टमाटर का काला धब्बा रोग (बकाई रौट ) – कैसे करें रोकथाम।
Dr. Rajendra prasad kuksal
बकाई रौट (Buckeye Rot )
टमाटर में एक गंम्भीर समस्या है यदि समय पर रोग की रोकथाम के उपाय नहीं किए गए तो पूरी फसल नष्ट हो जाती है। यह रोग “फाइटोफ्थोरा” नामक कवक के कारण होता है, जो मिट्टी में पाया जाता है।
इस रोग के लक्षण फलों पर ही दिखाई देते हैं रोग ग्रस्त हरे फलों पर हल्के तथा गहरे भूरे रंग के गोलाकार धब्बे दिखाई देते हैं जो हिरण की आंख की तरह लगते हैं। रोगग्रस्त फल प्रायः जमीन पर गिर जाते हैं तथा सड़ जाते हैं। यह एक मृदा जनित रोग है जो बर्षात एवं अधिक नमी के कारण फैलता है।
प्रबंधन/रोकथाम:-
1. फसल चक्र अपनाएं। एक ही कुल की फसल एक स्थान पर लगातार न लें।
2.फसल लगाने से पूर्व खेत की तैयारी के समय 2-3 किलो ग्राम प्रति नाली की दर से खेत में चूना डालें।
3. खेत की तैयारी के समय ट्रायकोडर्मा से मृदा उपचार करें। फफूंदी जनित बीमारियों की रोकथाम हेतु एक किलोग्राम ट्राइकोडर्मा पाउडर को 25 किलोग्राम कम्पोस्ट (गोबर की सड़ी खाद) में मिलाकर एक सप्ताह तक छायादार स्थान पर रखकर उसे गीले बोरे से ढँकें ताकि ट्राइकोडर्मा के बीजाणु अंकुरित हो जाएँ। इस कम्पोस्ट को एक एकड़( 20 नाली) खेत में फैलाकर मिट्टी में मिला दें साथ ही एक नाली में 40 किलो ग्राम गोबर की खाद पांच किलो नीम की खली प्रति नाली की दर से प्रयोग करें ।
4. खेतों में पानी निकासी का उचित प्रबंध करें।
5. पौधों का रोपण उठी क्यारियों या मेड़ों पर करें ।
6. पौधों को सहारे पर सीधा खड़ा रखें, जिससे पत्तियां व फल जमीन को न छुएं। नीचे करीब आधा फुट तक की पत्तियों को निकाल दें।
7. खेतों में साफ-सफाई का ध्यान रखें और खरपतवार को समय-समय पर निकालते रहें।
8. सूखी घास/ पत्तियां या प्लास्टिक मल्चिंग का प्रयोग करें।
9. रोग ग्रस्त सड़े गले फलों को एकत्र करके गड्ढे में दबा दें।
10. रोग पर नियंत्रण के लिए रिडोमिल एम जैड 20 -25 ग्राम 10 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। इसके 8-10 दिन के अंतराल के बाद मैनकोजेव, (इंडोफिल) एम-45 दवा का 25 -30 ग्राम 10 लिटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें साथ ही स्ट्रेप्टोसाइक्लीन 1.5 ग्राम 15 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। इसमें 10 मिलीलीटर स्टीकर मिलाना भी आवश्यक है।
इसके अतिरिक्त बोर्डों मिश्रण, जिसमें नीला थोथा और चूना 80-80 ग्राम दस लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने से भी रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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