केदारनाथ विधानसभा का उप चुनाव होने जा रहा है। तीथि तय नही है। पर राजनीतिक दल अभी से कमर कसने लग गये है।

केदारनाथ की विधायक शैलारानी रावत की मृत्यु के बाद खाली हुई केदारनाथ विधान सभा में होने वाले उप चुनाव की तैयारी में भाजपा और कांग्रेस जुट गई है। जबकि उतराखण्ड क्रान्ती दल के पास कोई खास जनाधार नहीं है मगर वह भी इस चुनावी समर में गोते लगाने के लिए आतुर दिख रहे है। हाल यह है कि इन पार्टीयो में खांटी और कद्दावार नेता सभी उम्मीदवारी जताना चाहते है। हालांकि कुछ नेता सीधे मीडिया के मार्फत इजहार कर चुके हैं और कुछ नेता अपनी अपनी पार्टी फोरम पर उम्मीदवारी का आवेदन कर चुके है। इस तरह केदारनाथ विधानसभा उप चुनाव में कौन होगा आगामी विधायक यह कहना थोड़ा कठीन है। पर यहां मैं बता दूं कि भाजपा काग्रेस और उतराखण्ड क्रांती दल में मौजूद बड़े बड़े धुरन्धर नेता इस बार अपनी किस्मत जरूर अजमायेंगे।

अब यह देखना होगा कि राजनीतिक पार्टीयां किसको चुनाव मैदान में उतारती है। यह भी समय के गर्त में है। फिलहाल केदारनाथ की विधायक स्व॰ शैलारानी रावत की बेटी ऐश्वर्य रावत कह चुकी है कि उसे राजनीति विरासत में मिली है। वह भाजपा की सक्रीय कार्यकर्ता भी है। भाजपा में कुछ माह पहले शामिल हुए व्यवसायी और निर्दलीय चुनाव लड़ चुके कुलदीप रावत भी केदारनाथ उप चुनाव में फिर से अपनी दमदार दावेदारी बता रहे है। जबकि भाजपा से महिला मोर्चा की अध्यक्ष आशा नौटियाल भी इस बार के उप चुनाव को चूकना नहीं चाहती है।

इधर कांग्रेस में भी खूब घमासान होने के आसार दिख रहे है। पूर्व विधायक मनोज रावत कांग्रेस के प्रबल दावेदार बताये जा हैं। किन्तु हाल ही में पूर्व मंत्री डा॰ हरक सिंह रावत भी कांग्रेस के बैनर पर चुनावी मैदान में उतरने का बयान दे गये है। इस तरह गाहे बगाहे उतराखण्ड क्रांती दल भी क्यों पीछे रहेगा। यूकेडी ने भी डा॰ आशुतोष भण्डारी पर दाव लगाना उचित समझा है। अन्य पार्टीया अभी चुपी साधे हुए है।
यहां कयास लगाये जा रहे हैं कि भाजपा में केदारनाथ उपचुनाव के लिए दो धड़े सामने आ रहे है। एक धड़ा साहनुभूति के नाम पर लोगों से मतदान करवाना चाहते है। इसलिए वे केदारनाथ की विधायक स्व॰ शैलारानी रावत की बेटी ऐश्वर्य रावत को मैदान में उतारेंगे। एक धड़ा कह रहा है कि इस उप चुनाव में सक्रीय और पुराने कार्यकर्ताओं में से किसी को इस उप चुनाव में मौका दिया जायेगा।

इसी तरह कांग्रेस में भी डा॰ हरक सिंह रावत के बयान आने के बाद संकट पैदा हो गया है। कांग्रेस में भी दो धड़े सामने आ रहे है। एक धड़े का नेतृत्व कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पसंदीदा उम्मीदवार केदारनाथ के पूर्व विधायक मनोज रावत है। जबकि दूसरा धड़ा डा॰ हरक सिंह रावत को पुष्ट कर रहा है। सूत्रो के हवाले से बताया गया कि जिस नेता की गांधी परिवार से नजदिकी होगी उसी नेता का चहेता इस उप चुनाव में किस्मत अजमायेगा।
इससे अधिक स्पष्टता भाजपा की दिख रही है। आरएसएस के पसंदीदा कार्यकर्ता ही इस उपचुनाव में प्रतिभागी होगा। जो भी हो, इतना तो तय है कि यहां कांग्रेस व भाजपा में टक्कर नहीं है बल्कि आरएसएस और गांधी परिवार में टक्कर आमने सामने दिखाई दे रही है।
अभी हाल ही में हुए चुनावो में धार्मिक प्रतिष्ठाानो के नाम से प्रचलित विधानसभा और लोक सभा की सीटों पर भाजपा को हार का सामना देखना पड़ा है। हिन्दू का अकेले राग अलापने वाली भाजपा इन दिनो उन जगहो पर मात खा रही है जो हिन्दूओं के धार्मिक स्थल है। यह सवाल देशभर में खड़ा हो गया है कि क्या भाजपा हिन्दूओ का बेसुरा राग गा रही है। यदि यह बेसुरा राग केदारनाथ विधानसभा के उप चुनाव में सामने आया तो एक बार भाजपा को फिर से अपना मूल्यांकन करना होगा।

यही हाल कांगेस के है। कांग्रेस में केदारनाथ उप चुनाव को लेकर जो दरारे दिख रही है, यदि इस चुनाव में वे नहीं पाटी गई तो कांग्रेस भी किसी खतरे से खाली नहीं है।
कुल मिलाकर जनता का रूझान इस बार कुछ और दिखाई दे रहा है। धड़ेबाजी, जातिवाद और धर्म के नाम से ऊपर उठकर जो चुनाव में मैदान में होगा वही केदारनाथ का नेतृत्व करेगा।
वैसे भी केदारनाथ विधानसभा का अपना इतिहास रहा है। केदारनाथ आपदा के दौरान भाजपा ने कांग्रेस की जो पोल खोली उससे जनता ने इत्तिफाक न रखते हुए अपने अनुसार मतदान किया है। इस बार तो केदारनाथ मंदिर और चर्चाओ में है। कोई सोना चोरी करने वाले का खुलासा करेगा तो कोई केदारनाथ यात्रा की अव्यवस्थाओं पर मुखर रहेगा। जो भी हो, केदारनाथ विधानसभा के उप चुनाव की अब तक कोई तीथि तय नहीं हुई है। पर राजनीतिक दल अभी से बयानबीर बनने लग गये है।







