पहाड़ों का कल्पतरु हो सकता है – Indian Butter tree –
By JP Maithani
च्यूरा (इंडियन बटर ट्री – Indian Butter Tree) – पीपलकोटी के हमारे बायो टूरिज्म पार्क में हमने पूर्व उद्यान निदेशक बी पी नौटियाल और पूर्व प्रमुख वन संरक्षक आई ऍफ़ एस एस टी एस लेपचा के द्वारा 2 साल पहले प्रदान किये गए बीजों से च्यूरा के बीज उपलब्ध कराये गए थे ! उन बीजों से हमने लगभग 600 पौधे बनाये थे. इसके बीजों का जीवन काल बहुत कम होता है इसलिए नर्सरी में बोने के लिए बीजों को गीली रेत में रखकर भेजना होता है !
संपूर्ण भारतवर्ष में च्यूरा सिर्फ भारत नेपाल की काली नदी घाटी क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से उगता है इस वृक्ष के बेहद अधिक उपयोग की वजह से आज इसके अस्तित्व पर संकट है उसके प्रमुख कारण है अत्यधिक दोहन और बहुत कम मात्रा में इस वृक्ष का उपलब्ध होना!
च्यूर वृक्ष के नाम से सारे पहाड में पाए जाने इस वृक्ष को इंडियन बटर ट्री कहते हैं इसका वानस्पतिक नाम डिप्लोनीमा बट्रेसिया और एस्सेनडा बट्रेसिया हो गया है ! इसकी पत्तियों का उपयोग चारे के रूप में किया जाता है चौड़ी पत्तियों और विशाल वृक्ष के साथ साथ ये सदाबहार और छायादार होता है ! इसके फूलों को मधुमक्खियाँ बहुत पसंद करती हैं और बीज का उपयोग तेल बनाने के लिए किया जाता है इसलिए इसको च्यूर घी कहते हैं ! च्यूरा के घी का प्रयोग सर्दियों की क्रीम के रूप में तथा गठिया और जोड़ों के दर्द के निवारण में किया जाता है ! बीजों का तेल निकाल देने के बाद बची हुई खल का उपयोग कीटनाशक के रूप में किया जाता है ! इस वजह से ही इस वृक्ष को कल्पतरु या कल्प वृक्ष भी कहते हैं !
तारादत्त कांडपाल, शार्दुल नौटियाल और स्वर्गीय बी पी नौटियाल द्वारा लिखित पुस्तक कल्पतरु में लेखक कहते हैं कि, इसका चारापत्ती के लिए अत्यधिक दोहन की वजह से इस पौधे पर संकट छा गया है और फूलों के कम उत्पादन से फल उत्पादन भी कम हो गया है इसलिए वनों में पुनरुत्पादन कम हो गया है !
यही वजह है कि, च्यूरा के पेड़ों को फिर से उगाया जाना बेहद जरूरी है,इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आगाज द्वारा इसके बीजों के संरक्षण के साथ साथ नर्सरी उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है ! संस्था द्वारा च्यूरा के पौधे निशुल्क प्रदान किये जा रहे हैं!
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