Sunday, June 28, 2026
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गांधी जी की तरह सरल व्यक्तित्व था शास्त्री जी का

गांधी जी की तरह सरल व्यक्तित्व था शास्त्री जी का

Govind Prasad Bahuguna
यह भी क्या संयोग रहा  कि दोनो की जन्म तिथि भी एक हुई I लालबाहदुर शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को  मुगलसराय उत्तर प्रदेश में मुंशी  शारदा प्रसाद श्रीवास्तव जी के घर हुआ था I

Gandhi and Shastri
Gandhi and Shastri

काशी विद्यापीठ ने  जब उन्हें “शास्त्री”  की उपाधि दी, तबसे उन्होंने अपने नाम के साथ *श्रीवास्तव* का जातिसूचक शब्द हटाकर शास्त्री लिखना शुरू किया, फिर उनके बेटों के नाम के साथ भी यह टाइटल स्वतः जुड़ गया । अत्यंत विनम्र और शालीन,  ईमानदार राजनेता की मिसाल थे वे।  शास्त्री जी प्रधानमंत्री के सर्वोच्च पद पर रहते हुए भी उनको कभी अहंकार छू नहीं पाया। एक प्रसंग पिता जी ने सुनाया था हमें,  जो उन्होंने भी अखबार में ही पढ़ा था कि जब वे केंद्रीय रेल मंत्री थे तो सुबह कोई सज्जन उनसे मिलने आए जिनसे उनका कोई पूर्व परिचय नहीं था।

तभी शास्त्री जी धोती बनियान पहने स्नानघर से बाहर अपनी धोई हुई  धोती सुखाने बाहर  आए तो  आगंतुक ने उन्हें शास्त्री जी का सेवक समझकर कहा -शास्त्री जी से मिलना है, उनसे जाकर कहो कि -फलां आदमी उनसे मिलने आया है । शास्त्री जी अंदर गए कपड़े पहन कर फिर बाहर आए और उन्हें अपनी बैठक में ले गए फिर उन्हें पानी का गिलास थमाते हुए बोले- कहिए क्या काम है शास्त्री से , वह में ही हूं। वह व्यक्ति शर्म से पानी पानी हो गया लेकिन शास्त्री जी ने उन्हें सहज किया उनकी बात सुनी –
भारत पाकिस्तान युद्ध के समय जब वे प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने देशवासियों से कहा कि सप्ताह में  एक दिन का  व्रत रखो उससे जो अन्न बचेगा वह हमारे सैनिकों के काम आएगा लेकिन इसकी घोषणा करने से पहले उन्होंने अपने परिवार के सब बच्चों से पूछा एक दिन बिना भोजन के रह सकते हो ? जब सबने अपनी सहमति दे दी तो उन्होंने अपील जारी की कि मंगलवार को व्रत रखें।  लिहाजा उस दिन कोई होटल भोजन नहीं खिलाता था,  बंद रहते थे – ऐसे निर्णय होते थे उनके – चुपके- चुपके बिना जनता को विश्वास में लिए निर्णय लेने की उनकी कभी  शैली नहीं रही -ऐसे दूसरे “महात्मा लाल बहदुर शास्त्री”  को मेरा नमन -GPB

Bharti Anand Ananta
शोध, समसामयिक विषयों पर लेखन, कविता/कहानी लेखन, कंटेंट राइटर, स्क्रिप्ट राइटर, थियेटर आर्टिस्ट
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