बाढ का खतरा: बूढाकेदार क्षेत्र में थोड़ी सी बारिस होने पर छोड़ देते है लोग घर

बीते जुलाई के मध्य में टिहरी बूढाकेदार क्षेत्र के तिनगढ में आई बाढ ने खतरनाक तबाही मचाई थी। धर्मगंगा और बाल गंगा ने जो अपना रौद्र रूप जुलाई माह में दिखाया है उससे आज भी इस क्षेत्र के लोग सहमे रहते हैं।
बालगंगा के किनारे एक छोर पर स्थित बूढाकेदारनाथ में स्थित लोक जीवन विकास भारती संस्था का परिसर है। 70 के दशक में इस संस्था के संस्थापक रहे शिक्षाविद् बिहारीलाल भाई ने क्षेत्र में ही नहीं अपतिु सम्पूर्ण उतराखण्ड हिमालय में शिक्षा के लिए अभूतपूर्व कार्य किया है। विशेषकर बालिका शिक्षा के लिए इनके कार्यक्रमो को पूरे देश दुनियां में अपनी एक अलग पहचान मिली थी। कह सकते हैं कि गांधी विचार की अकेली यह संस्था पूरे हिमालय क्षेत्र में लोक जीवन विकास भारती नाम संचालित है, जिसने कई कार्यकताओं सहित ग्रामउद्योग, ग्राम स्वरोजगार को बढावा दिया है। संस्था की यह कार्यशाला आज बाढ और भूस्खलन के चपेट में आ चुकी है।
तीन हेक्टेयर में बना संस्था का परिसर को 50 फिसदी हिस्सा मौजूदा समय बालगंगा की बाढ ने बहाकर ले गया है। यही नहीं संस्था का एक 25 किला वाट का पावर हाउस भी बालगंगा की बाढ में बहकर समाप्त हो गया है। इससे न कि संस्था परिसर को खतरा बना हुआ है बल्कि संस्था परिसर में रह रहे लोगो के लिए अब और खतरा बनता जा रहा है। क्योंकि बालगंगा ने अपना रूख लोक जीवन विकास भारती संस्था कैम्पस की तरफ कर दिया है।
बालगंगा के रूख को यथा स्थान करने के लिए जिला प्रशासन टिहरी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सिंचाई विभाग को आदेश दिया था। मगर सिचाई विभाग के स्थानीय कर्मचारी कभी मशीन खराब होने का बहाना बना रहे है, कभी विभागीय अधिकारियों के आदेश की दुहाई दे रहे है। इस हिलाहवाली से क्षेत्र के लोगों में खासा गुस्सा है। बता दें कि तिनगढ से लेकर बूढाकेदार और निचले स्तर तक जुलाई माह की बाढ ने बहुत ही खतरनाक कहर बरपाया था जो किसी से छुपा नहीं है। जैसे जैसे बरसात तेज होती जा रही है, वैसे वैसे लोगो को फिर से खतरा नजर आने लग रहा है। स्थानीय पत्रकार सागर सुनार का घर भी इस दौरान की बाढ से खतरे के निशान पर आ चुका है। वह बूढाकेदारनाथ में पंचायत भवन में अपने परिवार के साथ रह रहा है। सूत्रो के अनुसार बूढाकेदारनाथ क्षेत्र में ऐसे अन्य परिवार और भी है जो अपने आवासीय भवनो को छोड़कर कहीं और सुरक्षित ठौर ठीकाना ढूंढ रहे है। यह भी खबर है कि स्थानीय प्रशासन ने आपदा प्रभावितो को त्वरित राहत के लिए पांच पांच हजार रूपय की अहेतुक सहायता की है। यह अहेतुक आपदा राहत ऐसे प्रभावितों के लिए पूरी नहीं हो पा रही है।

कुलमिलाकर जिस लोक जीवन विकास भारती संस्था ने गांधी की प्रवेशीय शिक्षा का दीप इस दूर दराज क्षेत्र में जलाया हो, जिस संसथा ने यह बताया कि अपने हुनर को आप रोजगार दे सकते है यानि ग्रामोद्योग की परिकल्पना को साकार किया है। यही नहीं बड़े बांधों के विकल्प के लिए बालगंगा पर 25 किलो वाट का एक पावर हाउस बनाकर यह बताया है कि इस उत्तराखण्ड हिमालय में ऐसे सैकड़ो पावर हाउस बनाये जा सकते है। जिससे पर्यावरण सन्तुलन भी बना रहेगा। बेतुके खर्चो से बचा जायेगा और बहुत कुछ। वह संस्था इस बार की बाढ से जीवन और मृत्यु के बीच झूल रही है।
बताया गया है कि यह संस्था हमेशा सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और अन्य विभिन्न समाजोन्मुखी गतिविधियों की प्रमुख केन्द्र रही है। आज लोक जीवन विकास भारती जैसी संस्था बालगंगा की बाढ की चपेट में है और प्रशासन के स्थानीय कर्मचारी आंख मंूदकर तमाशबीन बने हुए है और अपने उच्च अधिकारियों यानि जिलाधिकारी टिहरी सहित को गुमराह करने में मशगूल नजर आते है। यही नहीं बालगंगा और धर्मगंगा की बाढ ने रक्षिया, थाती, गोंफल, कोट, विशन, तोली, जवाणा, तिनगढ दर्जनो गांवो की कृषि भूमी को भारी नुकसान पंहुचाया है। साथ ही इन गावों की बसासत थोड़ी बारिस होने पर भी अपने घरो को छोड़ने के लिए मजबूर हो रखे है।







