
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अपने उत्तराखंड प्रवास के दौरान कहा था कि एक समय ऐसा भी था जब महिलाएं दिन भर पानी ढोने में ही परेशान रहती थी, लेकिन जब बीजेपी की सरकार बनी तो सिर्फ उत्तराखंड में ही 12 लाख घरों तक नल का जल पहुंचा दिया गया है। यही वाकाया इन दिनों उत्तराखंड के लोगो को चिढ़ा रहा है।
ज्ञात हो कि देहरादून से लेकर चमोली तक और चंपावत से लेकर रूड़की तक पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। हर एक दिन पेयजल की समस्याएं मीडिया की सुर्खियां बन रही है। चंपावत में लोहाघाट के कोली ढेक क्षेत्र में, उत्तरकाशी की पल्ली मुंगरसंती क्षेत्र में, अल्मोड़ा, पौड़ी और चकराता के अधिकांश ग्रामीणों के हलक इन दिनों सूख चुके है। बता दें कि इन सभी क्षेत्रों के सभी प्राकृतिक पेयजल स्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं। कारण इसके चंपावत की महिलाओं ने खाली बर्तन लेकर अलका ढेक के नेतृत्व में एसडीएम कार्यालय लोहाघाट में धरना दिया और जल निगम के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की है।
हास्यास्पद इस बात को लेकर है कि “जल जीवन मिशन” जैसी योजना भी लोगो के हलक तर नहीं कर पा रही है। यही इस महत्वपूर्ण योजना की सफलता की कहानी को बयां कर रही है। आंदोलनकारी महिलाओं ने कहा कि करोड़ों की जल जीवन मिशन योजना के कारण भी गांव के लोग पेयजल के लिए सड़को पर उतर रहे हैं। महिलाओ ने यह भी कहा कि चंपावत क्षेत्र में हर घर जल, हर घर नल योजना का काम विभाग ने दो साल से अधूरा छोड़ दिया है। कई बार जलनिगम व जल संस्थान के अधिकारियो से गुहार लगाई गई पर उनके कान तक जूं नहीं रेंगी।
उल्लेखनीय हो कि ग्रामीण क्षेत्रों में पुरानी पेयजल योजना में भी पानी नहीं आ रहा है। लोगो को कई किलोमीटर दूर से पानी लाकर काम चलाना पड़ रहा है। लोहाघाट की उपजिलाधिकारी रिंकु बिष्ट ने कहा कि उन्होंने जल संस्थान विभाग के अधिशासी अभियंता को कह दिया गया है कि वे ग्रामीणों की पेयजल की समस्याएं जल्द दूर कर लें।

दरअसल पेयजल समस्या की बात सिर्फ चंपावत या फिर देहरादून तक समिति नहीं है। जनपद मुख्यालय चमोली कस्बे की महिलाओं ने जल संस्थान अधिकारी कार्यालय पहुँचकर विरोध प्रदर्शन किया है। स्थानीय निवासी कुसुम का कहना है कि विगत 20 दिनों से कस्बे में पेयजल की किल्लत हैं, विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से लोगो की समस्याएं बढ़ती ही जा रही है। चमोली में जल संस्थान अधिकारी कार्यालय पहुंची महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा है कि इस बार अगर तीन दिनों में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो बद्रीनाथ विधानसभा उपचुनाव में वोट का बहिष्कार करेगे साथ ही वही चारधाम यात्रा मार्ग को बाधित करने को मजबूर होना पड़ेगा।
कुल मिलाकर राज्य के कम से कम 50 से अधिक क्षेत्रों से पेयजल समस्याओ की खबरें मीडिया की सुर्खियां बनी है।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि उतराखंड में बीजेपी की डबल इंजन वाली सरकार के मुखिया पुष्कर सिंह धामी लगातार अधिकारियों के साथ बैठक करते दिखाई देते हैं और दिशा निर्देश भी देते हैं।
मगर आश्चर्य इस बात को लेकर है कि एक तरफ जहां मुख्यमंत्री देहरादून से लेकर नैनीताल तक अधिकारियों के साथ बैठक तो करते हैं, पर वही अधिकारी सीएम के आदेश को हवा में उड़ा देते हैं। यह आए दिन उत्तराखंड में हो रहा है।मुख्यमंत्री के चिल्लाने के बाद भी ऊंचाई वाले गांव में पेयजल की माकूल व्यवस्था नहीं हो पाई है। यह जगजाहिर है कि पहाड़ी क्षेत्र के अधिकांश गांव के ग्रामीण इन दिनों पेयजल की समस्या से जूझ रहे है।







