By Dr. Leela chauhan
भारत की विविधता में छिपे ग्रामीण व्यंजन हमारी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा हैं। इन्हीं में से एक है उलुऐ, जिसे जौनसार बावर में “सभी व्यंजनों का राजा” कहा जाता है। यह केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि एक परंपरा, एक भावना और एक विशेष अवसर का प्रतीक है। खासकर तब जब बेटी मायके आती है, तो उलुऐ बनाना उसके स्वागत और प्रेम को दर्शाने का माध्यम बन जाता है। हर त्योहार में उलुऐ का बनना अनिवार्य सा है। यह व्यंजन परिवार के जुड़ाव, मेहनत, सहयोग और स्वाद का मेल है। इसके स्वाद के साथ भावनाएँ जुड़ी होती हैं ।










