गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी जीवन के 75 वें वर्ष (हीरक जयन्ती) रचनाकर्म को 50 वें वर्ष (स्वर्ण जयन्ती) में प्रवेश कर गए हैं।
@Dr. Nandkishor hatwal
इस अवसर पर नेगीजी को बधाई और शुभकामनाएं कि आपकी रचना यात्रा इसी उर्जा, इसी जनपक्षधरता और संवेदनशीलता के साथ आगे भी जारी रहे।
रेडियो से शुरू गीतयात्रा,
कैसेट-टेपरिकार्डर, सीडी और मंचों
यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम तक
किताबों, पत्र-पत्रिकाओं,
डिजिटल माध्यमों में पहुंच गए हैं
नेगी जी के गीत।
पूरी दुनिया में फैले हैं
बुद्धिजीवियों से श्रमजीवियों तक
गांव के किसान, पशुपालक, घसेरी-पंदेरी
बच्चे से बूढ़ों तक
सबके दिलों पर राज करते
चार पीढ़ियों तक फैले हैं
नेगी जी के गीत।
खैरि से लेकर खुशी के गीत
प्रेम और विद्रोह के गीत
जनगीत, राजनैतिक, सामाजिक चिंताओं के गीत
भ्रष्टाचार के खिलाफ
व्यवस्था को आयना दिखाते
पाखण्डों-ढकोसलों,
अंधविश्वासों-कुरीतियों पर चोट
प्रकृति-पर्यावरण, विकास, विनास,
सौन्दर्य, विद्रूप, दुख, दर्द, विरह, वेदना,
व्यथा, ममता, होली, दिवाली, नवरात्रे,
राजजात, बसन्त, बसग्याल, ह्यूंद,
स्त्री विमर्श, गंगा, हिमालय,
पालायन और प्रवर्जन
भांति-भांति विषयों के गीत
धागुला जेवर छणमणाते
रूमा-झूमा कौतीख जाते
प्रेम के अनगिनत रूप दिखाते
विविध रंगों में रंगे
नायक-नायिकाओं के गीत।
कठोर जीवन से संघर्ष करती
जीवट स्त्रियों के गीत
आन्दोलनकारी, भ्येलु पखाणु जाती
कभी सीला पाखु और कभी तैला घाम भटकती
सैरा बस्ग्याल बौंणु मा घूमती, क्वो ढूंगो नि पूजी और क्वो खैरि नि खायी, बाळा स्ये जा दू का अनुनय विनय करती, दिल्ली वाले द्यूर से, संवाद करती बौजी के गीत।
म्वोरि-म्वोरि कि मांड प्येल्या के बूढ़े
चली भै मोटर चली के डलैबर भैजी
ढेबरा-बाखरा हर्चि गैनि वाला पालसी दिदा
नयु-नयु ब्यो के बाद ब्योलि को
उकाळ का बाटा ले जाने को मजबूर ब्योला
दारू नि प्योनु मी हे राम राम रम्म, रम्म रम्म,
वाले समाज सुधारक और नेता भायी साब!
अर हाथन हुसकि पिलायी वाले वोटर भैजी के गीत।
कालजयी गीत, बेजोड़ संगीत से सजे
नरेन्द्र सिंह नेगी के गीत।
जीवन के 75 वें वर्ष (हीरक जयन्ती) और रचनाकर्म के 50 वें वर्ष (स्वर्ण जयन्ती)







