पुस्तक समीक्षा : गांव की माटी की खुरदरी यादें
रोचक शैली में लिखी गयी यह पुस्तक पठनीय है, विशेषकर दूर शहरों में बसे हमारे प्रवासी भाई बंधुओं के लिए तो यह गांव की खुद बिसराने वाली किताब है। आज हमारे पहाड़ के गांव के गांव पलायन की मार झेलते हुए जन शून्य होते जा रहे हैं। इस पुस्तक में 37 शीर्षकों के अंतर्गत समेटी गयी गांव की स्मृतियों में पलायन का दर्द महसूस किया जा सकता है। पुस्तक पढ़ते हुए ये पंक्तियां जेहन में उपजती हैं-
अपने बचपन की यादों में खोकर लेखक ‘अपनों से अपनी बात—-‘ कहते हुए गजल सम्राट जगजीत सिंह की पंक्तियां याद कर लिखता है –
RELATED ARTICLES







