शहर के 325 बच्चे किए गए रेस्क्यू। पहल केंद्र में दी जा रही है शिक्षा।

By – Prem Pancholi
पहले यह नारा था भिक्षा नहीं भोजन दें, अब यह नारा हो गया है “भिक्षा से शिक्षा” की ओर। जी हां। यह एक खास “पहल” है। जिसे जमीन पर उतारा है देहरादून के जिलाधिकारी सवीन बंसल ने। यहां जो बच्चे अध्ययनरत है वे सभी भिक्षावृत्ति, बालमजदूरी, कूड़ा बिनने आदि आदि कार्य से जुड़े थे। यहां इन बच्चों को “अक्षर ज्ञान से लेकर इनके कौशल विकास” पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। “लर्निंग बाय डूइंग” जैसी प्रक्रिया यहां आपको देखने को मिलेगी। देहरादून शहर के राजारोड स्थित आशाराम इंटर कालेज के परिसर में संचालित यह “पहल” हुई है। यहां एक व्यवस्थित पुस्तकालय, तो कंप्यूटर लैब, अनौपचारिक केंद्र, संगीत कक्षा सहित एक विशेष कक्षा कक्ष भी है। जहां ये बच्चे अपनी मन पसंद के अनुसार शिक्षा ग्रहण कर रहे है। जबकि यहां इन बच्चों के लिए अक्षय पत्र के माध्यम से भोजन व्यवस्था भी की जाती है।
केंद्र को संचालित कर रहे शिक्षकों का कहना है कि इन बच्चों में कॉन्फडेंस लेवल बहुत अच्छा है। इसलिए इन्हें पढ़ाने में कोई समस्या नहीं आ रही है।
मुख्यमंत्री श्री धामी के निर्देश में देहरादून के जिलाधिकारी साबिन बंसल ने इस “नायाब पहल” को अमलीजामा पहनाया है। अब इस इनसेंटिव केंद्र में 200 बच्चों ने प्रवेश ले लिया है।बता दें कि देहरादून शहर के हर चौक पर एक गार्ड तैनात है। जो भी बच्चा भीख मांगते या अन्य घिनौने कार्य में देखा जाए उसे फौरन इस केंद्र में लाया जाता है और शिक्षा के मार्फत भिक्षावृत्ति से जुड़े बच्चों का पुनर्वास किया जा रहा है।
उल्लेखनीय हो कि जिला प्रशासन द्वारा अभी तक 325 बच्चों का रेस्क्यू कर उनको शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा है। इसमें 91 भीख मांगते बच्चे, 97 बाल मजदूरी में संलिप्त, 137 कूडा बीनने वाले बच्चे शामिल है। वर्तमान में इंटेसिव केयर सेंटर में 25 बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। इंटेंसिव केयर सेंटर की नियमित मॉनिटरिंग के साथ इसका पूरा व्यय जिला प्रशासन द्वारा वहन किया जाता है। केयर सेंटर में आरबीएसके टीम द्वारा बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया जाता है।