Sunday, September 13, 2026
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एक शाम : ‘बत्तीस राग गाओ मौला’

‘बत्तीस राग गाओ मौला’

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@Dr Nandkishor Hatwal

कल शाम खास थी। अवसर था दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र ( DOON LIBRARY & RESEARCH CENTRE) के सभागार में हरिसुमन बिष्ट के उपन्यास ‘बत्तीस राग गाओ मौला : कवि चित्रकार मौला राम का अधूरा किस्सा’ पर आयोजित चर्चा के साथ लेखक से मिलना और उनके रचना संसार से परिचित होना।

Workshop
Workshop

डॉ. हरिसुमन बिष्ट हिंदी के सुपरिचित रचनाकार हैं। आपने उपन्यास, कहानी, नाटक एवं यात्रा साहित्य के साथ-साथ गीत और सिनेमा के लिए पटकथा भी लिखीं। आपके अब तक 7 उपन्यास : ममता, आसमान झुक रहा है, होना पहाड़, आछरी माछरी, बसेरा, भीतर कई एकांत, अपने अरण्य की ओर, 5 कहानी संग्रह : सफेद दाग, आग और अन्य कहानियाँ, मछरंगा, बिजूका और अन्य कहानियाँ, हरिसुमन बिष्ट की चुनी हुई कहानियाँ, 2 यात्रा वृतान्त : अन्तरयात्रा और नील के आर पार, 4 नाटक : आछरी माछरी, दिसम्बर 1971 का एक दिन, प्रेक्षागृह तथा लाटा प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ. हरिसुमन बिष्ट की रचनाओं का अंग्रेजी सहित भारतीय भाषाओं में अनुवाद तथा नाटकों का मंचन भी हो चुका है। आपको अब तक मध्यप्रदेश राष्ट्र भाषा प्रचार समिति सम्मान, हिंदी भवन, भोपाल, विजय वर्मा कथा सम्मान, मुम्बई, अखिल भारतीय रामवृक्ष बेनीपुरी साहित्य सम्मान, हजारीबाग, झारखंड, सृजन गाथा डाटकाम, मिस्र, उत्तराखंड फिल्म कलाकार संगठन, दिल्ली का लोकसाहित्य सम्मान, मोहन उप्रेती लोक संस्कृति कला एवं विज्ञान शोध समिति सम्मान, उत्तराखंड, बालसाहित्य संस्थान सम्मान, उत्तराखंड। आंतोन चेखव सम्मान, मास्को, पर्वतीय कला केंद्र सम्मान दिल्ली और एथेंस में गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान, से नवाजा जा चुका है। डॉ. हरिसुमन बिष्ट हिन्दी भाषा साहित्य के एक लोकप्रिय साहित्यकार हैं। उन्होंने अपने सरोकारों और संवेदनाओं से भरी कृतियों से अपना आकाश बनाया है।

Maula
Maula

‘बत्तीस राग गाओ मौला’ कवि, चित्रकार मोला राम के जीवन के एक विशेष कालखण्ड और उनके जीवन के कुछ अंशों पर लिखा गया उपन्यास है। लेखक पुस्तक की भूमिका में लिखते हैं, ‘‘गढवाल़, कुमाऊँ और नेपाल के सामाजिक-सांस्कृतिक संबंधों, सरोकारों के इतिहास के उस कालखंड को समझा और समझाया जा सकता है। इसलिए मोला राम के जीवन के उस आधा सच को जितना मैं समझ पाया हूँ, मुझे महत्त्वपूर्ण लगा। उसे अपने इस कार्य में मैंने शामिल किया है, जो किसी भी तरह से इतिहास और उसके प्रमाणित होने का दावा नहीं करता। मैं इतिहास का विद्यार्थी नहीं रहा। गल्फ लिखता हूँ। यह मेरा गल्फ ही है, जिसे लिखने में मोला राम ने परोक्ष रूप में सहायता की है। कई बार मुझे लगा, मोला ही हैं, जो घटनाओं को लिखवा रहे हैं-मेरी स्मृति में संजो भी रहे हैं। मैं जानता हूँ, यह यथार्थ नहीं हो सकता।’’

कवि, रंगकर्मी और आकाशवणी में उद्घोषक भारती आनंद के सधे हुए संचालन के साथ यह आयोजन विद्वान चर्चाकारों- सुप्रसिद्ध कवि लीलाधर जगूड़ी, कथाकार नवीन कुमार नैथानी, कवि प्रो. शैलेय, साहित्यकार प्रो. धीरेन्द्रनाथ तिवारी, साहित्यकार डॉ. सविता मोहन एवं रंगकर्मी, निर्देशक सुवर्ण रावत के सारगर्भित वक्तव्यों के माध्यम से इस उपन्यास को जानने समझने का अवसर भी था। इस मौके पर इतिहास के उस कालखण्ड से गुजरते हुए गोरख्याणी में हुए अत्याचारों के विवरणों के साथ कवि चित्रकार मौला राम के कुछ अन्य महत्वपूर्ण पक्षों को जानना-समझना भी हुआ और चाय-बिस्किट के साथ जो चर्चाएं हुई सो अलग।

ग्रीष्म कला उत्सव के आयोजन में इस प्रकार के कार्यक्रमों के लिए दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के लिए धन्यवाद देना तो बनता है।

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