जनमैत्री संगठन नैनीताल द्वारा बावन डॉठ फतेहपुर (हल्द्वानी) में स्वच्छता अभियान चलाया गया। बावन डॉठ फतेहपुर का एक ऐतिहासिक स्थान और विरासत है। बावन डॉठ वाली नहर बनाकर अंग्रेजों ने लगभग 125 साल पहले 1920 के आसपास फतेहपुर गॉव तक सिंचाई की व्यवस्था उपलब्ध करवाई थी। यह नहर अपने स्थापत्य के लिए मशहूर है। अंग्रेजों द्वारा किए गए निर्माण इतने मजबूत थे कि आज भी यह नजर मजबूती के साथ खेतों में सिंचाई का पानी पहुॅचाने का कार्य कर रही है।
बावन डॉठ फतेहपुर में वन विभाग का रेंज कार्यालय और भाखड़ा नदी का तट भी जुड़ा हुआ है।जहॉ वन निगम अपनी गतिविधियॉ करता रहता है।
हल्द्वानी शहर के लोगों के लिए यह स्थान एकांत और प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर शांतिपूर्ण पर्यटक स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। यहॉ वन विभाग ने यात्री विश्राम स्थल भी बनाए हैं। पर्यटकों व स्थानीय घूमने वालों ने नदी के किनारे, विश्रामालय, जंगलों के किनारे प्लास्टिक कचरे, कॉच की बोतलें, गुटखा और नमकीन के रैपर बिखर कर इस स्थान को गंदगी से भर रहे हैं।
यह देखकर एक मंच के रूप में जनमैत्री संगठन ने पहले बेल, नाईसिला और अब बावन डॉठ फतेहपुर में सामुहिक श्रमदान करके जगह-जगह प्लास्टिक कचरे को साफ किया और लोगों को इसके बारे में जागरूक भी करने का प्रयास किया।
इसी क्रम में विभिन्न संगठनों के लोगों ने मिलकर सफाई, श्रमदान कर परिसर और उसके आसपास जंगल को स्वच्छ बनाया और लोगों के लिए एक बैनर लगाकर स्वच्छता का संदेश भी दिया।
कार्यक्रम का प्रारंभ पूर्व वनाधिकारी मदन बिष्ट ने गुलमोहर और हरड़ के पौधे लगाकर किया। उसके बाद मदन मेर पूर्व शिक्षक, कैलाश चंदोला शिक्षक, यतीश पंत पूर्व उप निदेशक, वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला, राजू सनवाल, राजेंद्र जोशी, पत्रकार डॉ भुवन तिवारी, पत्रकार अपूर्व पांडे, सामाजिक कार्यकर्ता भास्कर उप्रेती, सुभाष पंगरिया, बीज बिखेरो अभियान की हर्षिता रौतेला बुलबुल, राजेंद्र जोशी, प्रदीप कोठारी उत्तराखंड क्रांति दल नैनीताल के जिलाध्यक्ष प्रताप चौहान, श्याम सिंह नेगी, श्रीमती तृप्ता पांडे और वन विभाग के दरोगा, फोरेस्टर सहित अन्य कर्मचारियों ने मिलकर परिसर की सफाई की और प्लास्टिक कचरे को बोरों में भरकर एकत्र किया।
इस दौरान कार्यक्रम आयोजक जनमैत्री संगठन के संयोजक बची सिंह बिष्ट ने कहा कि हम धरती को माता मानते हैं। नदी , जंगल को वन देवियों और देवताओं का वास मानकर हमेशा श्रद्धा से देखते हैं। प्लास्टिक और दूसरे कचरे को देखकर लगता है कि हमारा व्यवहार सिर्फ ढोंग है। इस कचरे के निस्तारण की जिम्मेदारी न तो नगर निगम लेता है, न इसके लिए ग्राम पंचायत में व्यवस्था है, न वन विभाग इसे गंभीरता से रोकना चाहता है और न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इन बातों से कोई मतलब है।नागरिक मंच सिर्फ बिना साधन, संसाधनों के राज और समाज को जागृत कर सकते हैं।
बीज बिखेरो अभियान से जुड़े जगमोहन रौतेला ने कहा कि आज प्लास्टिक कचरे के कारण प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी गंभीर बीमारी का शिकार हो रहा है। अपनी अगली पीढ़ियों के लिए हम बेहद प्रदूषण युक्त परिवेश और गैर ज़िम्मेदार व्यवहार ही छोड़ रहे हैं। जिस किसी भी स्थिति में ठीक नहीं कहा जा सकता है।
भास्कर उप्रेती ने कहा कि हजारों – लाखों कुंतल जमा कचरे का निस्तारण कैसे हो? यह प्रश्न भी हमारे सामने है, क्योंकि सरकारी विभाग तो जवाबदेही लेते ही नहीं हैं। अपनी धरती, जंगल, मिट्टी-पानी और देश से अगर किसी को वास्तविक प्रेम होगा तो वह अपने परिवेश को स्वच्छ बनाने के लिए स्वयं पहल करेगा।
यतीश पंत ने कहा कि यह बड़ा सवाल भी सामने है कि जब सरकारों को मालूम है कि प्लास्टिक कचरे के कारण धरती, हवा, समुंदर तक प्रदूषित हो रहे हैं, इंसानी स्वास्थ्य लगातार खतरे में पड़ रहा है और जीव वनस्पतियों का अस्तित्व तक संकट में पड़ रहा है, तो प्रत्येक सरकार को चाहिए कि वह प्लास्टिक का उत्पादन सख़्ती से बंद कराए या उसका बेहद सीमित उपयोग सुनिश्चित कराए।
पूर्व वनाधिकारी मदन बिष्ट ने कहा कि आज घर, दुकानों में प्लास्टिक पन्नी, पैकेटों में बंद खाद्य और दूसरी सामग्री आ रही है। जिसका कचरा धरती, हवा, पानी, भोजन सब कुछ को प्रदूषित कर जहरीला बना रहा है, इसलिए अब प्लास्टिक उन्मूलन नागरिकों के जीवन का प्रश्न बन चुका है। एक नागरिक मंच के रूप में जनमैत्री संगठन निरंतर ग्राम पंचायतों, विभागों और जिम्मेदार लोगों को इस प्लास्टिक कचरे के उन्मूलन के लिए जागरूक करता रहेगा।
कार्यक्रम के अंत में पंत कैटर्स ऊंचापुल के जीवन पंत द्वारा वन भोज करवाया गया।








