Monday, June 29, 2026
Home देहरादून उत्तराखंड लोक विरासत - 4 : दो दिन तक लोक के रंग...

उत्तराखंड लोक विरासत – 4 : दो दिन तक लोक के रंग में डूबे रहे देहरादूनवासी

Lok virast 2024
Lok virast 2024

यदि नहीं आये तो देख लेना। इस पंक्ति से अपको डर लग रहा होगा। या आपको यह पंक्ति धमकीभरी लग रही होगी। पर ऐसा कुछ भी नहीं है। यदि आप उत्तराखण्डी हैं तो जरूर समझ गये होंगे। यदि आप गैर उत्तराखण्डी हैं तो आपको मैं समझा देता हूं।

दरअसल हुआ यूं कि हर साल चारधाम ट्रस्ट देहरादून में “उत्तराखण्ड लोक विरासत” के नाम से एक आयोजन करता है। इसी आयोजन के निमन्त्रण पत्र के अन्त में यह पंक्ति अंकित है। इस पंक्ति का सीधा सा मतलब है कि जरूर आना। अब आप कह रहें होंगे कि इसमें तो लिखा है कि देख लेना? साहब! उत्तराखण्डी जब किसी के बुलावे जाते है यानि आमन्त्रण करने जाते हैं तो सामान्य तौर पर कह देते हैं कि जरूर आना यदि नहीं आये तो देख लेना। तात्पर्य यही है कि यह हम उत्तराखण्डीयों के सामान्य बोल चाल में है। इसी पंक्ति को पढकर मैं समझ गया था कि इस आयोजन में जो भी होगा वह “पेवर” उत्तराखण्डी ही होगा।

Lok virast 2024
Lok virast 2024

पिछले चार साल से लगातार चारधाम ट्रस्ट के संयोजन में आयोजित होने वाली “उत्तराखण्ड लोक विरासत” को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रंगा रंग कार्योकमो के साथ सम्पन्न किया है। सोशल बलूनी पब्लिक स्कूल के प्रागण में पिछले दो दिन तक उत्तराखण्ड के कई रंग दिखाई दिये है। जब मंच पर थड़िया, चौफला, हारूल, रासौ, छोड़े, पवाड़े, बाजूबन्द, छोपुती, भोटिया, जौनसारी, तांदी गीत नृत्य आदि की उम्दा प्रस्तुती हो रही थी तो उसके साथ ऐसा महसूस हो रहा था कि अब तो पहाड़ के नदी झरने भी यही बहने वाले है। दरअसल पाण्डाल में मौजूद दर्शक अपनी अपनी जगह पर इन सभी गीतो पर थिरक रहे थे।

“उतराखण्ड लोक विरासत” के मंच पर स्वनामधन्य नरेन्द्र सिह नेगी, जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण जब मंच पर आये तो सम्पूर्ण पाण्डाल उतराखण्डमयी हो गया। दर्शक भी इन दोनो सख्शियतो के सुर से सुर मिलाने में पीछे नहीं रहे। इसके अलावा मंच पर दोनों दिन जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण ने लोक धुनो के विविध आयाम प्रस्तुत किये है। श्री भरतवाण के साथ एक दर्जन से भी अधिक कलावन्तो ने लोक धुनो को प्रस्तुत करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। इसी बीच मंच पर चारधाम ट्रस्ट के संस्थापक डा॰ के॰ पी॰ जोशी आये और अपने उद्बोधन में कह दिया कि अधिकांश कलावन्तो के नाम के पीछे “दास शब्द” का उचारण किया जाता है, लिखा भी जाता है। इसे भविष्य हटा दिया जाये। इस पर जागर सम्राट डा॰ प्रीतम भरतवाण ने जबाव दिया है कि “दास” का मतलब कोई गलत नहीं है। दास का संबध ईश्वर से है। इसीलिए इन कलावन्तो की बजाई हुई धुन पर देवता अवतरित होते हैं।

Lok virast 2024
Lok virast 2024

जनाब! लोक विरासत की यह कड़ी यही समाप्त नहीं होती। सम्पूर्ण राज्य के कोने कोने से आये कलाकारो ने अपने अपने पहनावा, बोली भाषा और खान पान का जो दो दो मिनट में उम्दा प्रस्तुती दी है वह आज तक के किसी भी आयोजन से ऊपर कहा जायेगा। इनकी उम्दा प्रस्तुतियों ने सच में उत्तराखण्डी होने का भान कराया है। ऐसा लग रहा था कि उत्तराखण्ड की “लोक विरासत” पर कोई वैश्विक खतरा नहीं है। इन्ही प्रस्तुतियों के बीच में देहरादून के जाने माने ज्वैलर्स कमल ज्वैलर्स ने हिस्सा लिया और कहा कि इन सभी की प्रस्तुतियों में जिस प्रकार के ओरनामेंट को कलाकारो ने पहना है, उसे वे भविष्य के लिए संरक्षित करने का कार्य करेंगे।

दरअसल लोक को जीना और उसे आत्मसात करना कोई कठीन कार्य नहीं है। बस आपको एक बार “उत्तराखण्ड लोक विरासत” में सम्मिलित होना होगा। इस दौरान एक तरफ मंच पर राज्यभर से आये लोक कलाकार राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे थे तो दूसरी तरफ पाण्डाल में सजे ज्वैलरी, कपड़ो और खान पान के स्टॉल से यही महसूस हो रहा था कि अभी हम जाख देवता के मेले या, चमोली के पाण्डव नृत्य या, यमुना घाटी के बिस्सू मेलों या, यू कहे कि कुमाउ अंचल के बिखौती मेंले से लेकर कालसन के मेले तक की हर खूशबू यहीं बिखेरी जा रही थी। खान पान के स्टॉल में पहाड़ी पकवानो की तासीर हर दर्शक को दुबारा खाने के लिए आमन्त्रण दे रही थी। उत्तराखण्ड लोक विरासत का यह कार्यक्रम सच में एक कदम और आगे बढ गया है। की लोग अब इस कार्यक्रम की इन्तजारी करते है। इसके अलावा दो दिन तक मंच पर राज्य के विभिन्न लोक गायको की विशेष प्रस्तुतियां भी आने वाले लोक कलाकारो के लिए सीख छोड़ गई है।

कुलमिलाकर “उत्तराखण्ड लोक विरासत” का यह कार्यक्रम अपने आप में अनूठा कहा जायेगा। इसलिए कि आयोजन में आरम्भ से लेकर अन्त तक राज्य के कोने कोने की मिट्टी की सुगन्ध फैल रही थी।

Lok virast 2024
Lok virast 2024

@मेंरी यह रिपोर्ट आपको कैसी लगी कमेंट करके अवश्य बताइए।

RELATED ARTICLES

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

एथलीट संदीप गुसाई बना उत्तरकाशी विधिक सेवा प्राधिकरण एंबेसडर

जनसामान्य में नशा उन्मूलन, विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्थान एवं खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, उत्तरकाशी द्वारा संदीप गुंसाई...

अतीत का प्रतिशोध नहीं लिया जा सकता, उसे केवल समझा जा सकता है : IAS शशि रंजन कुमार

By - Prem Pancholi ।। अतीत हमारी स्मृतियों में, खंडहरों में, और उन तरीकों में जीवित रहता है जिनसे वह आज भी हमारे अस्तित्व को...

सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद से लेनी पड़ेगी अनुमति

चारधाम यात्रा की गरिमा, सुरक्षा और शुचिता बनाए रखने हेतु सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के संबंध में शासन से दिशा निर्देश जारी हुए हैं।...

देहरादून : धामी कैबिनेट की बैठक संपन्न, खास विषयों पर त्वरित निर्णय

।। राज्य कैबिनेट ने कुल 12 प्रस्तावों को दी मंजूरी ।। उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी, जिसके तहत संस्कृत विद्यालयों की मान्यता,...

इतिहास के पन्नो से : अपना दायां अंगूठा दिखाना चाहिए और हम दिखायेंगे भी – दादा दौलतराम खुगशाल

By - dr. Arun Kuksal   दादा दौलतराम खुगशाल (मार्च, 1891- 3 फरवरी, 1960) टिहरी रियासत के विरुद्ध जन-संघर्षों का अग्रणी व्यक्तित्व- ‘‘आज तक राजा ने हमको पढ़ने-लिखने...

जिलाधिकारी के शख्त निर्देश, कहा आपदा के दौरान सभी विभाग बनायें समन्वय

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद देहरादून में आगामी मानसून एवं संभावित आपदा परिस्थितियों के दृष्टिगत आपदा प्रबंधन संबंधी...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

केतन लाल की निर्मम हत्या की चहुंओर चर्चा, समाज पर बड़ा कलंक।

By - Prem Pancholi   सोशल मीडिया पर जिस तरह से प्रतापनगर के ओण पट्टी के देवल गांव निवासी अनुसूचित जाति के किशोर केतन लाल की...

आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सरकारी वर्जिश

वैज्ञानिक योजना, कुशल प्रशासन और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया के जरिए आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि...

पर्यावरण दिवस : पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा ने किया कृषि अनुसंधान संस्थान में वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस पर IATR देहरादून में पौधारोपण एवं गोष्ठी का आयोजन। पद्मश्री प्रेम चंद शर्मा ने छात्रों को मोरिंगा और पंच पल्लव के...