गवर्नमेंट हाईस्कूल के तरिया नेगी ने सेंटजोजेफ के रॉबर्ट का हॉकी से सिर फोड़ दिया था
बच्चों के बीच प्रतिस्पर्धा और उसका जानलेवा अंत कोई नई बात नहीं है. एक उम्र में भावनाएं जिस तरह से उभार मारती हैं, सारी जिंदगी उनका उबाल बदलता ही कहाँ है?
करीब पैसठ साल पुराना किस्सा है; तब भी हर साल अगस्त के महीने में नैनीताल के फ्लैट्स पर बच्चों की फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित होती थी, जिसका फाइनल अनिवार्य रूप से 15 अगस्त को संपन्न होता था.
नवीं कक्षा में सरकारी स्कूल का तरिया नेगी नैनीताल का सबसे तेज-तर्रार और गजब का फुर्तीला खिलाडी बच्चा था; गरीब घर का था, पिता चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे, जो बच्चे को किसी तरह पढ़ा-लिखाकर अपने पांवों पर खड़ा कर रहे थे. खेल की सारी बारीकियाँ उसने नैनीताल के इसी फील्ड में बाज़ार के लड़कों के साथ नंगे पाँव शॉट मारकर सीखी थीं. किसी बच्चे की मजाल नहीं थी कि वो तरिया नेगी की शॉट को गोल तक पहुँचाने से रोक सके.
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उस साल फाइनल में गवर्नमेंट हाईस्कूल और सेंटजोसेफ़ स्कूल की टीमें पहुंची थीं. सरकारी स्कूल का कैप्टेन तरिया नेगी और पब्लिक स्कूल का रॉबर्ट था. रोवर्ट को स्कूल से गजब की ट्रेनिंग मिली थी, वह भी उतना ही फुर्तीला और अपनी फुटबाल के साथ हवा में बात करने वाला बच्चा था. कोच उसका ही मामा था और उसके लिए रॉबर्ट को जिताना जीवन-मरण का सवाल बन जाता था.
पूरे मैच में मामूली जूतों और मटमैली नेकर-शर्ट वाला तरिया छाया रहा और अंत तक भी कोई जीत नहीं पाया. दोनों टीमें एक-एक गोल के साथ बराबरी पर रहीं. रॉबर्ट का मामा ही रेफरी था और पूरा मैच उफान पर था. अंत में पेनल्टी कॉर्नर के माध्यम से हरजीत का फैसला करने का निर्णय लिया गया. पहला हिट तरिया नेगी ने ही किया और गोल मार भी दिया, मगर रेफरी ने यह कहकर कि बॉल गोल के अन्दर न जाकर बाहर चली गई, गोल ख़ारिज कर दिया गया. अगली शॉट रोवर्ट को ही मारनी थी, उसने आसानी से गोल दाग दिया और सेंटजोसेफ़ स्कूल मैच जीत गया.
मैच ख़त्म होने के बाद जब रेफरी पेविलियन से लौट रहा था, एकाएक हवा में तैरते तीर की तरह अपनी हॉकी स्टिक के साथ तरिया नेगी आया और एक साथ अनेक चोट रेफरी के सिर पर मारकर अशोक टाकीज के दर्शकों की भीड़भाड़ के बीच गायब हो गया.
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