Saturday, March 7, 2026
Home टिहरी गढ़वाल पुस्तक समीक्षा : गांव की माटी की खुरदरी यादें

पुस्तक समीक्षा : गांव की माटी की खुरदरी यादें

गांव की माटी की खुरदरी यादें

By Dheeraj negi

एक खेत से दूसरे खेत में कूदते -फांदते, गांव के रास्ते व पथरीली पगडंडियों पर दौड़ते-भागते, मुठ्ठी बांध हथेली उल्टी कर रंग-बिरंगी मक्खी को पास-फेल, पास-फेल कर उड़ाते हुए बचपन की खट्टी-मीठी यादों को समेटे हुए शूरवीर रावत जी की उनके गांव के संस्मरणों पर सद्य प्रकाशित पुस्तक “चमकीली चादर पर मटमैले आखर” पुस्तक पढ़ने का सुअवसर मिला।

हम लोगों की पीढ़ी बिना समुचित साधनों और बिना किसी सहारे या कमजोर सहारे पर अपने पहाड़ के गांव छोड़कर मैदानी शहरों में आ बसी है और फिर यहीं की होकर रह गयी है। अपने साथ अपने पीछे छूटे हुए लोगों, अपने खेत -खलिहान, बाट-घाट, गांव-स्कूल की अनेक यादें मन-मस्तिष्क में संजोकर जी रहे हैं। ये यादें हमें कभी गुदगुदाती है, कभी हंसाती और कभी रुलाती भी हैं। जिन लोगों के पास लेखन का हुनर है वे अपनी लेखन कला से अपनी यादों को संजोते हुए साहित्य की अभिवृद्धि करते हैं । कालांतर में ये पुस्तकाकार संस्मरण साहित्य की धरोहर बन जाते हैं।

ऐसे ही हुनरदार लेखक शूरवीर रावत जी की लेखनी से टिहरी गढ़वाल के भिलंगना की खूबसूरत घाटी में बसे अपने गांव की स्मृतियों को संजोकर लिखी गयी उक्त पुस्तक में दादी की झुणकी की खनक से लेकर गांव की होली के रंग ही नहीं अपितु दीवाली के दियों की रोशनी भी झिलमिलाती है। ला ग्रेजुएट प्रधान जीत सिंह पंवार, मदननेगी का सौणू की यादों के‌ साथ ही उम्मेद सिंह भाई की शरारत भी बसी हैं । चुलु की चटनी का न बिसरने‌ वाला स्वाद भी चटखारें‌ मार‌ रहा है।

रोचक शैली में लिखी गयी यह पुस्तक‌ पठनीय है, विशेषकर दूर शहरों में‌ बसे‌ हमारे‌ प्रवासी भाई बंधुओं के लिए‌ तो‌ यह‌ गांव‌ की खुद‌ बिसराने वाली किताब है। आज हमारे पहाड़ के‌ गांव के गांव‌ पलायन की मार‌ झेलते हुए जन शून्य होते जा रहे हैं। इस पुस्तक में 37 शीर्षकों के अंतर्गत समेटी गयी गांव की स्मृतियों में पलायन का दर्द महसूस किया जा सकता है। पुस्तक पढ़ते हुए ये पंक्तियां जेहन में उपजती हैं-
ढू़ंढ रही हैं छाया/काया कहां‌ खो गयी रेले‌ में/परछाईं ही परछाईं हैं/लोग नहीं हैं मेले‌ में।

किसके कंधों पर सिर रखें/किससे अपना दुखड़ा गाएं/किस खोए हुए को ढूंढें जिससे/लिपटें अपनी सुनाएं/छोड़ गए मंदिर, युग नायक/ छुपे हुए किस ठेले में।

अपने बचपन की यादों में खोकर लेखक ‘अपनों से अपनी बात—-‘ कहते हुए गजल सम्राट जगजीत सिंह की पंक्तियां याद कर लिखता है –
“ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो/भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी/मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन—— ”
लेखक की भावनाएं अपने गांव से कितनी जुडी हैं, उनकी ये पंक्तियां बताती हैं- “किसी अन्यके लिए मेरा गांव मिट्टी पत्थर से युक्त मात्र एक गांव हो सकता है किंतु मेरे लिए तो यह मेरे सपनों, मेरे अरमानों, मेरी कामनाओं, मेरे जज्बातों का घर है—“

पुस्तक विनसर‌ पब्लिशिंग कम्पनी‌, 8 प्रथम तल, के सी सिटी सेंटर, डिसपेंसरी‌ रोड़, देहरादून‌ 248001 द्वारा प्रकाशित की गयी‌ है।

140 पृष्ठों की इस पुस्तक का मूल्य 195/ रू‌पए‌ मात्र है।

RELATED ARTICLES

भावनात्मक रूप से व्यवस्था पर चोट करती गढ़वाली फिल्म जलमभूमि

By - Prem Pancholi   "जलमभूमि" गढ़वाली शब्द है। जिसे हम जन्मभूमि भी कह सकते है। इस शब्द को कहानी का रूप दिया गया है। जी...

‘मीरा बहन’ (मेडेलीन स्लेड) की नज़र से ‘गांधी’

'मीरा बहन' (मेडेलीन स्लेड) की नज़र से 'गांधी' By - Dr. Arun kuksal   ‘गांधीवाद जैसी कोई वस्तु नहीं है और मैं नहीं चाहता कि मेरे पीछे...

⁠वीबी – जी राम जी मिशन योजना एक महत्वपूर्ण पहल है : किशोर उपाध्याय

'विकसित भारत- जी राम जी अधिनियम' विषय पर नई टिहरी में मीडिया कार्यशाला 'वार्तालाप' का हुआ आयोजन - कार्यशाला का उद्देश्य योजना के प्रावधानों एवं...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

होली विशेषांक : खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर।

- खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर। - दून पुस्तकालय में संगीताजंलि की शानदार होली प्रस्तुति दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में आज संगीतांजली शास्त्रीय...

बर्लोगंज एंड बियोंड पुस्तक का लोकार्पण

पुस्तक : बर्लोगंज एंड बियोंड   By - Dr. Yogesh dhasmana   देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो बी के जोशी के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक बर्लोगंज एंड बियोंड...

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में।

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में। By - Neeraj Uttarakhandi पुरोला विकासखंड के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में राष्ट्रीय...

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी।

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी। .......... दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में ‘स्पेक्स’ संस्था के सहयोग...

जनगणना की पूरी तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी जनगणना

जनगणना-2027 की डिजिटल तैयारियां शुरू, देहरादून में 25-27 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू चार्ज अधिकारियों से लेकर सेन्सस क्लर्क तक, सभी ले रहे डिजिटल...

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...