– गलगोटिया को क्यों गरिया रहे हो? …उसकी क्या गलती है – वो बेचारे तो डंका बजा रहे थे।
By – Prabhat Dabral
सवाल ये नहीं है कि इतना बड़ा फ़्रॉड सरकारी तंत्र पकड़ क्यों नहीं पाया. सवाल ये है कि इतना बड़ा फ़्रॉड करने की हिम्मत कैसे हो गई।
इसीलिए न कि झूठ और फरेब इस सत्ता का स्थाई भाव बन गया है. हर कोई “डंका बजाने “ में एक दूसरे से होड़ ले रहा है. सब जानते हैं कि झूठ बोलना अब शर्म की बात नहीं रही.
पूरा सत्ता प्रतिष्ठान झूठ और फरेब की बुनियाद पर टिका दिया गया है.
जिस देश में प्रधानमंत्री ग़ाज़ियाबाद में एक चाय वाले को गंदे नाले की गैस से चाय बनाते अपनी आँखों से देख रहे हों …
जहां का रेलमंत्री बेशर्मी से कह रहा हो कि जिस रफ़्तार से हमारी बुलेट ट्रेन बन रही है उसे देखकर जापानी भी आश्चर्यचकित हो रहे हैं….
जहाँ पौराणिक दैवी चमत्कारों को विज्ञान की उपलब्धि बताया जा रहा हो …
जहाँ का मीडिया पाकिस्तान के “शहरों पर बमबारी और क़ब्ज़े “ की ख़बरें लाइव दिखा रहा हो …
जहां के नेता विदेशी चश्मा, घड़ी, जूते, बेल्ट पहनकर स्वदेशी का राग अलाप रहे हों..
जहाँ गौहत्या पर प्रतिबंध का राग अलापते हुए गौमांस निर्यात के कीर्तिमान गढ़े जा रहे हों…
जहाँ की बड़ी बड़ी कंपनियां चीन / कोरिया से मंगाए कल पुर्जे जोडकर “मेड इन इंडिया “ का राग अलाप रही हों..
वहां ये मामूली सा झूठ क्या मायने रखता है … भाई ने कुंए में ही भाँग डाल दी है.







