Thursday, May 14, 2026
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बैगर्स फ्री होगा देहरादून, जिलाधिकारी ने स्वयं संभाली कमान

बैगर्स फ्री होगा देहरादून, जिलाधिकारी ने स्वयं संभाली कमान
देहरादून शहर को भिक्षावृत्ति से मुक्त करने के लिए देहरादून के दो अफसरो ने कमर कस दी है। चाइल्ड बैगिंग के साथ साथ अब व्यस्क भिक्षावृत्ति पर प्रहार की तैयारी में प्रशासन जुट गया है। यदि सब कुछ ठीक ठाक रहेगा तो आने वाले दिनों में देहरादून देश का पहला शहर होगा जहां भिक्षावृत्ति कहीं नजर नहीं आयेगी। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि इस अभियान की कमान स्वयं जिलाधिकारी देहराून और मुख्य विकास अधिकारी देहरादून ने संभाल ली है।

बताया जा रहा है कि इस अभियान से वे स्वयं जुड़ रहे है ताकि साल के अन्त तक बैगर फ्री देहरादून कहलायेगा। इसके लिए बाकायदा जिला प्रशासन देहरादून और बैगर कार्पाेरेशन लिमिटेड के मध्य एक समझौता हस्ताक्षर भी हुआ है। जिसके लिए भिक्षावृत्ति में लिप्त लोगों को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने की योजना है। खास बात यह है कि बैगर कार्पाेरेशन अन्य राज्यों के बड़े शहरों में भी यह अभियान संचालित कर रहा है। वैसे भी पिछले गत 03 माह से प्राजेक्ट को धरातल पर उतारने की कवायद तेज की गयी थी।

देहरादून जिले को भिक्षावृत्ति मुक्त करने हेतु डीएम सविन बंसल के नेतृत्व में जिला प्रशासन ने बैगर्स कार्पाेरेशन लिमिटेड के साथ एमओयू साईन कर दिया है। डीएम के निर्देशन में मुख्य विकास अधिकारी एवं जिला समाज कल्याण अधिकारी पिछले 03 माह से इस प्रोजेक्ट पर कार्य रहे थे, जो आखिरकार अब धरातल पर उतर गया है। इस प्रोजेक्ट की जिलाधिकारी स्वयं मॉनिटिरिंग कर रहे है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य भिक्षावृत्ति में लिप्त व्यस्क लोगों को कौशल विकास का प्रशिक्षण देकर मुख्यधारा यानि रोजगार से जोडते हुए उद्यमी बनाना है।

देहरादून के जिलाधिकारी सबिन बंसल ने स्वयं और अपनी जिला प्रशासन की टीम की ओर से बैगर्स कारर्पाेरेशन लिमिटेड का स्वागत किया। और कहा कि देहरादून को भिक्षावृत्तिमुक्त बनाने में जिला प्रशासन बैगर्स कारर्पाेरेशन लिमिटेड को पूरा पूरा सहयोग करेगा। बैगर्स कारर्पाेरेशन के प्रतिनिधियों ने भी जिला प्रशासन से इस मुहिम में सहयोग की अपेक्षा की है। कहा कि भिक्षावृत्ति में लिप्त व्यस्क लोगों को कौशल विकास का प्रशिक्षण देकर उन्हे रोजगार की तरफ मोड़ते हुए आत्मनिर्भर बनाने का एक बड़ा लक्ष्य है। इसके लिए जिला प्रशासन देहरादून भी प्रतिबद्ध दिख रहा है।

इस प्रोजेक्ट के माध्यम से भिक्षावृत्ति में लिप्त व्यक्तियों की पहचान करना और उन्हें कौशल विकास सेन्टर में भर्ती करके उनकी क्षमता का आंकलन करते हुए उन्हें स्वरोजगार की ओर प्रेरित करना है। भिक्षावृत्ति में लिप्त लोगों का व्यवस्थित रेस्क्ूय किया जायेगा और उन्हे चुने गए व्यवसाय उद्यम के आधार पर सिलाई, भोजन तैयार करना, हस्तशिल्प बनाना जैसे आवश्यक कौशल प्रदान किए जाएंगे। इस योजना के माध्यम से भिक्षावृत्ति में लिप्त लोगों को व्यवसाय सेटअप, विपणन और वित्तीय प्रबंधन के माध्यम से मार्गदर्शन करने के लिए मार्गदर्शक नियुक्त किया जाएगा। भिक्षावृत्ति से रेस्क्यू किए गए लोंगों को प्रशिक्षित करते हुए उनके उत्पाद विकास निर्मित सामग्री या स्थानीय शिल्प का उपयोग करके अद्वितीय उत्पाद बनाना, अक्सर टिकाऊ प्रथाओं पर ध्यान केंद्रित करना। बाजार तक पहुंच, होटल, दुकानों और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के साथ साझेदारी के माध्यम से उनके उत्पादों को संभावित ग्राहकों से जोड़ना।

इस अभियान की खास बात यह है कि उनके व्यवसाय को शुरू करने के लिए शुरुआती फंडिंग या माइक्रोलोन प्रदान करने आदि कार्य को बैगर्स कार्पाेरेशन द्वारा किया जाएगा।
बैगर्स कार्पाेरेशन लिमिटेड के सीईओ चन्द्र मिश्रा ने कहा कि जिलाधिकारी देहरादून के समाज कल्याण के कार्यो पर विभिन्न समाचार पत्रों एवं न्यूज चौनल में प्रसारित खबरो से वे प्रभावित हुए है। इसलिए डीएम देहरादून के साथ जुड़कर उन्हे कार्य करने की प्रबल अभिलाषा हुई। उन्होने जैसे ही जिला प्रशासन को यह प्रस्ताव दिया जिलाधिकारी देहरादून ने उनके इस प्रस्ताव को सहज ही स्वीकार किया है।

कुल मिलाकर यदि यह अभियान परवान चढ गया तो स्मार्ट सीटी के नाम से दाग दाग हो चुकी देहरादून की शाख वापस लौट सकती है।

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