में अगस्त में 26.5 सेमी वर्षा हुई‚ जो 2001 के बाद से सबसे अधिक थी। अगस्त 2024 में भारी बारिश (एक दिन में 20 सेमी या उससे ज्यादा) के 700 से ज्यादा मामले सामने आए‚ जो 2021 के बाद से दूसरी सबसे ज्यादा बारिश है‚ जबकि 2024 में 800 से ज्यादा बारिश हुई थी। उत्तरी भारत में अत्यधिक सक्रिय मानसून व पश्चिमी विक्षोभ के संगम के कारण भारी बारिश से हिमाचल प्रदेश‚ जम्मू–कश्मीर और उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर जान–माल का नुकसान हुआ।

भारतीय मौसम विज्ञान सोसायटी की राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष आनंद कुमार शर्मा ‘मिनी क्लाउड बर्स्ट’ की अवधारणा को ठीक नहीं मानते। उनका कहना है कि जिसे आम लोग क्लाउड बर्स्ट या बादल फटना कहते हैं‚ असल में वह वैज्ञानिक भाषा में तीव्र या अति तीव्र वर्षा है। जरूरी नहीं कि एक साथ भारी बारिश से ही तबाही हो। लंबे समय तक लगातार बारिश से भी ऐसी तबाही हो सकती है। जमीन की मिट्टी पानी को एक हद तक ही संभाल सकती है। हद पार होने पर वह बह निकलती है। क्योंकि जंगलों में पेड काट दिए गए हैं तो मिट्टी की पकड़ कम हो गई है तो ऐसी घटनाएं ज्यादा से ज्यादा हो रही हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह मौसम पूर्वानुमान तंत्र को बेहतर करे और चेतावनी प्रणाली में भी सुधार करे।

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