
मुंबई स्थित वाशी नामक स्थान पर उत्तराखंड सरकार का अतिथि गृह यानि उत्तराखंड भवन इन दिनों जिंदगी और मौत के दिन गिन रहा है। 64 करोड़ के बजट से निर्मित यह भवन अपने पांच साल भी पूरा नहीं कर पाया कि जर्जर हो चला है।
बता दें कि भवन के ग्राउंड फ्लोर से लेकर अंतिम मंजिल तक दरारें ही दरारें है। जिस कारण यह बहुमंजिला और बेशकीमती इमारत कभी भी गिर सकती है। यहां उत्तराखंड सरकार के कर्मचारी डर डर के अपनी अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। भवन में लगी लिफ्ट खराब हो गई है। मात्र एक ही लिफ्ट काम कर रही है। ग्राउंड और बरामदे में जहां जहां भारी दरारें पड़ी है वहां वहां, यहां तैनात कर्मचारियों ने गमले शिफ्ट किए हुए है ताकि बाहर से आने वाले अतिथियों को यह दरारें न दिखाई दे।
अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि कमरों में लगे टीवी और वाईफाई बंद पड़े है। बाथरूम में साबुन रखने तक की ट्रे नहीं है। मेहमानों को टॉवल तक नहीं दिया जाता है। मेहमानों को साबुन मिलना तो दूर की बात है।
विडंबना देखिए कि मुंबई में इस उत्तराखंड भवन में सरकार के मुलाजिम नहीं रुकते है और न उत्तराखंड सरकार के माननीय मंत्री यहां रात्रि विश्राम करते है। माननीय मंत्रीगणों को तो पांच सितारा होटल चाहिए। जबकि यह इमारत पांच सितारा के टक्कर की ही बनी हुई है।
वर्तमान में इस भवन को देखकर ऐसा लगता है कि 64 करोड़ का बजट खर्च करने के बाद भी यह भवन सिर्फ पांच साल में जर्जर हो गया है। यह सरकार के कामकाज पर सबसे बड़ा धब्बा है।
इधर उत्तराखंड भवन में व्यवस्थाधिकारी जगदीश पोखरियाल का कहना है कि उन्होंने इस भवन से संबंधित सभी समस्याएं शासन को भेज दी है। अब जाकर इस भवन का सुदृढ़ीकरण जल्द किया जा रहा है।







