Friday, March 6, 2026
Home World सामाजिक चेतना के अग्रदूत डॉ० शमशेर सिंह बिष्ट की पुण्य तिथि पर...

सामाजिक चेतना के अग्रदूत डॉ० शमशेर सिंह बिष्ट की पुण्य तिथि पर विशेष

आज हम सबके प्रेरक अग्रज रहे डा. शमशेर बिष्ट जी की पुण्यतिथि है। उन्हें हम सबकी ओर से विनम्र श्रद्धांजलि। अलविदा युग परुष!

By – Charu tiwari

हमारी पूरी पीढ़ी मानती है कि डाॅ. शमशेर सिंह बिष्ट सत्तर के दशक में युवा चेतना के ध्वजवाहक थे। जीवन के अंतिम समय तक मूल्यों के साथ खड़े रहकर सामाजिक चिंतन से लेकर सड़क तक उन्होंने जिस तरह एक समाज बनाया वह हमारे लिये हमेशा प्रेरणा देने वाला था।

हम सब लोग बिष्ट जी के जाने से निराश हैं। वे ऐसे दौर में हमें छोड़कर गये हैं, जब लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाने के लिये उनके धीर-गंभीर व्यक्तित्व से हम सब लोग रास्ता पाते। पिछले दिनों जब अल्मोड़ा में उनके निवास में हम सब लोग उनसे मिलने गये तो देश और पहाड़ के सवालों पर उनकी चिंता और बदलाव के लिये कुछ करने की जो उत्कंठा थी उससे लग रहा था वे अभी हमें और हमारा मार्गदर्शन करेंगे। लंबे समय से वे बीमार थे। दिल्ली के एम्स में उनका इलाज चल रहा था।

शमशेर बिष्ट जी से कब परिचय हुआ याद ही नहीं है। उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि लगता था हम उन्हें वर्षो से जानते हैं। जब हम लोगों ने सामाजिक जीवन में प्रवेश किया तो उन दिनों शमशेर सिंह बिष्ट जी अगुआई में पहाड़ के सवालों पर युवा मुखर थे। मैं उनसे पहली बार 1984 में ‘नशा नहीं, रोजगार दो’ आंदोलन में मिला। मिला क्या एक बड़ी जमात थी युवाओं की। ये युवा टकरा रहे थे माफिया राजनीति के खिलाफ। शराब की संस्कृति के खिलाफ। लीसा-लकड़ी के रास्ते जो राजनीति पनप रही थी उसके खिलाफ एक बड़ा अभियान था। मैं इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर विश्वविद्यालय में प्रवेश की तैयारी कर रहा था। इस युवा उभार ने मुझे प्रभावित किया। हम लोग भी इनके साथ इस आंदोलन में लग गये।

‘नशा नहीं रोजगार दो’ आंदोलन मेरे क्षेत्र गगास घाटी में सबसे प्रभावी तरीके से चला इसलिये मुझे शमशेर सिंह जी को बहुत नजदीक से देखने, सुनने और जानने का मौका मिला। उन दिनों इन युवाओं को देखना-सुनना हमारे लिये किसी कौतुहल से कम नहीं था। हम लोग ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले थे। हमें लगता था कि ये लड़के इतनी जानकारी कहां से जुटाते हैं। एक से एक प्रखर वक्ता। लड़ने की जिजीविषा से परिपूर्ण। तब पता चला कि शमशेर कौन हैं।

सत्तर के दशक में जब पूरे देश में बदलाव की छटपटाहट शुरू हो रही थी तो पहाड़ में भी युवा चेतना करवट ले रही थी। इंदिरा गांधी का राजनीतिक प्रभाव अपनी तरह की राजनीति का रास्ता तैयार कर रहा था। एक तरह से राजनीतिक अपसंस्कृति समाज को घेर रही थी। गुजरात से लेकर बिहार तक छात्र-नौजवाज बेचैन था। पहाड़ में वन आंदोलन, कुमाऊं-गढ़वाल विश्वविद्यालय के निर्माण के आंदोलन शुरू होने लगे थे। ऐसे समय में शमशेर सिंह बिष्ट ने छात्र-युवाओं की अगुआई की। तब अल्मोड़ा महाविद्यालय आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध था। 1972 में वे छात्र संघ के अध्यक्ष रहे। शमशेर सिंह बिष्ट जी अगुआई में विश्वविद्यालय आंदोलन चला। अल्मोड़ा जेल का घेराव हुआ। गोली चली। दो छात्र शहीद हुये। 1973 मे कुमाऊं विश्वविद्यालय की स्थापना भी हो गई। वे विश्वविद्यालय की स्थापना के स्तंभ थे।

उनके समय में छात्रों ने जिस तरह से सामाजिक सवालों को उठाया वह हमारी युवा चेतना के आधार रहे हैं। इसी दौर में जब पूरे पहाड़ के जंगलों को बड़े ईजारेदारों को सौंपा जा रहा था तो युवाओं ने इसके खिलाफ हुंकार भरी। बिष्ट जी वन आदोलन की अगुवाई में रहे। पूरे एक दशक तक जंगलों की लूट के खिलाफ आंदोलन में जी-जान से लगे रहे। आपातकाल के खिलाफ भी उनके स्वर मुखर रहे। नैनीताल में वनों की नीलामी के लिये इकट्ठा हुये प्रशासन के खिलाफ जब नैनीताल क्लब आग के हवाले हुआ तो सारे छात्रों का नेतृत्व शमशेर बिष्ट कर रहे थे। आपातकाल के समय पहाड़ के युवाओं ने ‘उत्तराखंड युवा मोर्चा’ के नाम से संगठन बनाया। इस संगठन ने गांव-गांव जाकर राजनीतिक चेतना का काम भी किया। 1974 में ही असकोट-आरोकोट यात्रा की शुरुआत कर इन युवाओं ने अपनी वैचारिकता परिचय भी दिया। 1978 में उत्तराखंड संघर्ष वाहिनी की स्थापना हुई। बिष्ट जी इसके संस्थापकों में थे।

संघर्ष वाहिनी दो-तीन दशक तक पूरे पहाड़ के आंदोलनों और चेतना का नेतृत्व करती रही। वाहिनी ने अपना अखबार ‘जंगल के दावेदार’ निकाला। इस अखबार ने उस समय व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करने का काम किया। 1980 में इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी के बाद जिस तरह की राजनीति अपने पैर पसारने लगी उससे पहाड़ भी अछूता नहीं रहा। इस दौर में 1984 में ताड़ीखेत में ब्रोंच फैक्टरी का आंदोलन चला। इसमें संघर्ष वाहिनी का नेतृत्व शमशेर जी ने किया। इसी वर्ष ‘नशा नहीं रोजगार दो’ आंदोलन चला। तराई में जमीनों को लेकर कोटखर्रा, पंतनगर, महातोष मोड़ कांड से लेकर जितने भी छोटे-बड़े आंदोलन चले शमशेर जी उनकी अगुआई में रहे। संघर्ष वाहिनी की अगुआई में भ्रष्टाचार के प्रतीक कनकटे बैल, हिमालयन कार रैली रोकने, जागेश्वर मंदिर की मूर्तियों की चोरी, जल,जंगल जमीन के जितने भी आंदोलन चले उनमें हर जगह उनकी भूमिका रही।

उत्तराखंड राज्य आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। आखिरी समय तक वे गैरसैंण राजधानी के आंदोलन का मार्गदर्शन करते रहे। देश-दुनिया की कोई भी हलचल ऐसी नहीं थी जिससे डाॅ. बिष्ट अछूते रहे। वे देश के हर कोने में जाकर जनता की आवाज को ताकत देते रहे। उनका देश के हर आंदोलन से रिश्ता था। पहाड़ ही नहीं देश के हर हिस्से के आंदोलनकारी शमशेर जी का सम्मान करते थे। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने जतना के सवालों को बहुत प्रखरता के साथ रखा।

अभी शमशेर जी पर इतना बहुत संक्षिप्त सा है। अभी मेरी ज्यादा कुछ समझ में भी नहीं आ रहा है कि कहां से शुरू करूं। पूरी श्रंखला बाद में उन पर लिखूंगा। फिलहाल उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये इतना कहना चाहता हूं कि शमशेर जी का फलक बहुत बड़ा था। वे अल्मोड़ा जनपद के सुदूर चैकोट (स्याल्दे) के तिमली गांव से निकलकर जिस तरह अपना व्यापक आधार बनाते गये वह सब लोगों के लिये प्रेरणाप्रद है। हमारे लिये तो वे हमेशा पथप्रदर्शक की भूमिका में रहे। आंदोलन के लोग जब भी किसी दुविधा में हों शमशेर जी ही रास्ता सुझाते। सबसे बड़ी बात यह थी कि उनमें कभी किसी प्रकार का काम्पलेक्स हम लोगों ने नहीं देखा। वे नये लोगों से भी बराबरी में बात करते थे। पिछले दिनों जब अल्मोड़ा में हम लोग उनसे मिले तो लग नहीं रहा था कि वे हमें छोड़कर चले जायेंगे। लेकिन अब हमारे हाथ में कुछ नहीं है। इतना ही है कि हम आपके तमाम संघर्षो को मंजिल तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे। आपने हमें सामाजिक-राजनीतिक मूल्यों के साथ खंड़े होने की जो चेतना दी है वह हमेशा हमारा मार्गदर्शन करेगी।

@लेखक वरिष्ठ पत्रकार है।

RELATED ARTICLES

आम मुद्दों पर नीतिगत शोध प्रबंध अब्बल, हावर्ड विश्वविद्यालय ने दिया प्रमाणपत्र।

आम मुद्दों पर नीतिगत शोध प्रबंध अब्बल, हावर्ड विश्वविद्यालय ने दिया प्रमाणपत्र। By - Prem Pancholi  सीमांत जनपद उत्तरकाशी के पोरा गांव की प्रतिभाशाली युवती कुमारी...

अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा और अन्य राष्ट्रपतियों के बारे राय रखते वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुशवाह।

अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति के तौर पर अपना दूसरा और आखिरी कार्यकाल खत्म करने जा रहे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के बारे में...

कोटद्वार घटना : विश्वगुरु बनने के रास्ते एक और रोड़ा।

By - Prem Pancholi   कोटद्वार की घटना पर देश के भीतर ही कई सवाल खड़े हो गए है। जिस तरह से एक संगठन ने सिर्फ...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

होली विशेषांक : खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर।

- खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर। - दून पुस्तकालय में संगीताजंलि की शानदार होली प्रस्तुति दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में आज संगीतांजली शास्त्रीय...

बर्लोगंज एंड बियोंड पुस्तक का लोकार्पण

पुस्तक : बर्लोगंज एंड बियोंड   By - Dr. Yogesh dhasmana   देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो बी के जोशी के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक बर्लोगंज एंड बियोंड...

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में।

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में। By - Neeraj Uttarakhandi पुरोला विकासखंड के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में राष्ट्रीय...

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी।

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी। .......... दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में ‘स्पेक्स’ संस्था के सहयोग...

जनगणना की पूरी तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी जनगणना

जनगणना-2027 की डिजिटल तैयारियां शुरू, देहरादून में 25-27 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू चार्ज अधिकारियों से लेकर सेन्सस क्लर्क तक, सभी ले रहे डिजिटल...

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...