Sunday, September 13, 2026
Home lifestyle पुण्यस्मृति : सुंदरियाल उद्योग मील का पत्थर साबित हुआ।

पुण्यस्मृति : सुंदरियाल उद्योग मील का पत्थर साबित हुआ।

जब हम रामनगर से होकर मरचूला से धूमाकोट की तरफ चलते हैं तो हमें एक जगह मिलती है- डुंगरी। इस गांव की कई खासियतें हैं।

By Charu Tiwari

नैनीडांडा विकासखंड या धूमाकोट का क्षेत्र आजादी के आंदोलन से लेकर कई आंदोलनों का गवाह रहा है। पंजारा और डुंगरी तो इसके गढ़ रहे हैं। फिलहाल हम डुंगरी सड़क पर लगे बोर्ड ‘सुंदरियाल प्रोडक्ट्स’ से भी इसे जानने लगे हैं। डुंगरी जैसी छोटी जगह में पच्चीस साल पहले विजय सुंदरियाल ने एक सपना देखा था, स्थानीय संसाधनों को अपनी आर्थिकी का आधार बनाने का। उन्होंने इस सपने को साकार करने के लिए स्थानीय फलों और जैविक उत्पादों पर आधारित एक छोटे से उद्योग की शुरुआत की। मंशा थी कि अपने घर पर ही रोजगार हो, गांव वालों का उनकी मेहनत का सही दाम मिले तो वह अपनी खेती भी करेंगे। युवाओं में स्वावलंबन का बोध भी होगा। इन सब बातों को समझते हुए उन्होंने लघु उद्यम के रूप में अचार, जूस, जैम, जैली जैसे उत्पाद बनाने शुरू किए, जिसे आज ‘सुंदरियाल प्रोडक्शन’ के नाम से सभी लोग जानते हैं। 1 जुलाई को विजय सुंदरियाल की पुण्यतिथि थी। हम सब अपने उस जीवट व्यक्तित्व को याद करते हुए श्रद्धांजलि देते हैं।

विजय सुंदरियाल के साथ हम लोगों का परिचय हालांकि पुराना था, लेकिन शायद वर्ष 2004-05 से ज्यादा नजदीकियां हुई। हम उन्हें एक फक्कड़, मनमौजी और बहुत ही मिलनसार व्यक्ति के रूप में जानते हैं। विजय सुंदरियाल ने 1998 के आसपास अपना स्थानीय उत्पादों पर आधारित जैविक उत्पाद का छोटा सा व्यवसाय शुरू किया। उस समय डुंगरी जैसी छोटी जगह में इस तरह की पहल को एक जोखिम ही माना जाता था। लोगों के लिए बुरांश का जूस और जैम-जैली जैसी चीजें नई थी। व्यवसाय की दृष्टि से तो किसी ने सोचा भी नहीं था। उनकी यह पहल रंग लाई। शुरुआत में भले ही उन्हें इसका बहुत बड़ा आर्थिक लाभ न हुआ हो, लेकिन उसने एक दूरगामी सफलता का रास्ता तो बना ही दिया था। तमाम नकारात्मक माहौल के बावजूद विजय सुंदरियाल ने अपना उद्योग लगाने का जोखिम उठाया जो अब एक अच्छे उद्योग के रूप में लोगों का सुपरिचित नाम हो गया है।

विजय सुंदरियाल ने अपना जीवन बहुत ही फक्कड़ और मनमौजी तरीके से बिताया। जीवन के प्रति बहुत लापरवाह और सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र में बहुत सक्रिय रहने वाले सुंदरियाल जी हर छोटे-बड़े सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल होते थे। अदालीखाल में आजादी के बाद ‘गणतंत्र का मेला’ लगता है। यह शायद भारत का पहला मेला होगा जो गणतंत्र दिवस पर आयोजित होता है। स्थानीय लोगों द्वारा किये जाने वाले इस मेले में वह भागीदारी करते रहते थे। एक बार उन्होंने बताया किया उनके गावं के ध्यानी जी ने इसी नाम से एक समाचार पत्र निकाला- ‘गणतंत्र प्रहरी।’ विजय सुंदरियाल की जिद थी कि वह एक बार उनके काम को याद करना चाहते हैं। तब मैंने 69 पृष्ठ का ‘गणतंत्र प्रहरी’ का एक अंक निकाला था। उसका लोकार्पण भी इसी मेले में किया गया। इसका पूरा खर्च भी सुंदरियाल जी ने ही उठाया। उन्होंने प्रतिवर्ष स्वरोजगार पर एक गोष्ठी का आयोजन भी कराना शुरू किया। अब उनके सुपुत्र मनीष अपने पिता की याद में हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर इस आयोजन को करते हैं।

विजय सुंदरियाल के सुपुत्र मनीष ने अपने पिता के रोपे पौंधे को अब एक वृक्ष का रूप दे दिया है। मनीष ने ‘सुंदरियाल प्रोडक्शंस’ को नई ऊंचाइयां दी हैं। उन्होंने अचार, जैम, जैली, जूस के अलावा सीजनल दालें और स्थानीय उत्पादों को अपने ब्रांड में शामिल किया है। विजय सुंदरियाल की प्रेरणा से मनीष ने भी अपने गांव में रहकर ही अपने काम को आगे बढ़ाकर स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने का काम किया है। मनीष एक सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। उत्तराखंड के हर आंदोलन और प्रतिकार की आवाज में शामिल रहते हैं। फिलहाल वह कांग्रेस के कार्यकर्ता के रूप में राजनीतिक क्षेत्र में हैं।

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