नीना गुप्ता- जिसने ज़िन्दगी को अपनी शर्तों पर जिया!
@Sunita Maletha
बचपन में अक्सर वो रात में अपनी मां को बिस्तर में सुबकते हुए सुनती, पर कभी मां के गले लगके उनके दुख को साझा करने की हिम्मत न होती ना ही ये सवाल करने की कि, मां ने ऐसा जटिल रिश्ता चुना ही क्यों जिसमें यूं तड़पना पड़े! हर रात सारा परिवार साथ खाना खाता लेकिन गहराती रात पिता को कहीं और ले जाती, वहां जहां उनका दूसरा परिवार उनके इन्तज़ार में रहता। अगली सुबह नाश्ते पर पिता फिर इत्मिनान से साथ होते।

वो याद करती है कि, दिल्ली की चिलचिलाती गर्मी से छुटकारा पाने के लिए कैसे स्कूल की छुट्टियां नैनीताल की किसी धर्मशाला या किसी सस्ते होटल की कोठरी में मां और भाई के साथ बीतती थीं, उन महीनों में भी पिता कुछेक दिनों के लिए ही साथ होते थे। मां अकेले सबकुछ संभालती। मां के त्याग और कड़े अनुशासन का ही नतीज़ा था कि, उसके भीतर ज़िन्दगी की हर कठिन परीक्षा में भाग लेने का पैदाइशी जज़्बा था, डर कर भागना और भागकर छिपना उसकी फितरत में था ही नहीं, जब दिल लगा तो टूटकर प्यार किया, निभ न पाया तो ईमानदारी से विदा ली और फिर हमेशा के लिए स्नेहिल रिश्ता बनाये रखने की कोशिश की।
पितृसत्तात्मकता के उस चरम दौर में जब ‘मी टू’ की कल्पना तक नहीं की जा सकती थी, उसने बिन ब्याही मां बनने का कांटो भरा रास्ता चुना, जबकि दूसरा रास्ता कहीं आसान और उम्मीदों से भरा था। वो अपने हक़ की शोहरत और काम दोनों के लिए तरसती रही। उसकी मेहनत और काबिलियत के मुक़ाबिल उसके हिस्से में कामयाबी कम़ आईं और ठोकरें ज़ियादा। एक छोटा सा ग़लत फै़सला उसे कई पायदान नीचे ला खींचता।
लेकिन, इस जद्दोजहद के बीच भी उसकी बेज़ार ज़िन्दगी दिली खुशी का कोई न कोई बहाना ढूंढ ही लाती थी। उसके कड़े फैसलों के कारण फिसलते करियर में उसके दोस्त और परिवार ढाल बनकर उसे सहारा देते रहे। जन्मदेने वाली मां ने जीतेजी हर कदम पर साथ दिया तो जन्मदात्री के चले जाने के बाद पिता की दूसरी पत्नी ने भी मां की तरह ही अपना हाथ उसके सिर पर रखा। बिटिया ने अपनी मां के हर फैसले को पूरी मसर्रत से अपनाया। इसी तरह एक दिन हवाई जहाज़ में उसकी खुशकिस्मती उससे टकरायी और उसे प्रेम की पाती थमा गई, जिस पर उसके होने वाले जीवन साथी का पता लिखा था।
‘सच कहूं तो’ मैं अपनी ज़िन्दगी के सफ़हे पलटती हुई नीना गुप्ता ख़ुश्क ज़मीं पर खिली हुई एडेनियम जैसी लगती है! खूूबसूरत रेगिस्तानी गुलाब! वही खूबसूरत रेगिस्तानी गुलाब, जिसकी तस्वीर मैंने, Vinita Khanduri की फुलवारी से चुरा कर यहां चस्पा कर डाली है।







