Sunday, September 13, 2026
Home अल्मोड़ा उत्तराखण्ड में वर्षा और बरसात का चक्र

उत्तराखण्ड में वर्षा और बरसात का चक्र

उत्तराखण्ड में वर्षा और बरसात का चक्र

By – Chandrashekhar Tewari

उत्तराखण्ड का पूरा क्षेत्र मानसूनी जलवायु प्रदेश में आता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की हवाओं से यहाँ बहुत वर्षा होती है। प्रदेश की निचली शिवालिक श्रेणियों की स्थिति से मानसूनी हवाओं को उपर उठने में मदद मिल जाती है। इन हवाओं का आरोहण होता है और शीतलन की प्रक्रिया होती है तापमान में कमी आ जाने पर संघनन की प्रकिया से घने बादल बनने लगते हैं। इन्हीं बादलों से जुलाई व अगस्त माह में प्रदेश के विभिन्न भागों में तीव्रता के साथ वर्षा होती है। शिवालिक भाग में सबसे अधिक वर्षा की मात्रा दिखायी देती है। उत्तर दिशा को बढ़ते रहने से बादलों की वर्षण क्षमता में धीरे-धीरे कमी आने लगती है। महान हिमालय के बाद के वृष्टि छाया प्रदेश में तो बहुत ही कम वर्षा होती है। दक्षिण में तराई-भाबर व गंगा के मैदानी भागों में भी अपेक्षाकृत सामान्य से निम्न वर्षा होती है।

उत्तराखण्ड में सर्वाधिक वर्षा जून से सितम्बर के मध्य में होती है। इस अवधि में दून व शिवालिक व उसके समीपवर्ती भागों में 160 सेमी. से अधिक बारिश होती है। जबकि लघुहिमालय के निचले भागों व तराई में 60 से 120 सेमी. के करीब तथा महान हिमालय के दक्षिणवर्ती ढालों में 60 सेमी. से कम वर्षा होती है। जनवरी व फरवरी में प्रदेश में 7.5 से 10 सेमी. बारिश तथा मार्च से मई के मध्य 5.0 से 20 सेमी. के बीच बारिश होती है। सितम्बर के बाद वर्षा की मात्रा व उसके मिजाज में बदलाव आने लगता है और अक्टूबर से दिसम्बर तकस्थानीय भौगोलिक कारणों से बारिश होती है। इस अवधि में प्रदेश में बहुत ही कम वर्षा यानि 5.0 से 7.5 सेमी. के आसपास होती है।

Uttarakhand himalaya
Uttarakhand himalaya

दिसम्बर से फरवरी तक लघु हिमालय की ऊँची पहाड़ियों तथा महान हिमालय के बुग्यालों व उच्च पर्वत शिखरों में सामान्य हिमपात होता है। दिसम्बर से फरवरी माह तक प्रदेश के लघुहिमालय क्षेत्र के कई पर्वत शिखर जैसे गागर, ध्वज शिखर, मुनस्यारी, शामा,भटकोट, मनाघेर, भड़सार, सुक्खी, ख़िरसू , मोरियाना टॉप,बिनसर, मुक्तेश्वर, धनोल्टी, काणाताल, ग्वालदम, मौरनौला, देवस्थल, देववन, चकराता, भराड़ीसैण, दूधातोली, शिखर-भनार सहित कई अन्य ऊँची पहाड़ियां बर्फ से लकदक हो जाती हैं। इनमें कभी-कभार 3-4 फुट तक भी बर्फ गिर जाती है। प्रदेश के पर्वतीय जनमानस में एक पुरानी कहावत प्रचलन में रहती है – ‘ह्यून हिमाल और चौमास माल’ जिसका सामान्य अर्थ है कि यहां शीतकाल ‘ह्यून’ की बारिश हिमालय यानि उत्तर दिशा की ओर से तथा मानसूनकाल (चौमास) की बारिश दक्षिणी मैदानी दिशा की ओर से आती है।

@लेखक दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में एसोसिएट रिसर्च है

 

RELATED ARTICLES

रायबहादुर मुंशी हरि प्रसाद टम्टा जी की 139वीं जयंती: शिल्पकार समाज के लिए ऐतिहासिक योगदान

रायबहादुर मुंशी हरि प्रसाद टम्टा जी की 139वीं जयंती: शिल्पकार समाज के लिए ऐतिहासिक योगदान, वर्तमान चुनौतियाँ एवं भावी समाधान Dr. Sanjay उत्तराखंड के सामाजिक और...

जब लिंगुड़ा देखा, जब याद आया पहाड़।

आए याद पहाड़ By - Diwan mewadi आज लिंगुड़ क्या आए कि इन्होंने बचपन से मन में बसी पहाड़ की यादें ताज़ा कर दीं। थाली में रखे...

जब वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी ने वैज्ञानिक डी० डी० पंत को देखा

सुप्रसिद्ध भौतिकशास्त्री और हिमालय के चिंतक प्रो. डीडी पंत की पुण्यतिथि (11 जून, 2008) पर विशेष हमारे हिस्से के प्रो. डीडी पंत - चारु तिवारी By...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Latest Post

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान : सरकार

हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान यूएसडीएमए की शिक्षा विभाग के साथ बैठक में बनी रणनीति चेतावनी-सूचना से लेकर खोज-बचाव तक की...

हवाई यात्रा का एक खास अनुभव साझा कर रहे है संयुक्त निदेशक सूचना एवं लोक संपर्क विभाग डॉ० नितिन उपाध्याय

By - Dr. Nitin upadhyay अगर आप कनेक्टिंग फ्लाइट्स पकड़ते हैं और हब एंड स्पोक्स मॉडल नहीं जानते तो ये पोस्ट आपके लिए है। बनारस...

कॉन्क्लेव की सहभागिता से राज्य में फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा – श्री चौहान

चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव में उत्तराखंड फिल्म नीति की हुई सराहना तमिल फिल्म इंडस्ट्री ने दिखाई उत्तराखण्ड में फिल्मांकन...

सरस्वती ताल और केदारताल का होगा वैज्ञानिक सर्वे, वैज्ञानिको का दल रवाना

सरस्वती ताल और केदारताल के लिए दल रवाना सचिव आपदा प्रबंधन ने दिखाई हरी झंडी मुख्यमंत्री तथा आपदा प्रबंधन मंत्री ने दी शुभकामनाएं प्रदेश...

जल प्रबंधन को मिलेगा आधुनिक तकनीक का वैज्ञानिक आधार – MIKE Hydro Basin सॉफ्टवेयर

जल संसाधन प्रबंधन में आधुनिक तकनीक का नया अध्याय—MIKE Hydro Basin पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ देशभर से 400 से अधिक विशेषज्ञ,...

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

डिजिटल युग में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और पॉप कल्चर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ https://www.facebook.com/janmanchaajkal?locale=hi_IN हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय...

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas

Shaurya and Legacy of Karmaveer Jayanand Bharti Remembered on the 94th Anniversary of Pauri Kranti Diwas By - Prem Pancholi The Shail Shilpi Vikas Sangathan organized...

समाधान दिवस पर 120 शिकायतें दर्ज, त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया आरम्भ – जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान

जनसमस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ऋषिपर्णा सभागार में समाधान दिवस आयोजित किया गया। जिलाधिकारी डॉ....

झीलें कुछ समय के लिए दिखाई देती हैं, स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

गंगोत्री ग्लेशियर क्षेत्र में दिखाई देने वाली छोटी हिमनदीय झीलों से तत्काल बड़े खतरे की स्थिति नहीं-वाडिया मीडिया में प्रसारित खबरों के संबंध में यूएसडीएमए...

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार

आयोग से दिए जाने वाले आदेशों का पालन सुनिश्चित करें अधिकारी : मुकेश कुमार उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री मुकेश कुमार की अध्यक्षता...