Friday, March 6, 2026
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प्रश्नचिन्ह – क्यों लौटे श्री कोश्यारी वापस? बौखनाग देवता ने शरदोत्सव का किया शुभारंभ

बौखनाग देवता के सानिध्य में हुआ बड़कोट शादोत्सव का शुभारंभ। श्री कोशियारी लौटे वापस। By - Prem Pancholi   यह पहली बार हुआ जब बड़कोट नगर पालिका...

गोवा फिल्म फेस्टिवल : विदेशी फिल्मकारों को भी भाया उत्तराखंड का फिल्म सौंदर्य – डा० उपाध्याय

गोवा में आयोजित 56वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के अन्तर्गत आयोजित IFFI Waves Film Bazaar-2025 में विभिन्न देशों एवं भारत के विभिन्न राज्य सरकारों...

गोवा फिल्म फेस्टवेल : उत्तराखंड फिल्म नीति के सार्थक परिणाम आ रहे है – डॉ० उपाध्याय

By - Prem Pancholi गोवा में आयोजित 56वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के अन्तर्गत आयोजित IFFI waves film Bazaar-2025 में शनिवार को Knowledge Series का...

नाटक बर्फ : रंगमंच को जीवंत रखने का एक सुकून भरा प्रयास

रंगमंच को जीवंत रखने का एक सुकून भरा प्रयास By - Chandrashekhar Tewari रंगकर्मी सुवर्ण रावत की संकल्पना और निर्देशन में कल शाम कला दर्पण बैनर...

उत्तराखंड रजत जयंती वर्ष : दून पुस्तकालय में ज्योति उप्रेती सिस्टर ने बांधा शमा, थिरकने के लिए मजबूर हुए दर्शक।

By - Chandrashekhar Tiwari दून पुस्तकालय में माधुरी बड़थ्वाल और उप्रेती सिस्टर्स की प्रस्तुतियों ने बांधा समा। रामलाल की कठपुतली देख, आनंदित हुए बच्चे दून पुस्तकालय एवं...

प्रेम, दिवानगी और समसामयिकी विषयों का संग्रह है ‘वो साल चौरासी’

प्रेम, दिवानगी और समसामयिकी विषयों का संग्रह है ‘वो साल चौरासी’ By - Prem Pancholi दुनियांभर में ‘प्रेम’ पर आज तक जो भी लिखा गया है...

लोकजीवन के अनुभवों की अभिव्यक्ति है संस्कृति – पद्मश्री डा. माधुरी बड़थ्वाल

लोकजीवन के अनुभवों की अभिव्यक्ति है संस्कृति ----------------------- - ‘जीवन और संगीत’ विषय पर सोमवार को आयोजित ‘जागरण विमर्श’ में संगीतकार पद्मश्री डा. माधुरी बड़थ्वाल ने...

सकारात्मकता का संदेश देती हैं दर्द गढ़वाली की ग़ज़ले।

सकारात्मकता का संदेश देती हैं दर्द गढ़वाली की ग़ज़ले। By - Sunil Sahil 'उजाले बांटते रहना' क्या ही खूबसूरत उनवान है, जो सिर्फ समाअत को नहीं,...

गढ़वाली कविता : जीवनीय दर्शन को सहजता से बताती कविताएं

जीवनीय दर्शन को सहजता से बताती कविताएं- By - Dr. Arun kuksal प्रायः यह कहा जाता है कि जो समाज में प्रचलित और घटित हो रहा...

डूब चुकी टिहरी, की दिवाली के अनुभव साझा कर रहे है वरिष्ठ साहित्यकार राकेश थपलियाल

टिहरी की दिवाली : By - Rakesh thapliya दिवाली क्या आती थी कि, उसके स्वागत में पूरे घर में अच्छी खासी परेड शुरू हो जाती थी...

व्यंग्य : इति शास्त्रोक्त पत्रकार भेदम्सं क्षिप्तम् अर्थात अथ पत्रकारभेद यानी चार श्रेणी पत्रकार।

अथ पत्रकारभेद यानी चार श्रेणी पत्रकार। By - Mukesh Bahuguna  पत्रकार प्रथम श्रेणी - इस श्रेणी के पत्रकार होली /दीवाली /नववर्ष के शुभअवसरों पर उपहार के रूप...

उपन्यास समीक्षा : हर्षिल और फिरंगी राजा।

By - Arun Kuksal उन्नीसवीं सदी में गढ़वाल के एक कालखण्ड की जीवंत अभिव्यक्ति- 'स्थानीय लोगों से उसका जिक्र कीजिए तो वे दावे के साथ बताएँगे...
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एक साधारण व्यक्ति में असाधारण व्यक्तित्व की जीवन्त जीवन जीने की शब्द-यात्रा है – BARLOWGANJ AND BEYOND

- साधारण व्यक्ति का असाधारण व्यक्तित्व : प्रो. बी. के. जोशी। - प्रो. बी. के. जोशी जी के जीवनीय आत्म-संस्मरणों पर केन्द्रित पुस्तक 'BARLOWGANJ...

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान

विकास के नए आयाम स्थापित करती ग्राम पंचायत भगवन्तपुर की ग्राम प्रधान   By - Harishankar saini   कभी गड्ढों, कीचड़ और टूटे किनारों से जूझती सलान गाँव...

होली विशेषांक : खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर।

- खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर। - दून पुस्तकालय में संगीताजंलि की शानदार होली प्रस्तुति दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र के एम्फीथियेटर में आज संगीतांजली शास्त्रीय...