Sunday, September 13, 2026
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हिंदी फिल्म “टिंचरी माई द अनटोल्ड स्टोरी” का पोस्टर लॉन्च

एन० एन० प्रोडक्शन द्वारा निर्मित हिन्दी फीचर फ़िल्म ‘‘टिंचरी माईः द अनटोल्ड स्टोरी’’ का ट्रेलर तथा पोस्टर देहरादून स्थित एक होटल के सभागार में लांच किया गया है।

इस दौरान फिल्म के निर्माता नवीन नौटियाल ने इस फिल्म निर्माण के सपने के बारे में बताया जबकि प्रख्यात लेखक, कवि लोकेश नवानी ने बताया कि यह फिल्म उत्तराखंड की टिंचरी माई की कहानी से प्रेरित है। मगर फिल्म का कथानक नया और समकालीन है। इधर चन्द्रवीर गायत्री प्रदेश अध्यक्ष बीएसपीएस ने लोगों से अपील की, कि वे अधिक से अधिक इस फिल्म को देखें और उत्तराखण्ड की इस तरह की कहानियों को प्रमोट करें।

ज्ञात हो कि यह फ़िल्म उत्तराखण्ड की सुप्रसिद्ध जोगन और सामाजिक चेतना की अग्रदूत रही टिंचरी माई के जीवन से प्रेरित है, उनके संघर्ष, त्याग, दुःख, हिम्मत, जुझारूपन और सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई की कहानी को आधार बनाकर ही लिखी गई है।

इस फिल्म की कहानीकार मेघा माथुर दिल्ली की एक आधुनिक युवा एवं एक टीवी चैनल की पत्रकार है। वे असाधारण  काम करने वाली अनजान महिलाओं को खोजकर उन पर आलेख लिखती है। यही वजह रही कि उन्हें उत्तराखंड पहाड़ की टिंचरी माई की कहानी प्रेरित कर गई। नाम सुझाया गया है। जब वे पहाड़ पहुंचती है तो टिंचरी माई के अनेक दुःखभरे किस्सों व साहस भरे संघर्षों की कहानियां सुनने को मिलती हैं।

कौन है टिंचरी माई –

टिंचरी माई यानी ठगुली देवी का जन्म पौड़ी गढ़वाल के थलीसैंण ब्लॉक के मंज्यूर गांव में हुआ था। छोटी उम्र में ही उनके सिर से माता-पिता का साया उठ गया था और 13 साल की उम्र में उनका विवाह उनसे 11 साल बड़े गवांणी गांव के गणेशराम नवानी से हो गया। फौजी गणेशराम उन्हें अपने साथ क्वेटा ले गए। वे द्वितीय विश्वयुद्ध में शहीद हो गए, वह अकेली रह गई। वे अपने दो बच्चों को लेकर गांव लौटीं तो कुछ समय बाद हैजे से उनके दोनों बच्चों की मृत्यु हो गई। परिवार और समाज ने न केवल उनका तिरस्कार किया, बल्कि इतना प्रताड़ित किया कि उन्होंने घर त्याग दिया। तात्कालिक पिछड़े क्षेत्र कोटद्वार भाबर में आकर वे जोगन बन गईं। अब जाकर उनके जीवन की नई लड़ाई शुरू हुई। टिंचरी माई स्वयं शिक्षित न होते हुए भी समाज में अशिक्षा को दूर करने के लिए उन्होंने मोटाढाक कोटद्वार में स्कूल खोला। सिगड्डी गांव में पीने के पानी की लड़ाई लड़ी और टिंचरी जैसी बुराई के खिलाफ़ एक सामाजिक आन्दोलन चलाया। इस आंदोलन के दौरान उन्होंने टिंचरी बेचने वाले व्यापारी की दुकान को आग लगा दी।

मेघा का अध्ययन अनुभव –

टिंचरी माई को जानने के लिए मेघा का शोध उसे हर दिन नई सच्चाइयों से रूबरू कराता है, तो दूसरी तरफ वह उसमें और गहरे से उतरती है। उसे लगता है कि यह सब तो आज भी हो रहा है और टिंचरी माई की लड़ाई आज भी लड़ी जा रही है। इसे लड़ना आज भी उतना ही प्रासंगिक और ज़रूरी है जितना पिछली सदी में।

1965 से 1977 के कालखण्ड में उसके साथ वही सब घटता है जो टिंचरी माई के साथ घटा था। टिंचरी माई की कहानी से उसे प्रेरणा और शक्ति मिलती है।

दिल्ली में पली-बढ़ी मेघा भी टिंचरी माई की ही तरह समाज के लिए समर्पित भाव से कार्य करती है। फलस्वरूप इसके यह फ़िल्म समाज की पितृसत्तात्मक बुनावट, स्त्री सशक्तीकरण और सामाजिक बदलाव जैसे सवालों को उठाती है।

पोस्टर लॉन्च –

फिल्म के पोस्टर और टीजर लॉन्च के दौरान चन्द्रवीर गायत्री प्रदेश अध्यक्ष बीएसपीएस, पुष्कर नेगी, अध्यक्ष बीएसपीएस चमोली, नवल खाली गढ़वाल प्रभारी, बीएसपीएस, एस पी दुबे, रोशन धस्माना अध्यक्ष गढ़वाल सभा, पंडित उदयशंकर भट्ट, शैलेन्द्र सेमवाल वरिष्ठ पत्रकार दैनिक हिन्दुस्तान, तोताराम ढौंडियाल जिज्ञासु, फिल्म निर्माता नवीन नौटियाल तथा इंजी. महेश गुप्ता, लोकेश नवानी और फिल्म निर्देशक के० डी० दिनेश उनियाल के अलावा कई गण्यमान्य लोग तथा फिल्म से जुड़े कलाकारों सहित अन्य रंगकर्मी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का सफल संचालन रंगकर्मी सुशील पुरोहित ने किया।

हिन्दी फ़िल्म: 

‘टिंचरी माई: द अनटोल्ड स्टोरी’।
प्रोडक्शनः एन एन प्रोडक्शन।
प्रस्तुतकर्ताः डॉ० पुष्करमोहन नैथानी।
लेखक : लोकेश नवानी।
निर्देशक : के० डी० उनियाल
निर्माता : नवीन नौटियाल, विनय अग्रवाल, महेश गुप्ता।

फ़िल्म शूटिंग स्थल :

बौंठ गांव, टिहरी, चोपता, उखीमठ, धारी देवी, मलेथा, देवप्रयाग संगम, बुग्गावाला, ज्वाल्पाजी, गवांणी तथा देहरादून के झंडाजी महाराज, गांधी पार्क, माल देवता, राजपुर मार्ग तथा अन्य अनेक स्थानों में हुई है। फ़िल्म में 70 से अधिक कलाकारों ने अभिनय किया है।

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