Thursday, May 14, 2026
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पेड़ो पर बंधे रक्षासूत्र : गंगोत्री घाटी के लोग लामबंद, कहा नहीं कटने देंगे हरे देवदार के पेड़।

गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर झाला से भैरों घाटी के बीच में ऑल वेदर रोड के नाम पर कटने वाले देवदार के पेड़ों को बचाने के लिए रक्षा सूत्र बांधे गये है। यह निर्णय लिया गया कि ग्रामीण अब देवदार के इस अवैध पतन को बिल्कुल भी नहीं होने देंगे।

सुरेश भाई – प्रणेता रक्षासूत्र आंदोलन
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झाला से भैरों घाटी के बीच में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर कटने वाले देवदार के असंख्य छोटे-बड़े पेड़ों को बचाने के लिए “रक्षा सूत्र” बांधे गये। जबकि यह क्षेत्र भागीरथी इको सेंसेटिव जोन के रूप में भी चिन्हित किया गया है।
इस अवसर पर स्थानीय लोग और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ मुरली मनोहर जोशी, पूर्व राजदूत डॉ कर्ण सिंह जी के निर्देशन पर हर्षिल के आसपास “रक्षासूत्र आंदोलन” की आवाज बुलंद होती दिखाई दी है। इस कार्यक्रम के लिए उत्तराखंड के किसान नेता भोपाल सिंह चौधरी और उत्तराखंड के अन्य साथियों ने 27 नवंबर 2025 को इंडिया हैबिटेट सेंटर में हुए एक सम्मेलन के दौरान यहां पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधने के लिए आमंत्रित किया।


ज्ञात हो कि यहां पर पहले भी दो बार देवदार के पेड़ों को बचाने के लिए रक्षा सूत्र आंदोलन किया गया है। जिसका नेतृत्व समय-समय पर हर्षिल की पूर्व प्रधान बसंती नेगी, सुखी गांव के पूर्व सैनिक मोहन सिंह राणा, ग्लेशियर लेडी शांति ठाकुर, पर्वतारोही डॉ० हर्षवंती बिष्ट के द्वारा दुर्लभ प्रजाति देवदार के पेड़ों के व्यावसायिक दोहन को रोकने के लिए रक्षा सूत्र बांधे गये थे। प्रसिद्ध समाजसेविका राधा बहन भी 2017 में सुखी गांव पहुंची थी। जहां सुखी गांव की महिला मंगल दल ने ऑल वेदर रोड के कारण काटे जाने वाले देवदार के पेड़ों को बचाने के लिए रक्षा सूत्र बांधे थे।


7 दिसंबर 2025 के रक्षासूत्र आंदोलन में भारत के अनेक हिस्सों से लोग हर्षिल पहुंचे। यहां गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगभग 100 मीटर की चौड़ाई तक पेड़ो पर लगाये गये निशान को देखकर लोग चिंता में पड़ गये। क्योंकि यहां पर 10-11 मीटर तक सड़क चौड़ीकरण के लिए इतनी अधिक चौड़ाई में देवदार के घने पेड़ों को काटने का औचित्य किसी के भी समझ में नहीं आया है। पेड़ों पर निशान 2016 के बाद लगाए गए थे। तब सड़क की चौड़ाई 18 से 24 मी० तक प्रस्तावित थी। इसके बाद विभिन्न पर्यावरणीय दबाव के चलते सड़क को 10 से 12 मीटर चौड़ी कर दी गई। लेकिन दुख इस बात का है कि सड़क की चौड़ाई कम करने के बाद भी पेड़ों का कटान 18 से 24 मी० चौड़ी सड़क के अनुसार ही करने की योजना है।


5 अगस्त 2025 को खीर गंगा, तिल गाड़, भेला गाड़, लोध गाड़, लेमचा घाट इसी से जुड़े हुए हैं। जहां पर भारी जल सैलाब से दर्जनों जिंदगियां समाप्त हुई है। इसके बावजूद भी देवदार के पेड़ों को बचाकर सड़क सुधारीकरण की अभी तक सरकारी मंश स्पष्ट नहीं हुई है। इस ऊंचे हिमालय क्षेत्र में जहां मजबूत और टिकाऊ सड़क की आवश्यकता है। जिसमें दो गाड़ियां आसानी से चल सके ऐसी लगभग 6 मीटर चौड़ी सड़क की मांग की जा रही हैं।

यहां पर सैकड़ो लोगों ने आकर देवदार के पेड़ों को बचाने की शपथ ले ली है। डॉ० मुरली मनोहर जोशी का संदेश भी लोगों ने इस अवसर पर सुना। उन्होंने रक्षासूत्र बांधने वाले सभी लोगों को बधाई दी और कहा कि हिमालय हमारा पिता है और भारत हमारी माता है। इसलिए माता और पिता की रक्षा के लिए और उसमें गंगा का जल प्रवाह बना रहे। इसके लिए देवदार के पेड़ों को बचाना बहुत जरूरी है।

दिलचस्प यह है कि हिमालय बचाने की इस मुहिम में शामिल होकर जो संदेश दे रहे हैं उन्होंने ने ही केंद्र सरकार को समझाना होगा। डॉ० मुरली मनोहर जोशी के संदेश को पढ़ने के बाद उपस्थित लोगों ने अलग-अलग चर्चा में बताया कि उन्हें केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय में जाकर पेड़ों को बचाने की पहल करनी पड़ेगी।
महिला नेत्री कल्पना ठाकुर ने इस अवसर पर कहा कि गंगा और हिमालय की रक्षा के लिए देवदार के पेड़ ग्लेशियरों की रक्षा कर रहे हैं।पेड़ों के इस महत्वपूर्ण योगदान को नकारना गौमुख ग्लेशियर के लिए सबसे बड़ा खतरा होगा। सड़क को इतना मजबूत और टिकाऊ बनायें जिससे भविष्य में आपदा से भी बचा जा सके और भागीरथी मैं जमा हो रहे मलवे को ध्यान में रखकर निचले क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए हिमालय में ऐसा विकास न हो जिससे आफत की स्थिति खड़ी होती है। इस अवसर पर उत्तरकाशी की प्रसिद्ध समाज सेविका गीता गैरोला ने रक्षा सूत्र के गीत गाये। उनके साथ सभी ने अपनी अपनी आवाज बुलंद की भविष्य में उनका संकल्प है कि वह पेड़ कटने नहीं देगी। इसी तरह मंदाकिनी घाटी से प्रसिद्ध क्रांतिकारी महिला नेत्री सुशीला भंडारी ने उपस्थित लोगों का आह्वान किया की हिमालय की अच्छी सेहत के लिए यहां के शेष बचे जंगल का संरक्षण करना बहुत जरूरी है। इस कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और गंगा भक्त श्री हेमंत ध्यानी जी ने किया। सुखी के लोगों ने रक्षा सूत्र बांधने वाले लोगों को अपने गांव में भोजन भी कराया। गांव के पूर्व सैनिक मोहन सिंह राणा ने उपस्थित जनों का स्वागत किया।

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