Thursday, May 14, 2026
Home देहरादून रवांल्टी कविता अब उड़िया और कन्नड़ में भी पढ़ी जाएगी।

रवांल्टी कविता अब उड़िया और कन्नड़ में भी पढ़ी जाएगी।

रवांल्टी कविता अब उड़िया और कन्नड़ में भी पढ़ी जाएगी।

उड़ीसा के भुवनेश्वर में हुए तीन दिवसीय अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय सर्वभाषा साहित्य सम्मेलन में उत्तराखंड की रवांल्टी लोक भाषा में रचित “मीठू बोल” नामक कविता का पाठ कवि भारती आनंद अनंता ने किया।

बता दें कि इस दौरान भारत के विभिन्न प्रांतों क्रमश उत्तराखंड, उड़ीसा, तमिलनाडू, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, गोवा, मध्यप्रदेश, केरल, कर्नाटका,  गुजरात, उत्तरप्रदेश, हिमाचल आदि राज्यों से आए साहत्यकारो ने अपने अपने राज्य की आंचलिक भाषा में कविता पाठ किया है। कविता पाठ को लेकर उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व उद्घोषिका व कवि भारती आनंद “अनंता” ने किया है। श्रीमती भारती ने गढ़वाल की रवांल्टी बोली पर आधारित स्वरचित कविता “मिठू बोल” का पाठ किया है। कविता में मानवीय सद्गुणों से लेकर प्रेम, करुणा और परस्परता के एक एक शब्द बुने गए है। “मिठू बोल” शीर्षक की कविता का जब भारती ने पाठ किया तो एक बारगी साहित्य सम्मेलन में बैठे सैकड़ों लोगो के आंखों में आंसू आ गए।

सम्मेलन में पहुंचे अलग अलग प्रांतों के साहित्यकारों ने भारती की सिर्फ हौसलाफजाई नहीं की बल्कि कन्नड़ साहित्य के बहुत ही प्रतिष्ठित लेखक प्रेम शेखर, उड़िया सांस्कृतिक पक्षों के बहुत ही जाना पहचाना नाम प्रवीण कुमार ने भारती की इस रवांल्टी लोक भाषा की कविता को कन्नड़ एवम उड़िया में अनुवाद करके प्रकाशित करने की बात की है।

उल्लेखनीय यह है कि उत्तराखंड के रवांई क्षेत्र की यह पहली कविता है जो देश के अन्य आंचलिक भाषाओं में अनूदित हो रही है।

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