Friday, March 6, 2026
Home crime निदेशक कुठाई कांड : निगोसियों का उजाड़कुटू बल्द, पढ़े एक रिपोर्ट।

निदेशक कुठाई कांड : निगोसियों का उजाड़कुटू बल्द, पढ़े एक रिपोर्ट।

विधायक उमेश शर्मा काऊ की हरकते समाज में अराजकता का इशारा। पढ़े पूरी रिपोर्ट।

 

By – Prem Pancholi

 

कार्यालय में धमक जाओ और मार कुठाई कर दो। इसी को दूसरे नजर से देखें, कि यदि कोई भी नागरिक किसी कार्य हेतु कार्यालय में पहुंचता है और बिना कार्य उन्हें बैरंग लौटाया जाता है। यह दोनों प्रवृतियां काम की संस्कृति पर भ्रष्टाचार का काला धब्बा है। जो समाज को पीछे धकेल रहा है। यही हालात अपने राज्य में लगातार बनते जा रहे है।

अभी बीते दिन भाजपा से रायपुर के विधायक उमेश शर्मा काऊ ने अपने सहयोगियों के साथ निदेशक माध्यमिक शिक्षा के दप्तर में गए और मार कुठाई करके वापस आ गए। कुछ घंटों बाद खबर आई कि विधायक ने माफी मांग ली है।

आप और हम मिलकर सोचें कि यह प्रवृति कितनी सही है? प्रश्न इस बात का है कि जब आप चुने हुए विधायक है। तो क्या माननीय की बात सदन और सरकार नहीं सुनती? यदि नहीं सुनती है तो मान लीजिए कि अराजकता सरकार की तरफ से हो रही है। यह पहला वाकया होगा जब किसी विधायक की बात सरकार नहीं सुनती और यह माननीय सीधे कार्यालय में जाकर अधिकारी पर जानलेवा हमला कर देते है। इस हमले में कुछ एक ऐसे नाम भी सामने आ रहे हैं जिनका नाम रायपुर थाने में मोस्ट वांटेड सूची में दर्ज है। इससे ऐसा लगता है कि यह विधायक साहब समाज में गुंडागर्दी को महत्व दे रहे है।

 

वापस उनके सवाल पर आते हैं कि उनकी विधानसभा के अंतर्गत एक विद्यालय का नाम परिवर्तन होना है। इसको लेकर वे संबंधित अधिकारी पर हमलावर हो गए। इन विधायक को कौन समझाए कि आज तक कौनसा ऐसा कार्य हुआ है जो हमला करने से संपन्न हुआ है? उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि अमुक गांव के लोग संबंधित विभाग को एक प्रस्ताव अपने ग्राम प्रधान के मार्फत प्रस्तुत करेंगे कि उनके गांव की स्कूल का नाम परिवर्तन होना है। उक्त स्कूल के प्रधानाचार्य भी इस प्रस्ताव को प्रेषित करेंगे। उसके बाद इसी माननीय का कार्य बनता है कि इस प्रस्ताव को वे या तो कैबिनेट अथवा सदन में ले जाएं या स्वयं इस प्रस्ताव को विभाग के प्रमुख, अथवा प्रमुख सचिव के अलावा मुख्य सचिव और संभव हो तो मुख्यमंत्री तक पहुंचाए। ऐसा करने के बाद यदि निदेशक स्तर का अधिकारी इस पर प्रश्न खड़ा करते हैं तो यह “कार्य संस्कृति” पर सबसे बड़ा भ्रष्टाचार माना जाएगा। इससे भी आगे और कई संवैधानिक प्रक्रिया है जिसे रायपुर के विधायक उमेश शर्मा नहीं कर पाए या नहीं जान पाए अथवा नहीं करना चाहते थे। और सीधे निदेशक की मार पिटाई पर उतर आए।

राज्य में जिस तरह से भ्रष्टाचार की परतें खुल रही है और इससे भी आगे सत्ता में चूर जनप्रतिनिधि अधिकारी की जान पर उतर आते है यह इस देश के संविधान का सबसे बड़ा “अपमान” कहा जाएगा।

 

ताज्जुब इस बात का है कि यदि जनप्रतिनिधि का कार्य अधिकारी, कर्मचारी नहीं कर रहे है तो ये किसका कार्य कर रहे हैं? इससे तो यही लगता है कि सरकारी विभागों के कर्मचारी अधिकारी डरे हुए है या उन्हें कार्य नहीं करने दिया जा रहा है।

 

शिक्षा विभाग के निदेशक की मार पिटाई पर गौर करेंगे तो सरकार की यह सबसे बड़ी कमजोरी सामने आई है कि ऐसे जनप्रतिनिधियों को “कार्य की संस्कृति” नहीं सिखाई गई। अब लोगो में ऐसा भी संदेह पैदा हो रहा हैं कि विधायक उमेश शर्मा काऊ चुनाव के दौरान क्या इसी तरह की गुंडागर्दी करके वोट बटोरते होंगे? कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है।

 

कुलमिलाकर यही कहा जाएगा कि निदेशक माध्यमिक शिक्षा विभाग की जो कार्यालय में जाकर मार पिटाई की गई है वह इस लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। इसलिए कि हिंसा कभी भी समाधान नहीं रहा है। वैसे उमेश शर्मा काऊ यदि सनातन की बात करेंगे तो वे यह भी बताएंगे कि सनातन में हिंसा या बलपूर्वक कार्य करवाना समाधान है। जबकि सनातन में भी हिंसा के लिए कोई स्थान ही नहीं दिया गया है। इसी तरह अपने देश के संविधान में हिंसा को मानवाधिकार के खिलाफ षडयंत्र करत दिया गया है। ऐसे करने पर सजा और दंडात्मक कार्रवाई की व्यवस्था है। इसके अलावा यदि लोक सेवक अथवा जनप्रतिनिधि इस तरह की आतंकित व्यवहार में पाया जाता है तो उसे उस सदन से भी निष्कासित या हटाया जा सकता है। विधायक उमेश शर्मा काऊ की हरकते बीते दिनों निदेशक शिक्षा विभाग के कार्यालय में सहयोगियों सहित सामने आया है, जिस पर सरकार और विधानसभा अध्यक्ष चुप्पी साधे हुए है। जो भविष्य के लिए खतरा बन सकता है।

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