Sunday, June 28, 2026
Home चमोली कल्पतरु की कहानी, जगदंबा मैठाणी की जुबानी। क्लिक।करे और पढ़े यहां

कल्पतरु की कहानी, जगदंबा मैठाणी की जुबानी। क्लिक।करे और पढ़े यहां

पहाड़ों का कल्पतरु हो सकता है – Indian Butter tree –

By JP Maithani

च्यूरा (इंडियन बटर ट्री – Indian Butter Tree) – पीपलकोटी के हमारे बायो टूरिज्म पार्क में हमने पूर्व उद्यान निदेशक बी पी नौटियाल और पूर्व प्रमुख वन संरक्षक आई ऍफ़ एस एस टी एस लेपचा के द्वारा 2 साल पहले प्रदान किये गए बीजों से च्यूरा के बीज उपलब्ध कराये गए थे ! उन बीजों से हमने लगभग 600 पौधे बनाये थे. इसके बीजों का जीवन काल बहुत कम होता है इसलिए नर्सरी में बोने के लिए बीजों को गीली रेत में रखकर भेजना होता है !

संपूर्ण भारतवर्ष में च्यूरा सिर्फ भारत नेपाल की काली नदी घाटी क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से उगता है इस वृक्ष के बेहद अधिक उपयोग की वजह से आज इसके अस्तित्व पर संकट है उसके प्रमुख कारण है अत्यधिक दोहन और बहुत कम मात्रा में इस वृक्ष का उपलब्ध होना!

च्यूर वृक्ष के नाम से सारे पहाड में पाए जाने इस वृक्ष को इंडियन बटर ट्री कहते हैं इसका वानस्पतिक नाम डिप्लोनीमा बट्रेसिया और एस्सेनडा बट्रेसिया हो गया है ! इसकी पत्तियों का उपयोग चारे के रूप में किया जाता है चौड़ी पत्तियों और विशाल वृक्ष के साथ साथ ये सदाबहार और छायादार होता है ! इसके फूलों को मधुमक्खियाँ बहुत पसंद करती हैं और बीज का उपयोग तेल बनाने के लिए किया जाता है इसलिए इसको च्यूर घी कहते हैं ! च्यूरा के घी का प्रयोग सर्दियों की क्रीम के रूप में तथा गठिया और जोड़ों के दर्द के निवारण में किया जाता है ! बीजों का तेल निकाल देने के बाद बची हुई खल का उपयोग कीटनाशक के रूप में किया जाता है ! इस वजह से ही इस वृक्ष को कल्पतरु या कल्प वृक्ष भी कहते हैं !

तारादत्त कांडपाल, शार्दुल नौटियाल और स्वर्गीय बी पी नौटियाल द्वारा लिखित पुस्तक कल्पतरु में लेखक कहते हैं कि, इसका चारापत्ती के लिए अत्यधिक दोहन की वजह से इस पौधे पर संकट छा गया है और फूलों के कम उत्पादन से फल उत्पादन भी कम हो गया है इसलिए वनों में पुनरुत्पादन कम हो गया है !

यही वजह है कि, च्यूरा के पेड़ों को फिर से उगाया जाना बेहद जरूरी है,इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आगाज द्वारा इसके बीजों के संरक्षण के साथ साथ नर्सरी उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है ! संस्था द्वारा च्यूरा के पौधे निशुल्क प्रदान किये जा रहे हैं!

RELATED ARTICLES

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...