Sunday, September 13, 2026
Home पौड़ी गढ़वाल सेबाग बना सेब बागवानों का आकर्षण का केंद्र।

सेबाग बना सेब बागवानों का आकर्षण का केंद्र।

सेबाग बना सेब बागवानों का आकर्षण का केंद्र।

@डा० राजेंद्र कुकसाल

कलासन नर्सरी फार्म द्वारा जनपद पौड़ी गढ़वाल के थलीसैंण विकास खंड के चोपड़ा (नौगांव) खिर्सू पैठाणी मोटर मार्ग पर स्थापित सेबाग फार्म सेब बागवानों का आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

उत्तर पूर्वी ढाल, 1738 मीटर की ऊंचाई, सिंचाई हेतु पानी की उपलब्धता , पर्याप्त सूर्य का प्रकाश एवं जंगल से घिरे सेब के लिए अनुकूल जलवायु वाले इस बगीचे की स्थापना बर्ष 2023 में दो बर्ष पुराने सेब के पौधों के उच्च घनत्व में रोपण से हुई, जिस पर एक बर्ष बाद ही याने 2024 में ही फल लगने शुरू हो गये है। सेब के इस बगीचे में अनुवांशिक एवं भौतिक रूप से विशुद्ध एम 9 रूट स्टॉक्स पर उच्च घनत्व में चार हजार सेब के पौधे लगाए गये है जिनका रखरखाव उच्च स्तर का है।

इस बाग में सेब के पौधों के लिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम का निर्माण किया गया है, उचित स्वचालित ड्रिप सिंचाई प्रणाली लगाई गई है,फर्टीगेशन सिस्टम लगाया गया है। बगीचा के चारों ओर सोलर फैंसिंग लगी है। सड़क के पास होने के कारण आने जाने वाले लोग रुक कर सेब के इस बाग को देख रहें हैं व प्रेरित हो रहे हैं।

सेब में उच्च घनत्व की आधुनिक खेती –

आधुनिक सेब की खेती को उच्च घनत्व वाली खेती भी कहा जाता है। पारंपरिक बगीचे की तुलना में इसमें प्रति इकाई पेड़ों की संख्या अधिक होती है जिससे उत्पादन प्रति इकाई आठ से दस गुना तक बढ़ाया जा सकता है।

पौधों की दूरी के आधार पर सेब रोपण की प्रणालियां (Planting Systems )-

Apple orchid
Apple orchid

1.पारंपरिक विधि – बीजू पौधों पर (Seedlings) पर तैयार सेब के पौधे आकार में बड़े होते हैं,किस्मों के आधार पर लाइन से लाइन की दूरी एवं लाइन में पौध से पौध की दूरी 20×20 फीट (110 पौधे / एकड) से 12×12 फीट (310 पौध/एकड़, स्पर किस्में) तक होती है।

2.कम घनत्व -आम तौर पर MI 793, MM111 क्लोनल रूटस्टॉक्स का उपयोग कम घनत्व वाले पौध रोपण के लिए किया जाता है। यह भी किस्मों पर निर्भर करता है। कम घनत्व वाले पौध रोपण 14×8 (गैर स्पर के लिए 395/ एकड़) से 12×7 (स्पर प्रकार के लिए 527/ एकड़) किस्मों के लिए किया जाता है।

3.मध्यम घनत्व- इस विधि में पौध रोपण के लिए M7, MM106, M116 क्लोनल रूटस्टॉक्स का अधिकतर उपयोग किया जाता है। घनत्व 12×6 और 11×5 फीट है। कुल पौध रोपण 615 और 895 पेड/एकड़ होता है।

4.उच्च घनत्व- इस प्रणाली में M9, M26 के रूट स्टॉक्स उपयोग किए जाते हैं, 10×3 और 8×2.25 फीट आदर्श दूरी हैं। घनत्व 1470 और 2460 पेड़ प्रति एकड है इस प्रणाली में पौधों को सहारा देने हेतु एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम के निर्माण की आवश्यकता होती है।

5.अल्ट्रा हाई डेंसिटी- पेड़ों की छतरी को रूटस्टॉक्स M9, M26 पर नियंत्रित किया जाता है। उपयोग की गई दूरी 8×2.1 फीट (2635 पेड/एकड़) और 7×1.7 (3720 पेड/एकड़) है। इस प्रणाली में एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम निर्माण की आवश्यकता होती है।

कलासन नर्सरी फार्म जिनके द्वारा इस बगीचे की स्थापना की गई है इस फर्म के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री विक्रम सिंह रावत मूल रूप से पौड़ी जनपद के पांवों विकास खंड के सीकू क्लूण गांव के निवासी हैं।इनकी जन्म भूमि व कर्मभूमि हिमाचल प्रदेश रही है हिमाचल में आपकी सेब की हाइटेक नर्सरी कलासन नाम से है जो आज उच्च घनत्व में सेब की फार्मिंग के साथ साथ उच्च स्तरीय ट्रेनिंग और कंसल्टेंसी सेंटर बन चुका है। उत्तराखण्ड में अपने मूल (पैतृक स्थान) में 2018 से आपने सेब की नर्सरी पर कार्य प्रारंभ किया अबतक कलासन नर्सरी द्वारा राज्य में 80 से अधिक सरकारी व व्यक्तिगत सेव के बाग स्थापित किए गए हैं। पौड़ी जनपद के धूमाकोट में वर्षों से बंजर पड़े उद्यान विभाग के पटेलिया फार्म को बर्ष 2018 में तत्कालीन जिलाधिकारी पौड़ी धीराज गर्ब्याल के सहयोग से आपकी टीम द्वारा विकसित किया गया। पटेलिया फार्म में वर्तमान में उच्च घनत्व में सेब का बाग के साथ ही रूट स्टॉक्स नर्सरी तैयार की जा रही है पर्यटकों को भी यह केन्द्र आकर्षित कर रहा है। माडल के तौर पर जिलाधिकारी पौड़ी के आवासीय परिसर में भी आपकी टीम द्वारा उच्च घनत्व का सेब का बगीचा विकसित किया है।

श्री रावत का कहना है कि उत्तराखंड में सेब की फसल हिमाचल से पहले तैयार होती है, जिसे बाजार में दाम भी अच्छा मिलेगा । एक एकड़ यानी बीस नाली जमीन पर उच्च घनत्व प्रणाली में लगभग 1300 पौधे सेब के लगाए जा सकते हैं। पांचवे साल से सारे खर्चे निकालकर 20 नाली सेब के बगीचे से आसानी से सब खर्चे निकालकर छह लाख रूपए सालाना तक आराम से कमाए जा सकते हैं।

पहाड़ में एक साथ खेत नहीं हैं तो बागवानी के लिए कंपनी या कोओपरेटिव बनायी जा सकती है सामूहिक खेती करने पर जंगली जानवरों और बंदरों से भी आसानी से फसल को बचाया जा सकता है।

सलाह – अनुकूल जलवायु, ऊंचाई ,ढलान, भूमि व सूक्ष्म वातावरण होने पर ही सेब के बाग लगायें। एम 9 रूट स्टॉक्स पर उच्च घनत्व की सेब की खेती केवल उन बागवानों के लिए फायदेमदं है जिनके पास सभी साधन ( मजबूत स्पोर्ट सिस्टम निर्माण, उचित ड्रिप सिंचाई प्रणाली, फर्टीगेशन सिस्टम लगाने की क्षमता ) अपना समय व सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध हो।

उत्तराखण्ड में बागवानों के लिए कम घनत्व एम आई 793 व एम एम 111 अथवा मध्यम घनत्व एम 7, एम 116, एमएम 106 रूट स्टॉक्स पर सेब की बागवानी अधिक लाभदायक हो सकती हैं।

RELATED ARTICLES

हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय

By - Dr. Nitin upadhyay अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस...

कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ https://www.facebook.com/janmanchaajkal?locale=hi_IN हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान : सरकार

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान यूएसडीएमए की शिक्षा विभाग के साथ बैठक में बनी रणनीति चेतावनी-सूचना से लेकर खोज-बचाव तक की...

हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय

By - Dr. Nitin upadhyay अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस...

कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...

सरस्वती ताल और केदारताल का होगा वैज्ञानिक सर्वे, वैज्ञानिको का दल रवाना

सरस्वती ताल और केदारताल के लिए दल रवाना सचिव आपदा प्रबंधन ने दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री तथा आपदा प्रबंधन मंत्री ने दी शुभकामनाएं प्रदेश...

जल प्रबंधन को मिलेगा आधुनिक तकनीक का वैज्ञानिक आधार – MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर

जल संसाधन प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का नया अध्याय—MIKE Hydro Basin पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ देशभर से 400 से अधिक विशेषज्ञ,...

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ https://www.facebook.com/janmanchaajkal?locale=hi_IN हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय...

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas By - Prem Pancholi The Shail Shilpi Vikas Sangathan organized...

समाधान दिवस पर 120 शिकायतें दर्ज, त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया आरम्भ – जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान

जनसमस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऋषिपर्णा सभागार में समाधान दिवस आयोजित किया गया। जिलाधिकारी डॉ....

झीलें कुछ समय के लिए दिखाई देती हैं, स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में दिखाई देने वाली छोटी हिमनदीय झीलों से तत्काल बड़े खतरे की स्थिति नहीं-वाडिया मीडिया में प्रसारित खबरों के संबंध में यूएसडीएमए...

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री मुकेश कुमार की अध्यक्षता...