Friday, March 6, 2026
Home lifestyle स्मृति शेष : कलम और बंदूक के सिपाई वीरेंद्र कश्यप जी।

स्मृति शेष : कलम और बंदूक के सिपाई वीरेंद्र कश्यप जी।

कलम और बंदूक के सिपाई वीरेंद्र कश्यप जी।

By – Dr. Yogesh dhasmana

एक बहुआयामी रंगकर्मी वीरेंद्र कश्यप ने पौड़ी के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में 1960 से लेकर 2019 तक कुल दो दशकों तक अपने अभिनय,लेखक,नाटककार,निर्देशक, ओर गायक के रूप में अविस्मरणीय योगदान दिया।
एक बहुआयामी प्रतिभा की स्मृतियों आज भी पौड़ी की फिजाओं में तैरती हुई एक सुखद अहसास दिलाती हैं।
मूल रूप से टिहरी जनपद के निवासी बाद में मसूरी की तलहटी में भगवन्तपुर गांव में बस गए थे।पिता सुमेरी लाल शर्मा, माता विद्यावती के पूर्वज टिहरी राज दरबार में प्रमुख व्यक्तियों में रहे थे।
कश्यप जी के पिता आजीविका कमाने के लिए महाराष्ट्र के अमरावती शहर में स्कूल मास्टर हो गए थे।यही पर 24 नवंबर 1933 को वीरेंद्र कश्यप जी का जन्म हुआ।इनकी प्रारंभिक शिक्षा अमरावती, और नागपुर में हुईं। पिता के अवकाश ग्रहण करने के बाद इनका परिवार देहरादून आ कर रहने लगा था। डी ए वी कलेज से स्नातक परीक्षा पास करने के बाद रोजगार के लिए रेडियो और दूरदर्शन से जुड़े।
रंगकर्मी वीरेंद्र कश्यप जी ने शुरुवाती वर्षों में संघर्ष करते हुए,राष्ट्रीय समाचार पत्रों में कहानी,कविता, नाटक समीक्षाएं,ओर आकाशवाणी के लिए रूपक लिख कर आजीविका संवर्धन का काम किया।
इनकी हास्य पर बड़ी पकड़ थी,विविध भारती से प्रसारित हवा महल कार्यक्रम में इनकी पुरानी रचनाएं आज भी प्रसारित होती रहती हैं।इनकी हास्य रचना उपन्यास शोहरत बहुत लोकप्रिय हुआ।इसकी भूमिका पर अमृत लाल नगर ने लिखा था कि,इस उपन्यास को उठाइए और थोड़ी देर के लिए कह कहो में खो जाइए। इसके बाद 1970 में उन्होंने गढ़वाली कवियों की रचनाओं का का संकलन ओर संपादन श्रद्धा बनी गीत पुस्तक का प्रकाशन किया।इसकी भूमिका तत्कालीन जिलाधिकारी रमेश चंद्र त्रिपाठी ने लिखी थी।
इसके बाद उनका एकांकी नाटक संग्रह,सगाई की अंगूठी नाम से प्रकाशित हुआ I

कश्यप जी के जीवन की एक अन्य विशेषता,,समावेशी व्यक्तिव का होना था।शरदोत्सव में मराठी रंगमंच के कलाकारों,पुणे के प्रसिद्ध तमाशा रंगमंच के थियेटर,ओर शास्त्रीय कलाकारों को आमंत्रित करना,काका हाथरसी,कवि नागार्जुन,ओर बृजेंद्र लाल शाह जैसे नाट्य कर्मी को आमंत्रित कर,पौड़ी की प्रतिभाओं से परिचित कराना,उनकी मौलिक सोच का भी परिचायक था।

वीरेंद्र कश्यप कलम के साथ ही बंदूक के भी सिपाई थे।पौड़ी में उन्होंने जसपाल नेगी,मिर्जा गिरीश बड़थ्वाल के साथ मिलकर अनेक नरभक्षी बाघों का भी शिकार किया ।
पौड़ी यंगमैन एसोसिएशन में 1960 से जुड़कर उन्होंने नाटकों का लेखन ओर निर्देशन किया।पौड़ी रामलीला में उन्होंने अनेक वर्षों तक जनक की यादगार भूमिका निभाई।पौड़ी नागरिक परिषद के अनेक वर्षों तक अध्यक्ष पद पर रहकर उन्होंने 1974से 2010 तक शरदोत्सव ओर ग्रीष्म उत्सव के आयोजन में सक्रिय योगदान दिया था।
रंगकर्मी वीरेंद्र कश्यप सुगम ओर शास्त्रीय संगीत में भव रुचिबके साथ दक्षता रखते थे।इस उद्देश्य से उन्होंने 1970 में इंद्रा प्रसाद बहुगुणा,जी,अजीत सिंह,सुखदेव रावत,रवि दत्त जख़वाल,दया सागर धस्माना,नरेंद्र सिंह नेगी,राजेंद्र सिंह बिष्ट,कला कुंज,प्रमोद शेयरिंग,सुशील कुकरेती,कृष्णकांत अन्थवाल,धीरेन्द्र मोहन बहुगुणा,भगवान वर्मा आदि कला प्रेमियों ने एक बार फिर गीत संगीत की धारा से नवोदित प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया।इस मंच से सिने जगत की अभिनेत्री,उर्मी नेगी,गिरीश नैथानी,हरीश बड़थ्वाल,आदि सफ़ल कलाकार निकले।
वीरेंद्र कश्यप जी नवाचारी कलाकार थे,पौड़ी में उन्होंने स्पीक मैके,जैसी प्रतिष्ठित संस्था के कार्यक्रम पौड़ी में आयोजित करवाए। देश के प्रतिष्ठित संगीत घरानों के कार्यक्रम आयोजित कर,पौड़ी को एक नई पहचान दिलाई।
होली हो या दीपावली ,राष्ट्रीय पर्व हो,या फिर,स्थानीय पर्व,आगे आ कर कार्यक्रम आयोजन में बढ़ चढ़ कर भागीदारी, युवाओं को प्रोत्साहित करते थे।
रंगकर्मी भगवंत सिंह नेगी, मोहम्मद सद्दीक,मेरे पिता दया सागर,नरेंद्र नेगी,अजीत सिंह सुखदेव रावत,, रामचरण जुयाल,आदि के साथ पौड़ी के कला जगत को ऊंचाइयों देने के लिए प्रयास रहते थे।
होली की बैठकों के आयोजन में,नारायण दत्त थपलियाल,वाचस्पति गैरोला,,श्रीकृष्ण चंदेल,भगवान वर्मा,दल्लू बाबू, मदन मोहन लाल शाह ,तारीलाल शाह के साथ मिलकर शास्त्रीय रागों की होली से पौड़ी को गुलजार करते नजर आते थे।उनकी पत्नी प्रमिला,आगंतुक ओर अतिथियों के स्वागत सत्कार के लिए सदैव तत्पर रहती।
एक लंबी जीवन यात्रा जो सामाजिक सांस्कृतिक इतिहास की स्मृतियों से भरी पड़ी है,उसे 09 जुलाई 2019 को उनके निधन से गहरा आघात लगा।इस महान रंगकर्मी की 83 वर्ष की जीवन यात्रा मे 55 वर्ष रंग कर्म को समर्पित रहे।

वीरेंद्र कश्यप जी ओर उनकी श्रीमती प्रमिला चाची जी को पौड़ी से बेहद लगाव था।उनके बच्चों निधि ओर बेटे संयम में अपनत्व ओर संवेदनाओं से भरा व्यक्तित्व पौड़ी की धड़कनों में बसता हे।संयम सेना में कर्नल पद पर कार्यरत है।बेटी निधि जोशी देहरादून ओर रुचि नौटियाल,उत्तरकाशी के संभ्रांत परिवार में अरुण नौटियाल, की पत्नी है।अरुण एबीपी न्यूज में प्रोड्यूसर पद पर कार्यरत थे,जिनका निधन लगभग दो वर्ष पूर्व हो,चुका है।
गढ़वाल मंडल के थियेटर को हिंदी गढ़वाली,ओर अंग्रेजी के अनूदित नाटकों को मंचन,और इससे बढ़कर पौड़ी में ऑडिटोरियम के निर्माण में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।
हिंदी गढ़वाली ओर अंग्रेजी में गजब की पकड़ के बाद भी,व्यवहार में गढ़वाली बोली का प्रयोग उनके व्यक्तित्व की विशेषता थी।
उनके निधन से कला जगत को तो आघात तो लगा ही,पर पौड़ी के सामाजिक सांस्कृतिक जीवन में जो रिक्तता आई है,उसकी भरपाई अभी तक नहीं हो सकी है। पौड़ी के विविध सांस्कृतिक मंचों के लोकप्रिय कलाकार को विनम्र श्रद्धांजलि।

लेखक इतिहासकार हैं।

RELATED ARTICLES

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

धराली आपदा : वैज्ञानिकों ने किया खुलासा, एक बड़े ग्लेशियर के टुकड़े के टूटने से हुई तबाही।

न बादल फटा, न ग्लेशियल झील… वैज्ञानिक अध्ययन में खुलासा: श्रीकांता ग्लेशियर से बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से हुआ था धराली हादसा। ....................... 5 अगस्त...

2017 तक स्टार्टअप की संख्या थी शून्य। वर्ष 2025 में बढ़कर हुई 1750

- 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) ₹ 3,81,889 करोड़ का रहा - 2021-22 के मुकाबले जीएसडीपी में आया डेढ़ गुना से ज्यादा...

एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

होली विशेषांक : खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर।

- खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर। - दून पुस्तकालय में संगीताजंलि की शानदार होली प्रस्तुति दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में आज संगीतांजली शास्त्रीय...

बर्लोगंज एंड बियोंड पुस्तक का लोकार्पण

पुस्तक : बर्लोगंज एंड बियोंड   By - Dr. Yogesh dhasmana   देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रो बी के जोशी के संस्मरणों पर आधारित पुस्तक बर्लोगंज एंड बियोंड...

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में।

विज्ञान दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में। By - Neeraj Uttarakhandi पुरोला विकासखंड के अंतर्गत राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय चन्देली में राष्ट्रीय...

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी।

स्पैक्स संस्था ने होली के प्राकृतिक रंगों पर दून पुस्तकालय में बच्चों को दी जानकारी। .......... दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में ‘स्पेक्स’ संस्था के सहयोग...

जनगणना की पूरी तैयारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी जनगणना

जनगणना-2027 की डिजिटल तैयारियां शुरू, देहरादून में 25-27 फरवरी तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू चार्ज अधिकारियों से लेकर सेन्सस क्लर्क तक, सभी ले रहे डिजिटल...

एक स्वस्थ परंपरा है स्कूल ऑफ थॉट्स – प्रो० पंवार

स्कूल ऑफ थॉट्स, श्रीनगर (गढ़वाल), भारतीय-हिमालयी ज्ञान परंपरा,  मुख्य वक्ता- प्रो. मोहन पंवार। भारतीय : हिमालय ज्ञान परंपरा पर अपनी बात शुरू करते हुए मुख्य...